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4 min read | अपडेटेड October 09, 2026, 07:30 IST
सारांश
वेंस ने एच-1बी वीजा पर नियुक्त विदेशी कर्मचारियों के लिए 'विदेशी अनुबंधित श्रमिक' और इस कार्यक्रम का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए 'वीजा मिल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

अमेरिका ने टाटा, विप्रो और इन्फोसिस समेत 8 IT कंपनियों पर लगाई रोक, ग्रीन कार्ड आवेदन होंगे प्रभावित (Photo: Shutterstock)
अमेरिका ने गुरुवार को कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब समेत आठ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (Permanent Labor Certification Program, PERM) से निलंबित कर दिया। अमेरिका ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। अमेरिका के श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा, 'मैं कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर रहा हूं।' उन्होंने कहा कि श्रम विभाग ने कई सक्रिय संघीय जांच के कारण माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।
वहीं अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, 'दुर्भाग्य से, अमेरिका में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जिसने माइक्रोसॉफ्ट से अधिक इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया हो।' उपराष्ट्रपति ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया और कहा था कि उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल सके। इसके बावजूद कंपनी को 6,000 से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर किए गए और उसने स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) के लिए 3,682 आवेदन किए, जिनमें करीब 1,000 आवेदन उन्हीं पदों के लिए थे, जिन पर नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारी काम कर रहे थे।
सॉन्डरलिंग ने कहा कि श्रम विभाग इन कंपनियों से जुड़े PERM के किसी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, '2009 से अब तक केवल इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया है। उन्हें एच-1बी वीजा के 2,30,000 से अधिक अनुमोदन और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं।' सॉन्डरलिंग ने कहा कि इसके कारण अमेरिकी कर्मचारियों के लिए सैकड़ों हजार नौकरियां प्रभावित हुईं।
हर साल मंजूर होने वाले एच-1बी आवेदनों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी 70% से अधिक है। वेंस ने एच-1बी वीजा पर नियुक्त विदेशी कर्मचारियों के लिए 'विदेशी अनुबंधित श्रमिक' और इस कार्यक्रम का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए 'वीजा मिल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। वेंस ने येल, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और कैलटेक समेत नौ प्रमुख यूनिवर्सिटीज द्वारा रिसर्चर्स के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जे-1 वीजा कार्यक्रम की भी जांच की घोषणा की।
वेंस ने कहा, 'इन यूनिवर्सिटीज में कुछ अजीब हो रहा है। वे इन वीजा का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इनका इस्तेमाल अमेरिकी ग्रैजुएट स्टूडेंट्स और अमेरिकी रिसर्चर्स की सैलरी को कम करने के लिए कर रहे हैं।' जे-1 प्रोग्राम के तहत विदेशी नागरिक रिसर्च, टीचिंग, लर्निंग और खास पेशेवर कामों समेत विभिन्न गतिविधियों के लिए एक्सचेंज विजिटर के रूप में अमेरिका आ सकते हैं। वेंस ने कहा, 'यह अमेरिकी कर्मचारी और अमेरिकी जीवनशैली का मूलभूत अपमान है। हम ऐसे वीजा प्रोग्राम के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकते, जिन्हें अमेरिकी कंपनियों को सबसे प्रतिभाशाली लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन उनका इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी को कम करने के लिए किया जाए।'
श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने कहा, 'मुझे परवाह नहीं है कि कोई यूनिवर्सिटी कितनी प्रतिष्ठित है। अगर कोई यूनिवर्सिटी कानून तोड़ती है और अमेरिकी लोगों के हितों के खिलाफ काम करती है, तो मैं यूनिवर्सिटी कैंपस में खुद आपको हथकड़ी लगा दूंगा।' उन्होंने कहा, 'मुझे परवाह नहीं है कि आपके पास कितना बड़ा फंड है, आपके पूर्व छात्रों का कितना प्रभाव है या कितने राजनेताओं से आपके सीधे संपर्क हैं। जैसा कि उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इसी वजह से हम वीजा धोखाधड़ी की जांच के लिए एक स्पेशल वर्कफोर्स बना रहे हैं, जिसमें सरकार के विभिन्न विभागों के जांच विशेषज्ञों को एक साथ लाया जाएगा।'
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