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Donald Trump को पसंद नहीं आया Iran का शांति प्रस्ताव, समझिए आखिर क्यों नहीं बन पा रही बात

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड April 28, 2026, 14:11 IST

सारांश

US-Iran Tension: ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दे और आर्थिक नाकेबंदी हटा ले, तो वह Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ ढीली कर सकता है। यही समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बहुत अहम माना जाता है।

US-Iran Tension

US-Iran Tension: अमेरिका चाहता है कि ईरान के साथ किसी भी बातचीत में सबसे पहले उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बात हो।

US-Iran Tension: हाल ही में ईरान ने अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए एक शांति प्रस्ताव भेजा था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह ईरान का यह प्रस्ताव पसंद नहीं आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप इस बात से नाराज थे कि इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं था। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ इस प्रस्ताव की समीक्षा की और साफ किया कि बिना परमाणु मुद्दे पर चर्चा के आगे बढ़ना उन्हें मंजूर नहीं है।
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ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया था?

अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि ईरान के साथ किसी भी बातचीत में सबसे पहले उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बात हो। लेकिन ईरान की तरफ से कहा गया कि अभी पहले खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव, खासकर समुद्री रास्तों और सुरक्षा से जुड़े विवादों को सुलझाया जाए। इसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाए। लेकिन अमेरिका इसे मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहा।

ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दे और आर्थिक नाकेबंदी हटा ले, तो वह Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ ढीली कर सकता है। यही समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बहुत अहम माना जाता है।

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi रूस पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात की। पुतिन ने ईरान के समर्थन की बात कही और शांति बहाल करने में मदद का भरोसा दिया।

परमाणु कार्यक्रम पर अटकी बातचीत

मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। ईरान चाहता है कि पहले युद्ध खत्म हो, खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही से जुड़े विवाद सुलझें, और उसके बाद न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बात हो। लेकिन अमेरिका साफ कह चुका है कि किसी भी बातचीत की शुरुआत परमाणु मुद्दे से ही होनी चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी कहा कि ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रोक न हो। उनका कहना है कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में न पहुंचे।

तनाव का खाड़ी देशों पर भी असर

इस तनाव का असर खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा सप्लाई पर भी पड़ रहा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार भी दबाव में है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है।

इसका असर तेल की कीमतों पर भी दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में लगभग 50% ज्यादा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की जनता को नुकसान पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता खुद वहां की सरकार की नीतियों से पीड़ित है और उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।

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