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  1. पहले ही क्वार्टर में सरकार ने 6 PSUs में बेची हिस्सेदारी, FY26 बजट लक्ष्य का 31% रेवेन्यू जुटाया

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पहले ही क्वार्टर में सरकार ने 6 PSUs में बेची हिस्सेदारी, FY26 बजट लक्ष्य का 31% रेवेन्यू जुटाया

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड July 03, 2026, 08:27 IST

सारांश

सरकार मई के मध्य से जून के बीच लगभग हर सप्ताह पब्लिक सेक्टर की एक कंपनी (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने के लिए बिक्री पेशकश (ओएफएस) लेकर आई। इस दौरान पब्लिक सेक्टर के छह प्रतिष्ठानों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने कुल 18,561 करोड़ रुपये जुटाए।

विनिवेश

विनिवेश ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में बजट लक्ष्य का 31% राजस्व जुटाया (Photo: Shutterstock)

सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण (Disinvestment and Asset Monetization) की रफ्तार तेज कर दी है और पहले क्वार्टर में ही पूरे फाइनेंशियल ईयर के बजट टारगेट का करीब 31% जुटा लिया है। यह किसी भी फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में डिसइनवेस्टमेंट प्रोसेस की अब तक की सबसे तेज प्रोग्रेस मानी जा रही है। सरकार मई के मध्य से जून के बीच लगभग हर सप्ताह पब्लिक सेक्टर की एक कंपनी (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने के लिए बिक्री पेशकश (ओएफएस) लेकर आई। इस दौरान पब्लिक सेक्टर के छह प्रतिष्ठानों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने कुल 18,561 करोड़ रुपये जुटाए। यह हिस्सेदारी बिक्री सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जीआईसी और आईआरएफसी में की गई। इसके अलावा, अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (Infrastructure Investment Trust, InvIT) के जरिये एसेट्स को बाजार पर चढ़ाने से भी 6,367 करोड़ रुपये हासिल हुए। इस तरह विनिवेश एवं मौद्रीकरण के जरिये अब तक कुल 24,928 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के बजट में इसके लिए 80,000 करोड़ रुपये का टारगेट रखा गया है। सरकार ने आगे भी पब्लिक सेक्टर की कई कंपनियों के विनिवेश की रूपरेखा तैयार कर ली है और उम्मीद है कि वह तय लक्ष्य को पार कर सकती है।

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LIC विनिवेश पर टिकी सबकी नजर

इस साल का सबसे बड़ा विनिवेश भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में हो सकता है। सरकार की एलआईसी में हिस्सेदारी 96.5% है, जिसे मई, 2027 तक घटाकर 90% करना अनिवार्य है। इससे पहले मई, 2022 में सरकार ने एलआईसी में 3.5% हिस्सेदारी बेचकर 20,500 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके अलावा आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश पर भी काम जारी है। इस दिशा में पहली कोशश नाकाम रहने के बावजूद सरकार नई बोलियां आमंत्रित कर इस प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी में है।

क्यों विनिवेश मोर्चे पर इतना एक्टिव हुई सरकार?

विनिवेश के मोर्चे पर सरकार की यह सक्रियता बढ़ते राजकोषीय दबाव के बीच सामने आई है। पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा और उर्वरक आयात महंगा होने से सब्सिडी खर्च बढ़ने की आशंका है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के पहले दो महीनों में ही राजकोषीय घाटा 1.62 लाख करोड़ रुपये, यानी वार्षिक लक्ष्य का 9.6% तक पहुंच चुका है। मई तक नेट टैक्स रेवेन्यू जहां सालाना लक्ष्य का 12.1% रहा, वहीं गैर-कर राजस्व (जैसे विनिवेश) 17% तक पहुंच गया। दूसरी ओर, राजस्व और पूंजीगत व्यय क्रम से 15.3% और 20.5% रहा।

कई बार विनिवेश के लक्ष्य से चूकी है सरकार

सरकार के सामने उर्वरक सब्सिडी के लगभग दोगुना होकर 3,00,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने और कच्चे तेल के आयात बिल बढ़ने की चुनौती है। साथ ही, अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून पर पड़ने वाले असर की भी चिंता है। ऐसे में 4.3% राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने के लिए विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से होने वाली आय अहम भूमिका निभाएगी। पिछले वर्षों में सरकार कई बार विनिवेश लक्ष्य हासिल कर पाने में नाकाम रही है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में 78,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 13,534 करोड़ रुपये और 2022-23 में 50,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 35,294 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके थे।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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