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E20 की जगह E10 लाने का कोई फैसला नहीं, BPCL ने कहा- पुरानी गाड़ियों के लिए कम-एथेनॉल ब्लेंड पर विचार जारी

Upstox

4 min read | अपडेटेड August 27, 2026, 19:09 IST

सारांश

भारत ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, उत्सर्जन कम करने और घरेलू एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण लगातार बढ़ाया है। E20 पेट्रोल को पिछले साल चरणबद्ध तरीके से पेश किया गया था।

E20

E10 में 10 फीसदी एथनॉल और E20 में 20 फीसदी एथनॉल होता है।

भारत की दूसरी सबसे बड़ी फ्यूल रिटेलर कंपनी, भारत पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (BPCL) ने गुरुवार को कहा कि E20 पेट्रोल की जगह E10 लाने का कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है। कंपनी ने साफ किया कि अभी बहस इस बात पर हो रही है कि क्या पुरानी गाड़ियों के लिए कम इथेनॉल वाले ब्लेंड की सुविधा होनी चाहिए और भारत के बड़े फ्यूल-डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में पेट्रोल का एक और ग्रेड कैसे सप्लाई किया जा सकता है।

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BPCL की सालाना शेयरहोल्डर मीटिंग के बाद एक मीडिया कॉल में कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय खन्ना ने कहा कि अगर सरकार इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी बदलने का फैसला करती है, तो E20 पेट्रोल से E10 पर स्विच करने में उन्हें कोई ऑपरेशनल या लॉजिस्टिकल चुनौती नहीं दिखती।

उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि E20 को E10 से बदला जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि कुछ हलकों में यह चर्चा जरूर हो रही है कि पुराने वाहन के मालिकों को कम एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प दिया जाना चाहिए। खन्ना ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह नहीं है कि E20 खत्म हो जाएगा और E10 आ जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि एथनॉल मिश्रण नीति में बदलाव को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

पेट्रोलियम कंपनियों के लिए हो सकती है बड़ी चुनौती

खन्ना ने कहा कि अगर E10 पर वापस जाने का फैसला होता है तो पेट्रोलियम कंपनियों के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे में बदलाव करना बड़ी चुनौती नहीं होगी। हालांकि, E20 की जगह E10 लाने और E20 के साथ E10 को एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने में अंतर है। देशभर में फैले बड़े ईंधन वितरण नेटवर्क के कारण एक अतिरिक्त ग्रेड के पेट्रोल की समानांतर आपूर्ति करना अधिक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती हो सकती है। यह चर्चा ऐसे समय हो रही है जब पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है। E10 में 10 फीसदी एथनॉल और E20 में 20 फीसदी एथनॉल होता है।

भारत ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण क्यों बढ़ाया?

भारत ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, उत्सर्जन कम करने और घरेलू एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण लगातार बढ़ाया है। इस महीने की शुरुआत में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग में सलाहकार आकाश पुजारी ने एक लेख में पुराने वाहनों को ध्यान में रखते हुए कम एथनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल फिर से उपलब्ध कराने की वकालत की थी।

E20 पेट्रोल को पिछले साल चरणबद्ध तरीके से पेश किया गया था और एक अप्रैल से देशभर के पेट्रोल पंप पर बिक्री के लिए यही एकमात्र पेट्रोल मिश्रण उपलब्ध है। कुछ उपभोक्ताओं और उद्योग से जुड़े लोगों ने दावा किया है कि E20 के इस्तेमाल से पुराने वाहनों के प्रदर्शन पर असर पड़ता है और उनके कुछ कलपुर्जों को नुकसान हो सकता है। हालांकि, सरकार ने इन दावों को बार-बार खारिज किया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय का क्या कहना है?

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि कई तरह के ईंधन की एक साथ आपूर्ति के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना और उसका रखरखाव करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। नागेश्वरन और पुजारी ने भी अपने लेख में कहा था कि E20 से बड़े पैमाने पर वाहन इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि इससे पुराने दोपहिया वाहनों के बड़े बेड़े के लिए दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। लेखकों ने सुझाव दिया था कि E20 के साथ E10 जैसे कम एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि पुराने वाहनों की सुरक्षा के साथ सरकार का एथनॉल कार्यक्रम जारी रखा जा सके। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले महीने कई मौकों पर कहा था कि प्रत्येक पेट्रोल पंप पर सामान्य पेट्रोल, E10 और E20 तीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने से बड़ी लॉजिस्टिक संबंधी दिक्कतें पैदा होंगी।

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