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3 min read | अपडेटेड June 03, 2025, 09:54 IST
सारांश
Deductions under Old Tax Regime: पुरानी कर व्यवस्था के तहत ऐसे कई टैक्स डिडक्शन मिलते हैं जो नई कर व्यवस्था के तहत हटा दिए गए हैं। इन्हें क्लेम करने में फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आने के बाद आयकर विभाग ने इनसे जुड़ी डीटेल्स आयकर रिटर्न फाइल करते वक्त देना अनिवार्य कर दिया है।

टैक्स डिडक्शन पाने के लिए गलत जानकारी या फर्जी क्लेम जमा करने पर जुर्माना या सजा हो सकती है।
दरअसल, आयकर विभाग के सामने रीफंड के लिए फर्जी क्लेम के कई मामले सामने आ रहे थे। इसलिए अब करदाताओं को अपने पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (Public Provident Fund, PPF), इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (Equity Linked Savings Scheme, ELSS) जैसे निवेश का पूरा ब्रेक-अप देना होगा। यह FY 2024-25 (AY 2025-26) के लिए आईटीआर फाइल करते वक्त लागू होगा।
करदाता आयकर रिटर्न में जो जानकारी देंगे, उसे PAN और आधार के जरिए क्रॉस-वेरिफाई किया जाएगा। इससे बीमा कंपनियों, बैंक, वहन (mParivahan app) नियोक्ता और सरकारी प्लेटफॉर्म्स के पास मौजूद जानकारी को मिलाया जाएगा। इसके जरिए आयकर विभाग की कोशिश फर्जी डिडक्शन क्लेम कर रीफंड पाने की कोशिश पर नकेल लगाने की है।
यहां एक नजर डालते हैं उन डीटेल्स पर जो करदाताओं को पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए आयकर रिटर्न फाइल करते वक्त देनी होंगी-
LIC, PPF, NSC, ELSS, होम लोन के मूल भुगतान पर सेक्शन 80 सी के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए पॉलिसी नंबर या दस्तावेज की पहचान संख्या बतानी होगी।
घर के किराये के अलाउएंस पर डिडक्शन के लिए वेतनप्राप्त कर्मचारियों को काम करने की जगह, बेसिक सैलरी, जो HRA मिला हो और जो किराया दिया जा रहा हो, उनकी डीटेल देनी होंगी।
स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शन के लिए बीमा कंपनी का नाम और पॉलिसी नंबर देना होगा।
घर कर्ज के ब्याज पर सेक्शन 24बी के तहत और उच्च शिक्षा के लिए लोन के ब्याज पर सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन के लिए देनदार का नाम, कर्ज से जुड़ा अकाउंट नंबर, सैंक्शन की तारीख, लोन की कुल राशि, क्लोजिंग बैलेंस, ब्याज की राशि बतानी होगी।
इसी तरह इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए कर्ज के ब्याज पर सेक्शन 80ईईबी के तहत भी देनदार का नाम, कर्ज से जुड़ा अकाउंट नंबर, सैंक्शन की तारीख, लोन की कुल राशि, क्लोजिंग बैलेंस, ब्याज की राशि बतानी होगी। साथ ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर भी बताना होगा।
अपने या अपने ऊपर निर्भर नॉमिनी की किसी खास बीमारी के इलाज पर होने वाले खर्च के लिए सेक्शन 80डीडीबी के तहत डिडक्शन के लिए बीमारी का नाम बताना होगा।
सेक्शन 80ईई से अलग किफायती रिहायशी संपत्ति के लिए कर्ज पर ब्याज के लिए अतिरिक्त छूट के लिए सेक्शन 80ईईए के तहत ही जानकारी बतानी होगी।
अगर कोई टैक्सपेयर ज्यादा टैक्स रिफंड पाने के लिए अपनी आय गलत बताता है, तो उसे भारी सजा मिल सकती है। आयकर विभाग के अनुसार गलत बताई गई आय पर 200% तक जुर्माना और साथ में कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
गंभीर मामलों में, आयकर विभाग टैक्स चोरी का आपराधिक मामला भी दर्ज कर सकता है। अगर किसी ने ₹25 लाख से अधिक की आय छुपाई है, तो उसे 6 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल की सजा और जुर्माना भी हो सकता है। अन्य मामलों में, 3 महीने से 2 साल तक की सख्त सजा हो सकती है।
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