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  1. लंबे वक्त का निवेश देता है ज्यादा प्रॉफिट? जानें, क्या हैं फायदे

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लंबे वक्त का निवेश देता है ज्यादा प्रॉफिट? जानें, क्या हैं फायदे

Upstox

2 min read | अपडेटेड October 29, 2024, 18:19 IST

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सारांश

लंबे वक्त का निवेश ज्यादा रिटर्न दे सकता है। सोच- समझकर और अलग- अलग जगहों पर किया गया निवेश रिस्क से भी बचाता है और स्ट्रेस से भी।

लंबे वक्त पर मिलता है ज्यादा फायदा

लंबे वक्त पर मिलता है ज्यादा फायदा

अपनी मेहनत की कमाई कोई भी शख्स इस उम्मीद में कहीं निवेश करता है कि उस पर फायदा कमा सके। हालांकि, बाजार में उतार- चढ़ाव के साथ निवेश का भविष्य बदल भी सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि लंबे वक्त के लिए किया गया निवेश ज्यादा रिटर्न देता है।

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आमतौर पर तीन साल से ज्यादा के लिए किए गए निवेश को एक लंबे टर्म का निवेश माना जाता है। वहीं, 1-3 साल के लिए ली गई स्कीम शॉर्ट- टर्म होती है। एक बड़े समय के लिए पैसे कहीं लगाने से पहले कई बातों का ध्यान रखना होता है लेकिन आखिर में इसके काफी फायदे होते हैं।

सोच- समझकर करें निवेश

सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि पैसे का इस्तेमाल कहां होना है। अगर कोई दूर का बड़ा खर्चा है जैसे बच्चों की शादी, तो कई साल के लिए पैसे लगाए जा सकते हैं। ये निवेश भी अलग- अलग ऐसेट- जैसे बॉन्ड, शेयर, रियल एस्टेट में किया जा सकता है। इनसे मिलने वाला प्रॉफिट कई साल बाद फाइनल होता है इसलिए बीच के उतार- चढ़ाव का नकारात्मक असर कम होता है।

टैक्स का रहे ध्यान

जिस ऐसेट में आपने पैसे लगाए हैं, उसकी कीमत के लंबे वक्त में बढ़ने के ज्यादा चांस होते हैं। हालांकि, इस पर लॉन्ग- टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) लगता है। इसलिए जरूरी है कि कैपिटल गेन और टैक्स दोनों को पहले से कैलकुलेट करके निवेश किया जाए।

लंबे वक्त तक निवेश करने पर ब्याज भी कंपाउंड हो जाता है। हर साल रिटर्न खुद निवेश बन जाता है और आखिर में प्रॉफिट ज्यादा होता है।

कम हो जाता है रिस्क

अमूमन जब लंबे वक्त के लिए निवेश किया जाता है तो अलग- अलग ऐसेट्स में किया जाता है। बीच- बीच में किसी एक ऐसेट में उतार- चढ़ाव दिखने पर सबसे फायदेमंद कीमतों पर उसे बेचा जा सकता है। ऐसा करने से एक साथ सारे पैसे डूबते नहीं हैं और पहले के मुकाबले कम नुकसान होता है।

नहीं लेनी है टेंशन

क्योंकि इनमें रिस्क कम होता है, एक बार निवेश करने के बाद हर वक्त इसे मॉनिटर नहीं करना होता। बार- बार खरीद- फरोख्त करने पर ट्रेडिंग फी भी नहीं देनी होती।

इसके अलावा जब एक लंबा समय हाथ में होता है तो खरीदने- बेचने से जुड़े फैसले समझदारी से किए जा सकते हैं। जल्दी- जल्दी आने वाले बदलाव के तनाव का असर उन फैसलों पर कम होता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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