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4 min read | अपडेटेड May 30, 2025, 11:30 IST
सारांश
Advantages & Disadvantages of ULIPs: इसमें आपके द्वारा भुगतान किए गए प्रीमियम का एक हिस्सा आपकी पसंद के फंड में निवेश किया जाता है और बाकी लाइफ कवरेज के लिए आवंटित किया जाता है। यहां हमने इसके फायदे और नुकसान के बारे में पूरी जानकारी दी है।

ULIP में निवेशकों को कई स्टेज पर टैक्स बेनिफिट्स मिलता है।
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान यानी ULIP निवेशकों के बीच काफी पॉपुलर निवेश विकल्प है। इसमें निवेशकों को निवेश की सुविधा तो मिलती ही है, इसके साथ ही उन्हें इंश्योरेंस भी मिलता है। इसके जरिए आप लॉन्ग टर्म में एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। इसके साथ ही आपकी फैमिली की सुरक्षा के लिए इसमें लाइफ कवर भी मिलता है।
इसमें आपके द्वारा भुगतान किए गए प्रीमियम का एक हिस्सा आपकी पसंद के फंड में निवेश किया जाता है और बाकी लाइफ कवरेज के लिए आवंटित किया जाता है। यहां हमने इसके फायदे और नुकसान के बारे में पूरी जानकारी दी है।
ULIP में निवेशकों को कई स्टेज पर टैक्स बेनिफिट्स मिलता है। आप जो प्रीमियम भरते हैं, उस पर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। जब आप अपने फंड्स को एक से दूसरे फंड में स्विच करते हैं, उस पर कोई टैक्स नहीं लगता।
मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि भी कुछ शर्तों के अधीन धारा 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री हो सकती है। 1 अप्रैल 2026 से अगर किसी ULIP का सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से ज्यादा है, तो उस पर मिलने वाला मुनाफा टैक्स फ्री नहीं रहेगा।
ULIP में आप खुद तय कर सकते हैं कि आपका पैसा कहां लगे। आप इक्विटी फंड, डेट फंड या दोनों में निवेश कर सकते हैं। इक्विटी फंड का मतलब शेयर बाजार में कंपनियों के शेयरों में निवेश से है। वहीं, डेट फंड के तहत डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश होता है।
ULIP सिर्फ निवेश नहीं, बीमा कवर भी देता है। ज्यादातर ULIP प्लान्स सालाना प्रीमियम का 10 गुना तक का लाइफ कवर देते हैं। यह बीमा कवर कंपनी और पॉलिसी के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
ULIP में आपका पैसा इक्विटी और डेट फंड्स में लगाया जाता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का फायदा मिल सकता है। ULIP में रिटर्न पूरी तरह से मार्केट पर निर्भर होते हैं, इसलिए निवेश से पहले इसके फायदे और नुकसान जरूर समझें।
ULIP में आप अपनी जरूरत, जोखिम लेने की क्षमता और बाजार की स्थिति के अनुसार फंड्स के बीच स्विच कर सकते हैं। यह सुविधा बिना पॉलिसी को तोड़े मिलती है, जिससे आपका निवेश ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम करता है।
ULIP में लॉक-इन पीरियड (5 साल) के बाद आप अपने फंड से थोड़ी-थोड़ी रकम निकाल सकते हैं। इसमें इमरजेंसी के लिए, बच्चों की फीस या फैमिली ट्रिप के लिए फंड निकालने की सुविधा है। आमतौर पर इस पर कोई चार्ज नहीं लगता, लेकिन 5 साल से पहले निकासी संभव नहीं है।
अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उनके नॉमिनी को फंड वैल्यू या सम एश्योर्ड (जो भी ज्यादा हो) के रूप में रकम दी जाती है। यह उनके परिवार को भविष्य के खर्चों में मदद करता है।
ULIP में 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इस दौरान आप पैसा नहीं निकाल सकते, जिससे इमरजेंसी में फंड्स की कमी हो सकती है।
ULIP के रिटर्न मार्केट पर निर्भर होते हैं। अगर आप जोखिम से डरते हैं या मार्केट को समझते नहीं हैं, तो इसमें नुकसान भी हो सकता है। ULIP में बीमा कवर थोड़ा कम होता है क्योंकि आपके प्रीमियम का एक हिस्सा निवेश में चला जाता है।
ULIP में कई तरह के चार्ज लगते हैं, जिसमें प्रीमियम एलोकेशन चार्ज, फंड मैनेजमेंट चार्ज और गारंटी चार्ज वगैरह शामिल हैं। ये चार्जेस रिटर्न को कम कर सकते हैं। अगर आप 5 साल से पहले पॉलिसी बंद करते हैं, तो सरेंडर चार्ज देना पड़ता है जिससे रिटर्न और कम हो जाता है। मार्केट के अनुसार बार-बार फंड्स बदलना अच्छा रिटर्न दिला सकता है, लेकिन इस पर भी चार्ज लगता है जो रिटर्न कम करता है।
ULIP एक ऐसा प्लान है जो आपको बीमा और निवेश दोनों का फायदा देता है। टैक्स में छूट, फंड स्विच करने की सुविधा और लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न इसकी खासियत है। लेकिन इसके साथ कुछ खर्च और लॉक-इन जैसी सीमाएं भी हैं। इसलिए ULIP में निवेश करने से पहले इसके फायदे और नुकसान को समझकर ही फैसला लें और अपने फाइनेंशियल गोल्स के अनुसार आगे बढ़ें।
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