पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड March 30, 2026, 14:28 IST
सारांश
इनकम टैक्स विभाग ने बैंकों से मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस काटने के नियमों को लेकर बड़ी सफाई दी है। नए इनकम टैक्स कानून 2025 के तहत अब यह साफ हो गया है कि सभी बैंकिंग संस्थानों को एक तय लिमिट तक ब्याज पर टैक्स काटने की जरूरत नहीं है। इससे सीनियर सिटीजन और आम जमाकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

नए इनकम टैक्स नियमों के तहत बैंकों को टीडीएस काटने की लिमिट पर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है।
नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत के साथ ही इनकम टैक्स के नियमों में कई बदलाव हुए हैं। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बैंकों से मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस (TDS) काटने के नियमों को लेकर एक बहुत बड़ी सफाई दी है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने के बाद बैंकों और टैक्स पेयर्स के मन में टीडीएस की लिमिट और बैंकिंग संस्थानों की परिभाषा को लेकर कुछ सवाल थे, जिन्हें अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पूरी तरह दूर कर दिया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के इस कदम से आम नागरिकों को ब्याज पर लगने वाले टैक्स की प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी।
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के पुराने नियमों के तहत, बैंकों को एक तय लिमिट से ज्यादा ब्याज देने पर टीडीएस काटना पड़ता था। सीनियर सिटीजन के लिए यह लिमिट 50,000 रुपये और दूसरों के लिए अलग तय थी। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 में टीडीएस से जुड़ा यह नियम अब सेक्शन 393(1) में शामिल किया गया है। लेकिन नए कानून की धारा 402 में 'बैंकिंग कंपनी' की परिभाषा से कुछ पुराने शब्दों को हटा दिया गया था, जिससे यह डर था कि क्या सभी बैंकिंग संस्थानों को पहले जैसी छूट मिलेगी या नहीं। इसी भ्रम को दूर करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अब नया स्पष्टीकरण जारी किया है।
पहले के कानून में बैंकिंग कंपनी की परिभाषा में उन सभी संस्थानों को शामिल किया गया था जो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के दायरे में आते हैं। नए कानून में कुछ शब्दों को कम कर दिया गया, जिससे बैंकों को लग रहा था कि शायद टीडीएस काटने की छूट वाली लिमिट के नियम बदल गए हैं। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ कर दिया है कि भले ही परिभाषा में कुछ शब्द कम दिख रहे हों, लेकिन बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के सेक्शन 51 के तहत आने वाले सभी बैंक और संस्थान अब भी 'बैंकिंग कंपनी' ही माने जाएंगे। इसका मतलब है कि कानून के टेक्निकल बदलाव से पुराने फायदों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस सफाई का सबसे बड़ा फायदा उन जमाकर्ताओं को होगा जिनकी कमाई का मुख्य जरिया बैंकों से मिलने वाला ब्याज है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कंफर्म किया है कि नए कानून के तहत भी बैंकों को उस ब्याज पर टैक्स नहीं काटना होगा जो तय लिमिट से कम है। यानी 50,000 रुपये या 1,00,000 रुपये तक के ब्याज पर बैंक कोई टीडीएस नहीं काटेंगे। यह नियम सीनियर सिटीजन और छोटे बचतकर्ताओं के लिए बहुत बड़ी राहत है। इससे बैंक और ग्राहकों के बीच होने वाले विवाद कम होंगे और टैक्स की कागजी कार्रवाई भी पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी।
इनकम टैक्स के नियमों में क्लैरिटी होना बहुत जरूरी है, खासकर जब बात ब्याज और टीडीएस की हो। अगर बैंक गलती से कम ब्याज पर भी टीडीएस काट लेते, तो ग्राहकों को बाद में रिफंड क्लेम करने में काफी परेशानी होती। अब इस स्पष्टीकरण के बाद बैंकों को पूरी तरह पता है कि उन्हें किन नियमों का पालन करना है। यह बदलाव नए कानून के कार्यान्वयन को और भी सरल बना देगा।
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