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3 min read | अपडेटेड March 30, 2026, 07:28 IST
सारांश
दुनिया भर में चल रहे तनाव और एनर्जी सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब देश के उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सस्ता केरोसिन (मिट्टी का तेल) मिलेगा, जो पहले केरोसिन फ्री हो चुके थे। यह सुविधा फिलहाल 60 दिनों के लिए दी गई है।

सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए केरोसिन सप्लाई को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं।
दुनियाभर में चल रही उठापटक और जियो-पॉलिटिकल तनाव की वजह से एनर्जी सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी की जरूरतों पर न पड़े, इसके लिए भारत सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत देश के उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी फिर से सस्ता मिट्टी का तेल (केरोसिन) बांटा जाएगा, जिन्हें पहले 'केरोसिन फ्री' घोषित किया जा चुका था। यह फैसला फिलहाल 60 दिनों के लिए एक इमरजेंसी उपाय के तौर पर लिया गया है।
मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्सों में तनाव का माहौल है, जिसकी वजह से कच्चे तेल और अन्य एनर्जी रिसोर्सेज की सप्लाई चैन प्रभावित हुई है। इसी स्थिति को भांपते हुए केंद्र सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के जरिए सुपीरियर केरोसिन ऑयल (एसकेओ) के एड-हॉक एलोकेशन का फैसला किया है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर हिस्से में, खासकर उन राज्यों में जहां केरोसिन की सप्लाई बंद कर दी गई थी, वहां भी लोगों को खाना पकाने और रोशनी के लिए सस्ते ईंधन की कमी न हो।
सरकार के इस फैसले से दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर जैसे 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, इन इलाकों में जो राज्य केरोसिन फ्री हो चुके थे, वहां भी अब पीएसयू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के जरिए तेल पहुंचाया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था केवल घरों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि ग्लोबल मार्केट में बढ़ती कीमतों का असर गरीब और मध्यम वर्ग के किचन पर न पड़े।
सप्लाई को तेज करने और लोगों तक आसानी से तेल पहुंचाने के लिए सरकार ने नियमों में भी ढील दी है। अब चिन्हित किए गए पेट्रोल पंपों पर 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर करने की इजाजत दे दी गई है। इसके लिए पुराने लाइसेंस नियमों और पेट्रोलियम रूल्स 2002 के कुछ प्रावधानों से अस्थायी रूप से छूट दी गई है। एजेंटों और डीलरों को भी तेल के रखरखाव और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जरूरी लाइसेंस की प्रक्रियाओं में राहत मिली है, ताकि बिना किसी कानूनी अड़चन के तेल की सप्लाई चेन चालू रखी जा सके।
भले ही सरकार ने नियमों को आसान बनाया है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी। मंत्रालय ने साफ कहा है कि चीफ कंट्रोलर की तरफ से तय किए गए सभी सेफ्टी नॉर्म्स और ऑपरेशनल गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। इसके अलावा, तेल की बिक्री और स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड मेंटेन करना अनिवार्य होगा। संबंधित जिला अधिकारी और पेट्रोलियम सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पेसो) के अधिकारी कभी भी इन सेंटर्स का निरीक्षण कर सकते हैं। यह पूरी व्यवस्था फिलहाल 60 दिनों तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी।
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