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5 min read | अपडेटेड June 16, 2026, 11:00 IST
सारांश
इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर फाइल करने से पहले टैक्सपेयर्स को कुछ जरूरी बातों की जानकारी होना बहुत फायदेमंद होता है। भारतीय टैक्स नियमों के मुताबिक कुछ ऐसी कमाई होती है जिस पर सरकार एक भी रुपया टैक्स नहीं लेती है। इन 5 मुख्य तरीकों से होने वाली इनकम पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।

आईटीआर फाइलिंग के दौरान इन 5 टैक्स फ्री कमाई की जानकारी होना हर टैक्सपेयर के लिए जरूरी है।
इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन आते ही लोग टैक्स बचाने के तरीके ढूंढने लगते हैं। अधिकतर टैक्सपेयर्स का पूरा ध्यान निवेश करके टैक्स छूट पाने या डिडक्शन क्लेम करने पर होता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय टैक्स नियमों के तहत कुछ ऐसी कमाई भी होती है, जिस पर शुरुआत से ही एक भी रुपया टैक्स नहीं लगता है। यानी इस तरह की इनकम पर सरकार को कोई टैक्स देने की जरूरत नहीं होती है। अगर आप भी अपनी कमाई का सही मैनेजमेंट करना चाहते हैं और टैक्स के बोझ को कम करना चाहते हैं, तो आपको इन टैक्स फ्री सोर्सेज के बारे में जरूर पता होना चाहिए।
भारतीय इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10(1) के तहत देश में कृषि भूमि यानी खेती की जमीन से होने वाली कमाई को पूरी तरह से टैक्स फ्री रखा गया है। इस दायरे में खेती के काम से होने वाली इनकम, फसलों को बेचने से मिलने वाला पैसा, खेती की जमीन से मिलने वाला किराया और कृषि से जुड़े अन्य ऑपरेशन्स से होने वाली कमाई शामिल होती है। सरकार का मकसद देश में कृषि को बढ़ावा देना और किसानों को राहत देना है, इसलिए इस कमाई को कुल टैक्स योग्य इनकम में शामिल नहीं किया जाता है। हालांकि यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगर किसी भारतीय नागरिक को भारत से बाहर मौजूद किसी कृषि भूमि से कमाई होती है, तो उस पर भारतीय टैक्स नियमों के मुताबिक टैक्स देना होगा।

किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस को मिलने वाली संपत्ति या धन पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। विरासत में मिली इस संपत्ति पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है क्योंकि इनकम टैक्स कानून में वसीयत या उत्तराधिकार के जरिए मिलने वाले एसेट्स को गिफ्ट के टैक्स नियमों से अलग रखा गया है। इसलिए जब भी आपको अपने पूर्वजों या माता पिता से कोई प्रॉपर्टी, मकान, गहने या पैसा मिलता है, तो उस समय उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। हालांकि इसमें एक जरूरी बात ध्यान रखने वाली है कि अगर आपको उस विरासत में मिली संपत्ति से आगे कोई कमाई होती है, जैसे कि वसीयत में मिले मकान को किराए पर उठाने से मिलने वाला रेंट या मिली हुई रकम को बैंक में जमा करने पर मिलने वाला ब्याज, तो वह कमाई पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आएगी।
भारत में कुछ ऐसी सरकारी और चुनिंदा बचत स्कीम्स हैं जिन पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी का पैसा पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। उदाहरण के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी स्कीम्स इसमें शामिल हैं। इन स्कीम्स में निवेश करने पर आपको न सिर्फ टैक्स में छूट मिलती है, बल्कि हर साल मिलने वाला ब्याज और स्कीम के पूरे होने पर मिलने वाला मैच्योरिटी रेवेन्यू भी पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। लेकिन इन स्कीम्स का पूरा फायदा तभी मिलता है जब आप मैच्योरिटी का समय पूरा होने के बाद ही पैसा निकालते हैं। अगर आप समय से पहले यानी प्रीमैच्योर विड्रॉल करते हैं, तो कुछ मामलों में आपको टैक्स या पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है।
इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10(10D) के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम और बोनस पूरी तरह से टैक्स फ्री होते हैं। यह नियम पारंपरिक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और एंडोमेंट पॉलिसी के साथ साथ यूलिप पर भी लागू होता है। लेकिन इसके लिए सरकार ने कुछ नियम और शर्तें तय की हैं। साल 2012 के बाद जारी की गई पॉलिसियों के लिए यह जरूरी है कि आपका सालाना प्रीमियम पॉलिसी के सम एश्योर्ड के 10 पर्सेंट से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर आपका प्रीमियम इस लिमिट के भीतर है, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा रेवेन्यू टैक्स फ्री रहेगा। इन सभी बातों को समझकर टैक्सपेयर्स अपने फ्यूचर के लिए एक बेहतर और मजबूत पोर्टफोलियो तैयार कर सकते हैं जिससे उनका नेट प्रॉफिट और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दोनों ही शानदार बने रहें।
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