पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 14, 2026, 14:59 IST
सारांश
चांदी की कीमतों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में 89 डॉलर और घरेलू बाजार में 2.79 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छू लिया है। पिछले साल 150 प्रतिशत की भारी बढ़त के बाद अब निवेशक इसमें पैसा लगाने के तरीके ढूंढ रहे हैं।

चांदी की बढ़ती चमक के बीच निवेशक असमंजस में क्यों हैं?
नए साल की शुरुआत के साथ ही सर्राफा बाजार में चांदी की चमक फीकी पड़ने का नाम नहीं ले रही है। चांदी ने प्रदर्शन के मामले में सोने को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें 89 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई हैं, जो एक ऐतिहासिक लेवल है। अगर हम पिछले साल की बात करें, तो चांदी की कीमतों में लगभग 150 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया था। लंदन के बाजारों में चांदी की आपूर्ति में आई कमी और पिछले साल अक्टूबर में बनी शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति ने कीमतों को इस ऊंचे लेवल पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।
घरेलू बाजार की बात करें तो भारतीय वायदा बाजार यानी MCX पर चांदी की कीमतों ने तहलका मचा दिया है। यहां चांदी की कीमतों ने एक बड़ी छलांग लगाई और यह 2,79,528 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड लेवल को छू गई। भारत में इस समय शादी-ब्याह का सीजन भी शुरू होने वाला है, जिससे घरेलू मांग में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। वैश्विक संकेतों और रुपये की स्थिति ने भी इन कीमतों को ऊपर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाई है। कीमतों में आई इस अचानक तेजी ने आम खरीदारों की चिंता तो बढ़ा दी है, लेकिन निवेशकों के लिए यह कमाई का एक बड़ा मौका बनकर उभरा है। अब सवाल यह उठता है कि इस रिकॉर्ड ऊंचाई पर चांदी में निवेश कैसे किया जाए।
चांदी में निवेश का एक आधुनिक और लोकप्रिय तरीका सिल्वर ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है। यह शेयर बाजार में लिस्टेड होता है और इसे आप अपने डीमैट खाते के जरिए बिल्कुल वैसे ही खरीद या बेच सकते हैं जैसे किसी कंपनी के शेयर को। सिल्वर ईटीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी कीमत सीधे तौर पर भौतिक चांदी की बाजार कीमतों से जुड़ी होती है। इसमें शुद्धता की कोई चिंता नहीं होती और न ही इसे संभालने या चोरी होने का डर रहता है। हालांकि, इसके लिए आपके पास एक डीमैट खाता होना अनिवार्य है और इसे खरीदने पर आपको ब्रोकरेज चार्ज भी देना पड़ सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बाजार की हलचल पर नजर रखते हैं।
दूसरा विकल्प सिल्वर म्यूचुअल फंड या सिल्वर फंड ऑफ फंड्स का है। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जिनके पास डीमैट खाता नहीं है या जो शेयर बाजार की रोजमर्रा की उठापटक में नहीं पड़ना चाहते। सिल्वर म्यूचुअल फंड में आप साधारण म्यूचुअल फंड की तरह निवेश कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आप SIP के जरिए हर महीने एक छोटी रकम से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। यह फंड सीधे सिल्वर ईटीएफ में निवेश करते हैं। हालांकि, ईटीएफ के मुकाबले इसमें खर्च का अनुपात यानी एक्सपेंस रेशियो थोड़ा ज्यादा हो सकता है, लेकिन सुविधा के मामले में यह काफी आसान विकल्प माना जाता है।
जब बात चुनाव की आती है, तो यह आपकी जरूरत और निवेश के तरीके पर निर्भर करता है। अगर आप एक एक्विट निवेशक हैं और आपके पास डीमैट खाता है, तो सिल्वर ईटीएफ आपके लिए कम लागत वाला एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि यहां आप रियल टाइम कीमतों पर ट्रेड कर सकते हैं। इसके उलट, यदि आप लंबे समय के लिए धीरे-धीरे पूंजी जुटाना चाहते हैं और अनुशासन के साथ निवेश करना चाहते हैं, तो सिल्वर म्यूचुअल फंड की एसआईपी आपके लिए ज्यादा बेहतर साबित होगी।
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