पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड May 22, 2026, 16:14 IST
सारांश
भारत के नौकरीपेशा वर्ग के लिए रिटायरमेंट की सही प्लानिंग करना बेहद जरूरी है। इसके लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय विकल्प हैं। टैक्स लक्ष्यों, वेतन और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से इनमें से सही माध्यम का चुनाव किया जा सकता है।

रिटायरमेंट के बाद आर्थिक आजादी के लिए ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस निवेश के सबसे बेहतरीन विकल्प हैं। | Image: Shutterstock
भारत में नौकरीपेशा लोगों के पास अपने रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए निवेश के कई शानदार विकल्प मौजूद हैं। इसमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय और भरोसेमंद टूल्स कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की EPF योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड और नेशनल पेंशन सिस्टम हैं। कोई भी कर्मचारी अपने वेतन, टैक्स सेविंग के लक्ष्यों और भविष्य की प्लानिंग के आधार पर इन इंस्ट्रूमेंट्स को चुन सकता है। ये सभी स्कीम्स अपनी खासियतों और फायदों के साथ आती हैं। जहां EPF अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है और एंप्लायर के योगदान के साथ सुरक्षित रिटर्न देता है, वहीं PPF और NPS के जरिए भी लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF उन पारंपरिक निवेशकों के लिए एक आदर्श विकल्प है जो बिना किसी जोखिम के लंबी अवधि में पूरी तरह टैक्स-फ्री फंड बनाना चाहते हैं। यह केंद्र सरकार द्वारा समर्थित एक बेहद सुरक्षित योजना है जिसमें निवेश करने पर पैसा 15 साल के लिए लॉक हो जाता है। इसमें एक फाइनेंशियल ईयर के भीतर न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा करने की सुविधा मिलती है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किया जाने वाला निवेश टैक्स छूट के दायरे में आता है, और साथ ही मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम भी पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशक इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में सरकार इस योजना पर 7.10% की दर से सालाना ब्याज दे रही है। यदि कोई निवेशक हर साल PPF में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश पूरे 30 सालों तक जारी रखता है, तो उसकी कुल निवेशित रकम 45 लाख रुपये होगी, जिस पर करीब 1.09 करोड़ रुपये का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी वैल्यू लगभग 1.54 करोड़ रुपये हो जाएगी।
EPF देश के अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य और बेहद मजबूत रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है, जिसे ईपीएफओ द्वारा मैनेज किया जाता है। इसमें कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12% हिस्सा कटता है और इतना ही योगदान कंपनी यानी एंप्लायर की तरफ से भी किया जाता है। वर्तमान में सरकार इस पर 8.25% का शानदार ब्याज दे रही है, जो एक निश्चित अवधि की सेवा के बाद पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।
इस स्कीम की एक और खास बात यह है कि अगर कोई कर्मचारी अनिवार्य 12% से ज्यादा का योगदान अपनी मर्जी से करना चाहता है, तो वह वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड यानी VPF का विकल्प चुन सकता है। इस अतिरिक्त निवेश पर भी ईपीएफ के बराबर ही ब्याज मिलता है। यदि मान लें कि एक कर्मचारी की उम्र इस समय 30 साल है और उसकी मंथली बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, और उसकी सैलरी में हर साल 5% की बढ़ोतरी होती है, तो 8.25% ब्याज दर के हिसाब से जब वह 60 साल की उम्र में रिटायर होगा, तो उसके पास करीब 2.6 करोड़ रुपये का एक बड़ा फंड तैयार हो जाएगा।
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS एक स्वैच्छिक और मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें 18 से 70 वर्ष की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक शामिल हो सकता है। यह योजना इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण देती है, जिससे लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। इसके अलावा पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत इसमें अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का लाभ भी मिलता है। एनपीएस के नियमों के तहत निवेशक 60 साल की उम्र तक अपना पेंशन फंड तैयार कर सकता है और रिटायरमेंट के समय कुल जमा राशि का 60% हिस्सा पूरी तरह टैक्स-फ्री निकाला जा सकता है, जबकि बाकी बचे 40% हिस्से से एन्युटी खरीदनी अनिवार्य होती है, जिसकी मदद से निवेशक को जीवनभर हर महीने पेंशन मिलती है।
यदि कोई 30 साल का व्यक्ति 60 साल की उम्र तक हर महीने एनपीएस में 12,500 रुपये का मंथली निवेश करता है और उसे 10% का अनुमानित सालाना रिटर्न मिलता है, तो 30 वर्ष की अवधि में उसका कुल इनवेस्टेड अमाउंट 45 लाख रुपये होगा। रिटायरमेंट पर उसकी कुल तैयार वेल्थ 2,84,91,567 रुपये हो जाएगी, जिसमें से वह 1,70,94,940 रुपये की एकमुश्त रकम टैक्स-फ्री निकाल सकेगा और बाकी बचे 1,13,96,627 रुपये एन्युटी में चले जाएंगे, जिससे उसे हर महीने करीब 56,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी।
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