पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड March 17, 2026, 14:58 IST
सारांश
संसद में राघव चड्ढा ने उदाहरण देकर समझाया कि कैसे वर्तमान टैक्स सिस्टम परिवारों के बजाय केवल व्यक्तियों को देखता है। उन्होंने कहा कि जॉइंट फाइलिंग से कई परिवारों का टैक्स जीरो हो सकता है।

राज्यसभा में सांसद राघव चड्ढा ने शादीशुदा जोड़ों के लिए वैकल्पिक जॉइंट टैक्स फाइलिंग का प्रस्ताव रखा।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 16 मार्च को संसद में टैक्स सिस्टम को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि शादीशुदा जोड़ों को 'जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न' फाइल करने का एक वैकल्पिक ऑप्शन दिया जाना चाहिए। चड्ढा का तर्क है कि वर्तमान टैक्स कानून उन परिवारों के साथ नाइंसाफी करते हैं जहां पति या पत्नी में से कोई एक ही कमाता है या दोनों की कमाई में बड़ा अंतर होता है। उनका कहना है कि इस बदलाव से मध्यम वर्गीय परिवारों को टैक्स में बड़ी राहत मिल सकती है।
राघव चड्ढा ने संसद में दो अलग-अलग परिवारों का उदाहरण देकर अपनी बात समझाई। उन्होंने बताया कि मान लीजिए एक परिवार 'A' है जिसमें पति और पत्नी दोनों 10-10 लाख रुपये कमाते हैं। इस तरह परिवार की कुल कमाई 20 लाख रुपये हुई। नए टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता, इसलिए इस परिवार को जीरो टैक्स देना होगा। वहीं दूसरी तरफ परिवार 'B' है जहां एक सदस्य 20 लाख रुपये कमाता है और दूसरा सदस्य घर और बच्चों को संभालने के लिए घर पर ही रहता है। इस परिवार की कुल कमाई भी 20 लाख रुपये ही है, लेकिन इसे करीब 1.92 लाख रुपये का टैक्स देना पड़ता है। चड्ढा ने सवाल उठाया कि जब घर एक है, किचन एक है और बजट भी एक है, तो टैक्स के मामले में सिस्टम उन्हें अलग-अलग अजनबी की तरह क्यों देखता है?
राघव चड्ढा का कहना है कि अगर जॉइंट फाइलिंग की सुविधा मिलती है, तो परिवार 'B' की कुल 20 लाख रुपये की इनकम को दोनों सदस्यों के बीच बराबर बांटकर देखा जा सकेगा। इससे उनकी व्यक्तिगत इनकम टैक्स छूट की सीमा के अंदर आ जाएगी और उन्हें भी परिवार 'A' की तरह जीरो टैक्स देना होगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि टैक्स के वक्त परिवार की पहचान गायब हो जाती है और सिस्टम केवल दो व्यक्तियों को देखता है। उन्होंने इसे एक ऐसी सजा बताया जो उन परिवारों को मिलती है जहां कोई एक सदस्य घर की जिम्मेदारी संभालता है।
शादीशुदा जोड़ों के लिए जॉइंट टैक्सेशन का यह प्रस्ताव बिल्कुल नया नहीं है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सबसे बड़ी संस्था आईसीएआई (ICAI) पिछले दो सालों से अपने बजट सुझावों में सरकार से इसकी सिफारिश कर रही है। बजट 2026 से पहले भी कई बड़े एक्सपर्ट्स ने सरकार को सलाह दी थी कि भारत में पारिवारिक ढांचे को देखते हुए जॉइंट टैक्स फाइलिंग की सुविधा शुरू करनी चाहिए। अमेरिका और जर्मनी जैसे कई विकसित देशों में पहले से ही जोड़ों को साथ में टैक्स फाइल करने और टैक्स बेनेफिट्स लेने की अनुमति है।
इतनी मांग और चर्चाओं के बावजूद सरकार ने फिलहाल इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। बजट 2026 या फाइनेंस बिल 2026 में जॉइंट टैक्सेशन को लेकर कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में भी अभी तक इस तरह का कोई प्रस्ताव नजर नहीं आ रहा है। हालांकि राघव चड्ढा द्वारा संसद में पुरजोर तरीके से इस मुद्दे को उठाने के बाद अब यह बहस फिर से तेज हो गई है।
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