पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड November 04, 2026, 10:22 IST
सारांश
PFRDA ने MSF स्कीमों के नाम रखने के नियम में बदलाव किया है। इससे पहले 28 अगस्त के सर्कुलर में कहा गया था कि हर स्कीम के नाम में पेंशन फंड का संक्षिप्त नाम, NPS, स्कीम की कैटेगरी का कोड और स्कीम का नाम शामिल होना चाहिए। यानी स्कीम के नाम में A से E तक का कैटेगरी कोड दिखाना जरूरी था।

PFRDA ने पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) प्लेटफॉर्म पर स्कीम दिखाने के नियम भी बदले हैं।
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की स्कीमों के नाम और उन्हें दिखाने के तरीके को लेकर नए बदलाव किए हैं। रेगुलेटर ने 3 नवंबर को एक नया सर्कुलर जारी कर पहले के नियमों में बदलाव किया है। इसका असर खासतौर पर मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत आने वाली स्कीमों और पेंशन फंड की वेबसाइट या ऐप के जरिए NPS में निवेश करने वाले सब्सक्राइबर्स पर पड़ेगा। नए और पुराने सर्कुलर के प्रावधान 1 दिसंबर से लागू होंगे।
PFRDA ने MSF स्कीमों के नाम रखने के नियम में बदलाव किया है। इससे पहले 28 अगस्त के सर्कुलर में कहा गया था कि हर स्कीम के नाम में पेंशन फंड का संक्षिप्त नाम, NPS, स्कीम की कैटेगरी का कोड और स्कीम का नाम शामिल होना चाहिए। यानी स्कीम के नाम में A से E तक का कैटेगरी कोड दिखाना जरूरी था।
अब नए नियम के तहत स्कीम के नाम से कैटेगरी कोड हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि स्कीम का नाम अब पेंशन फंड के संक्षिप्त नाम, NPS और स्कीम के अलग नाम से मिलकर बनेगा। पेंशन फंड अपनी स्कीम का नाम तय कर सकेंगे, लेकिन नाम आसान, अलग पहचान वाला और याद रखने में सरल होना चाहिए।
अगर कोई पेंशन फंड एक ही कैटेगरी में एक से ज्यादा स्कीम चलाता है, तो हर स्कीम का नाम अलग होना जरूरी होगा। वहीं, टियर-2 स्कीम के नाम के आखिर में 'Tier II' लिखना होगा। टियर-1 डिफॉल्ट स्कीम है, इसलिए उसके नाम में अलग से Tier I लिखने की जरूरत नहीं होगी।
स्कीम के नाम से कैटेगरी कोड हटाने का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों को उसके जोखिम या इक्विटी में निवेश की जानकारी नहीं मिलेगी। NPS में अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार निवेश का स्वरूप और इक्विटी एक्सपोजर अलग-अलग होता है।
नए नियम के मुताबिक पेंशन फंड को विज्ञापन, वेबसाइट, पब्लिक डॉक्यूमेंट और दूसरी प्रचार सामग्री में स्कीम के नाम के साथ उसकी कैटेगरी या ग्रोथ कैटेगरी की जानकारी भी देनी होगी। यह जानकारी स्कीम के नाम के नीचे या उसके साथ छोटे फॉन्ट में दिखाई जाएगी। इसके अलावा NPS Scheme Essentials Document और स्कीम ब्रोशर में भी कैटेगरी का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
PFRDA ने पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) प्लेटफॉर्म पर स्कीम दिखाने के नियम भी बदले हैं। PoP वे संस्थाएं हैं जिनके जरिए लोग NPS से जुड़ते हैं और निवेश संबंधी सेवाएं लेते हैं। पहले PoP अपने प्लेटफॉर्म पर उससे जुड़े पेंशन फंड की स्कीमें दिखा सकते थे। अब किसी भी PoP को अपने प्लेटफॉर्म पर सब्सक्राइबर की चुनी हुई कैटेगरी के सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखानी होंगी। हालांकि, PoP किसी खास पेंशन फंड की स्कीम को सबसे ऊपर दिखा सकता है या किसी स्कीम को पहले से चुनकर रख सकता है। लेकिन उसे बाकी पेंशन फंड की स्कीमें भी दिखानी होंगी।
इस नियम में एक अपवाद भी है। अगर कोई पेंशन फंड खुद PoP का लाइसेंस रखता है, तो उसकी वेबसाइट या ऐप पर सिर्फ उसकी अपनी स्कीमें दिखाई जा सकती हैं। हालांकि, इसके लिए सब्सक्राइबर को खुद उस पेंशन फंड की वेबसाइट या ऐप पर जाना होगा और निवेश की प्रक्रिया भी उसी पेंशन फंड के जरिए पूरी होनी चाहिए।
PFRDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि NPS Central और सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) के प्लेटफॉर्म पर भी चुनी गई कैटेगरी के सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखानी होंगी। वहीं, Star NPS प्लेटफॉर्म पर पेंशन फंड अपने नियुक्त पेंशन एजेंटों को अपनी स्कीमें दिखा सकते हैं।
सबसे अहम बात यह है कि किसी भी प्लेटफॉर्म पर स्कीमें दिखाने से पहले सब्सक्राइबर से उसकी पसंद पूछनी होगी। इसमें स्कीम का प्रकार, कैटेगरी या जोखिम लेने की क्षमता शामिल हो सकती है। इसके बाद उसी पसंद के मुताबिक स्कीमें दिखाई जाएंगी। यानी निवेशक की पसंद के आधार पर स्कीमों की जानकारी सामने आएगी, जिससे अलग-अलग पेंशन फंड की स्कीमों की तुलना करना आसान हो सकता है।
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