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  1. 10 दिन में तीसरी बार बढ़ा पेट्रोल-डीजल का दाम, सालभर में कितना जेब पर बोझ झेलेगा आम इंसान?

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10 दिन में तीसरी बार बढ़ा पेट्रोल-डीजल का दाम, सालभर में कितना जेब पर बोझ झेलेगा आम इंसान?

Upstox

3 min read | अपडेटेड May 23, 2026, 12:07 IST

सारांश

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक लागत भी बढ़ती है और इन दोनों की लागत बढ़ने से ही लगभग हर चीज के दाम बढ़ने लगते हैं। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर नजर आने लगता है।

पेट्रोल-डीजल

10 दिन में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल और डीजल के दाम पिछले 10 दिनों में तीसरी बार बढ़ाए गए हैं। पश्चिम एशिया संकट से भारत भी अछूता नहीं है और अब इसका असर व्यापक रूप से नजर भी आने लगा है। शनिवार यानी कि आज एक लीटर पेट्रोल की कीमत में .87 रुपये की जबकि एक लीटर डीजल में .91 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अभी तक पिछले 10 दिनों में अगर नजर डालें तो पेट्रोल और डीजल के दाम करीब-करीब 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। आज की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये से 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये हो गई है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि पांच रुपये प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से सालाना आपकी पॉकेट पर कितना असर पड़ सकता है।

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10 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम

पेट्रोल, डीजल के दाम में 15 मई के बाद से यह तीसरी बढ़ोतरी है। सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा कीमतों का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। 15 मई को कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। उसके बाद 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम 90 पैसे लीटर बढ़ाए गए थे। कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

5 रुपये प्रति लीटर पेट्रोड-डीजल बढ़ने से क्या पड़ेगा आप पर असर?

रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए, यह खर्च उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ता है। अगर आप महीने में लगभग 40 लीटर पेट्रोल खर्च करते हैं, जो कि कई शहरी परिवारों के लिए आम बात है, तो प्रति लीटर 5 रुपये की बढ़ोतरी से आपके मंथली फ्यूल खर्च में लगभग 200 रुपये का इजाफा हो जाता है। एक साल में यह रकम लगभग 2,400 रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि, इसका असर सिर्फ फ्यूल बिल तक ही सीमित नहीं है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक लागत भी बढ़ती है और इन दोनों की लागत बढ़ने से ही लगभग हर चीज के दाम बढ़ने लगते हैं। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर नजर आने लगता है।

जिससे किराने का सामान, कैब, फ़ूड डिलीवरी और अन्य जरूरी चीजें महंगी हो जाती हैं। सैलरी कमाने वाले घरों में पहले से ही ईएमआई और स्कूल फीस, अगर अपना घर नहीं है तो रेंट का खर्चा, बिजली का बिल, पानी का बिल का खर्चा बचत के लिए स्कोप कम छोड़ता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें उनके लिए बचत के और रास्ते कम कर सकती हैं और खर्च का बोझ उनपर ज्यादा पड़ सकता है।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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