पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 01, 2025, 17:20 IST
सारांश
साल 2024 में बाजार में कई तरह के बदलाव देखे गए। सरकार और रेग्युलेटर्स कई नए नियम लेकर आए तो निवेशकों का रुख भी अलग रहा। यहां नजर डालते हैं 2024 के ऐसे ट्रेंड्स पर जो 2025 में भी काम आएंगे।
2024 में निवेशकों ने म्यूचुअल फंड्स SIP को चुना
नया साल शुरू हो चुका है और भविष्य के लिए वित्तीय संसाधनों को कैसे मैनेज करना है, ये समझने के लिए बीते साल के ट्रेंड्स काम आ सकते हैं। साल 2024 में जहां ज्यादा लोगों ने सिस्टेमिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया, वहीं डीमटीरियलाइज्ड (डीमैट) अकाउंट्स में भी 22% इजाफा देखा गया।
इस साल कई रेग्युलेटरी बदलाव भी किए गए। साथ ही कई नए फाइनेंशियल प्रॉडक्ट लॉन्च किए गए। एक नजर डालते हैं 2024 के अहम ट्रेंड्स पर जो 2025 में भी काम के साबित हो सकते हैं-
ज्यादातर निवेशकों ने इस साल SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में भरोसा दिखाया। असोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के डेटा के मुताबिक जनवरी, 2024 से नवंबर, 2024 के बीच SIP में योगदान 34% बढ़ गया। नवंबर में SIP अकाउंट्स 10.22 करोड़ पार कर गए और म्यूचुअल फंड्स के कुल ऐसेट्स में से 20% SIP में थे। दिलचस्प बात यह है कि बाजार चाहें ऊपर हो या नीचे, SIP की आवक में हर महीने बढ़त ही देखी गई।
सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ऐसेट्स का एक नया क्लास भी लेकर आया है। ये स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) ऐसे निवेशकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो कम से कम ₹10 लाख का निवेश करना चाहते हैं और जोखिम उठाने को भी तैयार हैं।
SIF के जरिए म्यूचुअल फंड्स निवेश की अडवांस्ड रणनीतियां शुरू कर सकेंगे जिससे भारत में निवेश की तस्वीर बदलेगी। इसके जरिए म्यूचुअल फंड्स और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के बीच की खाई भी कम की जा सकेगी।
इसके अलावा SEBI ने नई पैसिव स्कीम्स लॉन्च करने के लिए नियमों में भी ढील दी है और इसके लिए MF Lite फ्रेमवर्क लाया गया है।
इस साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए टैक्स नियमों का भी ऐलान किया। इनके आधार पर भविष्य में टैक्स और निवेश को मैनेज करने के तरीके पर असर पड़ेगा। इक्विटी शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और REITs/ InVITS से होने वाले छोटे समय के कैपिटल फायदे पर टैक्स 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया। स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स से लंबे समय के कैपिटल फायदे पर भी टैक्स 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया।
इस साल राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था (National Pension System, NPS) के तहत एक नई स्कीम लॉन्च की गई- NPS वात्सल्य। इसके तहत कम उम्र से ही रिटायरमेंट सेविंग्स का मौका दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इसके अंदर पेरंट्स ही अपने नाबालिग बच्चों के नाम पर अकाउंट खोलकर उनके 18 साल का होने तक बचत कर सकते हैं। इसके बाद बच्चे खुद अपने रिटायरमेंट तक अकाउंट में डिपॉजिट करते रह सकते हैं।
दूसरी ओर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organisation,EPFO) ने भी अपने सदस्यों को एटीएम के जरिए पैसे निकालने की सुविधा देने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए खास डेबिट कार्ड्स जारी किए जाएंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा के मुताबिक इस साल अक्टूबर तक क्रेडिट कार्ड के जरिए ₹2 lakh crore तक खर्च किए जा चुके थे। सिर्फ खर्च ही नहीं क्रेडिट कार्ड का बकाया बिल भी इस साल रेकॉर्ड पर रहा। RBI के मुताबिक अक्टूबर तक क्रेडिट कार्ड का बकाया FY25 में 9.5% से बढ़ गया।
RBI ने इस साल रेपो रेट नहीं बदले। इसके चलते बैंक और वित्तीय संस्थान फिक्स्ड डिपॉजिट पर जो ब्याज देते हैं, वह बढ़ा ही रहा। सरकार ने भी छोटी बचत योजनाओं, जैसे सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और 3 साल का पोस्ट ऑफिस टाइम, डिपॉजिट की ब्याज दरें भी बढ़ाईं। हालांकि, दूसरी योजनाओं के ब्याज में कोई बदलाव नहीं किया।
RBI ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के फिक्स्ड डिपॉजिट्स को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 1 जनवरी, 2025 से डिपॉजिटर्स ₹10,000 तक की पूरी राशि डिपॉजिट करने के तीन महीने के अंदर तक निकाल सकते हैं।
बड़े अमाउंट समय से पहले निकालने पर प्रिंसिपल का 50% या ₹5 लाख की सीमा तय की गई है, जो भी कम हो। इनपर कोई इंटरेस्ट नहीं मिलेगा। NBFCs को डिपॉजिटर्स को FD की मच्योरिटी के बारे में कम से कम 14 दिन पहले सूचित करन होगा। यह सीमा पहले दो महीने की थी।
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