पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड March 13, 2026, 14:41 IST
सारांश
31 मार्च की टैक्स डेडलाइन पास आ रही है। एनपीएस (NPS) अब सिर्फ रिटायरमेंट प्लान नहीं, बल्कि एक्स्ट्रा टैक्स बचाने का शानदार जरिया बन गया है। धारा 80सी की 1.5 लाख की लिमिट के अलावा आप 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट पा सकते हैं।

टैक्स सेविंग का बेस्ट तरीका
जैसे-जैसे 31 मार्च की तारीख नजदीक आ रही है, लोग टैक्स बचाने के तरीके खोजने में लग गए हैं। इस समय नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एनपीएस आपको इनकम टैक्स की धारा 80सी के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की मानक छूट के ऊपर भी अतिरिक्त टैक्स बचाने का मौका देता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्कीम अब न केवल टैक्स बचाने का जरिया है, बल्कि लंबे समय के लिए रिटायरमेंट की प्लानिंग करने का एक बेहतरीन विकल्प भी बन चुकी है। खासतौर पर सैलरी पाने वाले लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद साबित हो रही है।
अक्सर लोग अपनी टैक्स प्लानिंग को धारा 80सी की 1.5 लाख रुपये की लिमिट तक ही सीमित रखते हैं। लेकिन एनपीएस में निवेश करने वालों को धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत एक विशेष छूट मिलती है। इस नियम के मुताबिक, आप अपने टियर-1 अकाउंट में निवेश करके 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर आपने पहले ही 80सी की लिमिट को पूरा कर लिया है, तब भी आप इस 50,000 रुपये पर टैक्स बचा सकते हैं। जो लोग 30 पर्सेंट के टैक्स स्लैब में आते हैं, वे हर साल करीब 15,000 रुपये बचा सकते हैं। वहीं 20 पर्सेंट वाले लोग करीब 10,000 रुपये की बचत कर सकते हैं। यह बेनिफिट पुराने टैक्स सिस्टम में सबसे ज्यादा असरदार होता है।
एनपीएस का एक और कमाल का फायदा है जो अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, वह है धारा 80सीसीडी (2) के तहत मिलने वाली छूट। इस प्रावधान के तहत आपकी कंपनी आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 14 पर्सेंट तक हिस्सा एनपीएस में जमा कर सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरा पैसा आपकी टैक्सेबल इनकम से घटा दिया जाता है और इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। यह बेनिफिट पुराने और नए दोनों टैक्स सिस्टम में मिलता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि कर्मचारी अपने एचआर विभाग से बात करके अपने सीटीसी का कुछ हिस्सा एनपीएस में ट्रांसफर करवा सकते हैं जिससे बिना कंपनी का खर्चा बढ़ाए उनकी टैक्स देनदारी काफी कम हो जाती है।
हाल ही में किए गए सुधारों ने एनपीएस को पहले से कहीं ज्यादा लचीला बना दिया है। अब रिटायरमेंट के समय निवेशक अपने कुल फंड का 80 पर्सेंट हिस्सा एक साथ निकाल सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा सिर्फ 60 पर्सेंट थी। हालांकि, कम से कम 20 पर्सेंट पैसे से एन्युटी यानी पेंशन स्कीम खरीदना अब भी अनिवार्य है। इसके अलावा एक और बड़ा अपडेट यह है कि अब निवेशक अपने एनपीएस अकाउंट को लोन लेने के लिए गारंटी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप अपने खुद के योगदान का 25 पर्सेंट हिस्सा लोन के लिए गिरवी रख सकते हैं जिससे समय से पहले पैसा निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन फीचर्स की वजह से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में इसकी मांग बढ़ी है।
टैक्स बचाने के अलावा एनपीएस को रिटायरमेंट के लिए एक अनुशासित निवेश साधन माना जाता है। इसमें पैसा 60 साल की उम्र तक लॉक रहता है जिससे एक बड़ा फंड जमा करने में मदद मिलती है। इस स्कीम में इक्विटी और सरकारी बॉन्ड्स दोनों का फायदा मिलता है जिससे आपके पैसे पर अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना बनी रहती है। हालांकि, म्युचुअल फंड की तुलना में इसमें लिक्विडिटी यानी पैसे निकालने की आजादी थोड़ी कम है। मैच्योरिटी पर 60 पर्सेंट पैसा टैक्स फ्री होता है, लेकिन बाकी के 40 पर्सेंट से मिलने वाली पेंशन पर इनकम टैक्स देना पड़ता है। 31 मार्च की डेडलाइन को देखते हुए अगर आप इस साल एक्स्ट्रा टैक्स बचाना चाहते हैं, तो समय रहते निवेश करना जरूरी है।
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