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Normal FD Vs Corporate FD: किसमें है ज्यादा दम? रिटर्न और सुरक्षा के तराजू पर तौलें अपना फैसला

Upstox

3 min read | अपडेटेड December 02, 2025, 16:03 IST

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सारांश

Normal FD Vs Corporate FD: निवेश के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी आज भी भारतीयों की पहली पसंद है। लेकिन एफडी दो तरह की होती हैं, एक बैंक वाली और दूसरी कंपनी वाली। कॉर्पोरेट एफडी में ब्याज दर ज्यादा मिलती है, लेकिन इसमें जोखिम भी होता है। वहीं बैंक एफडी सुरक्षित मानी जाती है।

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For senior citizens who depend on fixed deposit interest after retirement, getting the highest return is very important. | Image: Shutterstock

Normal FD Vs Corporate FD: भारत में जब भी सुरक्षित निवेश की बात होती है, तो सबसे पहला नाम फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी का ही आता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में निवेशकों के सामने एक नया विकल्प तेजी से उभरा है, जिसे 'कॉर्पोरेट एफडी' या कंपनी एफडी कहते हैं। अक्सर लोग ज्यादा ब्याज देखकर इसमें पैसा तो लगा देते हैं, लेकिन उन्हें इसके पीछे के गणित और जोखिम का अंदाजा नहीं होता। अगर आप भी अपनी मेहनत की कमाई को एफडी में डालने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि नॉर्मल बैंक एफडी और कॉर्पोरेट एफडी में से कौन सा विकल्प आपके लिए बेस्ट साबित होगा। आइए आसान भाषा में दोनों का अंतर समझते हैं।

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क्या है बुनियादी अंतर?

सबसे पहले यह समझना होगा कि ये दोनों काम कैसे करते हैं। जब आप बैंक में एफडी करवाते हैं, तो आप अपना पैसा बैंक को उधार दे रहे होते हैं, जो कि आरबीआई (RBI) के सख्त नियमों के तहत काम करता है। वहीं, जब आप कॉर्पोरेट एफडी में पैसा लगाते हैं, तो आप अपना पैसा किसी प्राइवेट कंपनी या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) को एक तय समय के लिए उधार देते हैं। कंपनियां अपने कारोबार को बढाने के लिए आम जनता से पैसा जुटाती हैं और बदले में उन्हें ब्याज देती हैं।

कौन दे रहा ज्यादा मुनाफा?

रिटर्न यानी ब्याज दर के मामले में कॉर्पोरेट एफडी हमेशा बैंक एफडी से आगे रहती है। आमतौर पर अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों की एफडी पर बैंक के मुकाबले 1 से 2 फीसदी या कई बार इससे भी ज्यादा ब्याज मिलता है। सीनियर सिटीजन्स के लिए तो यह अंतर और भी आकर्षक हो जाता है। कंपनियां ज्यादा ब्याज इसलिए देती हैं क्योंकि उन्हें बैंक से लोन लेने पर भी भारी ब्याज चुकाना पड़ता है, इसलिए वे आम जनता से थोड़ा ज्यादा ब्याज देकर पैसा जुटाना पसंद करती हैं। अगर आप सिर्फ रिटर्न देख रहे हैं, तो कॉर्पोरेट एफडी बाजी मार ले जाती है।

कहां है पैसा सेफ?

यहीं पर असली पेंच है। बैंक एफडी को सबसे सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर सरकारी बीमा मिलता है। अगर बैंक डूब भी जाए, तो आपका 5 लाख रुपये तक का मूलधन और ब्याज सुरक्षित रहता है। लेकिन कॉर्पोरेट एफडी पूरी तरह से असुरक्षित (Unsecured) होती है। इसमें ऐसी कोई सरकारी गारंटी नहीं मिलती। अगर कंपनी दिवालिया हो गई या भाग गई, तो आपका पूरा पैसा डूब सकता है। इसलिए कॉर्पोरेट एफडी में निवेश करने से पहले उस कंपनी की 'क्रेडिट रेटिंग' (जैसे AAA, AA) देखना बहुत जरूरी होता है। जितनी अच्छी रेटिंग, पैसा उतना ही सुरक्षित।

पैसे की जरूरत पड़ने पर उसे निकालने की सुविधा यानी लिक्विडिटी के मामले में बैंक एफडी ज्यादा बेहतर होती है। बैंक एफडी को आप कभी भी तोड़ सकते हैं, बस थोड़ा जुर्माना लगता है। लेकिन कॉर्पोरेट एफडी में आमतौर पर तीन महीने का लॉक-इन पीरियड होता है, उससे पहले आप पैसा नहीं निकाल सकते। इसके बाद भी अगर आप समय से पहले पैसा निकालते हैं, तो पेनल्टी के नियम काफी सख्त होते हैं और कई बार ब्याज का बड़ा हिस्सा काट लिया जाता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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