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3 min read | अपडेटेड February 19, 2026, 18:47 IST
सारांश
ड्राफ्ट Income Tax Rules 2026 के रूल 159 के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के एक या एक से ज्यादा खातों में पूरे वित्तीय वर्ष में कुल कैश जमा ₹10 लाख या उससे ज्यादा होती है, तभी PAN देना अनिवार्य होगा। यानी सालभर में ₹10 लाख से कम कैश जमा पर PAN की जरूरत नहीं पड़ेगी।

Cash Deposit: नए प्रस्तावित नियमों से रोजमर्रा के छोटे और मध्यम लेन-देन में प्रोसीजरल झंझट कम होगी।
आम करदाताओं को राहत देने के मकसद से Income Tax Department ने कैश जमा और निकासी से जुड़े नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अब एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख तक की कुल कैश जमा या निकासी पर PAN बताना जरूरी नहीं होगा। इससे रोजमर्रा की बैंकिंग में लोगों को काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल नियम यह है कि अगर कोई व्यक्ति एक दिन में ₹50,000 से ज्यादा कैश जमा करता है, तो उसे PAN देना पड़ता है। कई लोगों के लिए यह नियम काफी झंझट भरा था। लेकिन ड्राफ्ट नियम इस सोच में बदलाव का संकेत देते हैं, जिसमें अब रोजाना की बजाय पूरे साल की कुल रकम को आधार बनाया गया है।
ड्राफ्ट Income Tax Rules 2026 के रूल 159 के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के एक या एक से ज्यादा खातों में पूरे वित्तीय वर्ष में कुल कैश जमा ₹10 लाख या उससे ज्यादा होती है, तभी PAN देना अनिवार्य होगा। यानी सालभर में ₹10 लाख से कम कैश जमा पर PAN की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कैश निकासी के लिए भी यही सीमा लागू होगी। बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस से अगर पूरे साल में कुल निकासी ₹10 लाख या उससे ज्यादा होती है, तभी PAN देना जरूरी होगा। इससे छोटे और नियमित लेन-देन करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
अगर आपकी सालाना कैश जमा या निकासी ₹10 लाख के भीतर रहती है, तो बैंक आपसे PAN की डिटेल नहीं मांग सकते। इससे कागजी काम कम होगा और ईमानदार कारणों से कैश इस्तेमाल करने वालों के लिए बैंकिंग आसान होगी। हालांकि, ₹10 लाख की सीमा पार करते ही PAN जरूरी रहेगा और बड़े लेन-देन पर टैक्स विभाग की नजर बनी रहेगी।
Abhishek Soni, CEO और Co-founder, Tax2win का कहना है कि यह बदलाव प्रक्रिया को आसान बनाता है, लेकिन हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर टैक्स निगरानी खत्म नहीं करता। सीमा पार होते ही PAN देना और निगरानी दोनों जारी रहेंगी।
वहीं, Aditya Bhattacharya, पार्टनर, King Stubb & Kasiva का कहना है कि पहले कम सीमा होने की वजह से आम लोगों और छोटे कारोबारियों को भी बार-बार PAN देना पड़ता था, जिससे बेवजह रिपोर्टिंग और कागजी बोझ बढ़ता था। नए नियमों का मकसद अब बड़े और अहम लेन-देन पर फोकस करना है।
करदाताओं के नजरिए से देखें तो इसका तात्कालिक फायदा यह होगा कि रोजमर्रा के छोटे और मध्यम लेन-देन में प्रोसीजरल झंझट कम होगी। खासतौर पर छोटे कारोबारी और कैश में काम करने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि करदाताओं को सतर्क रहना चाहिए। नए नियम TDS, TCS या अन्य रिपोर्टिंग नियमों से छूट नहीं देते। साथ ही यह भी जरूरी है कि PAN वैध रहे और आधार से लिंक हो, क्योंकि इसमें लापरवाही आगे चलकर टैक्स से जुड़ी समस्याएं खड़ी कर सकती है।
ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो आम करदाताओं को कैश लेन-देन में पहले से ज्यादा लचीलापन और सुविधा मिलेगी।
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