पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड October 30, 2026, 10:06 IST
सारांश
सरकारी पेंशन पाने वाले लोगों को अपनी पेंशन बिना रुकावट जारी रखने के लिए हर साल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होता है। इसके लिए 30 नवंबर 2026 आखिरी तारीख तय की गई है।

जीएसटी से जुड़े कुछ नियमों में भी 1 नवंबर से बदलाव होने जा रहा है।
नवंबर का महीना शुरू होने वाला है। हर महीने की तरह इस बार भी 1 नवंबर 2026 से पैसों और फाइनेंस से जुड़े कुछ अहम नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। इनका सीधा असर पेंशन पाने वाले लोगों, इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले टैक्सपेयर्स और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों पर पड़ सकता है। इसके अलावा जीएसटी नियमों में बदलाव, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और बैंक एफडी की ब्याज दरों पर भी लोगों की नजर रहेगी। ऐसे में आइए जानते हैं नवंबर में होने वाले इन 6 अहम बदलावों के बारे में।
सरकारी पेंशन पाने वाले लोगों को अपनी पेंशन बिना रुकावट जारी रखने के लिए हर साल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होता है। इसके लिए 30 नवंबर 2026 आखिरी तारीख तय की गई है। 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के पेंशनर्स 1 अक्टूबर से ही लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं, जबकि बाकी पेंशनर्स के लिए यह सुविधा 1 नवंबर से शुरू हो रही है।
पेंशनर्स बैंक की ब्रांच में जाकर यह प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसके अलावा आधार ऑथेंटिकेशन की मदद से ऑनलाइन जीवन प्रमाण पोर्टल के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट भी जमा किया जा सकता है। डाक विभाग की डोरस्टेप सर्विस के जरिए भी यह काम किया जा सकता है। तय समय पर सर्टिफिकेट जमा नहीं करने पर पेंशन मिलने में देरी या अस्थायी रुकावट आ सकती है।
इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले कुछ टैक्सपेयर्स को राहत मिली है। जिन कारोबारियों, प्रोफेशनल्स और कंपनियों के खातों का ऑडिट जरूरी है, उनके लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 का ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी गई है।
हालांकि, यह राहत सभी टैक्सपेयर्स के लिए नहीं है। ITR-1 और ITR-2 भरने वाले व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स की सामान्य डेडलाइन पहले ही खत्म हो चुकी है। पात्र टैक्सपेयर्स नियमों और लेट फीस के अधीन 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न भी दाखिल कर सकते हैं।
जीएसटी से जुड़े कुछ नियमों में भी 1 नवंबर से बदलाव होने जा रहा है। 26 अक्टूबर को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये बदलाव बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट और कुछ कारोबारियों को मिलने वाले प्रोविजनल रिफंड से जुड़े हैं। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से प्रभावित कारोबारियों को रिफंड जल्दी मिल सकेगा। इन बदलावों का मकसद कारोबारियों के लिए जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया आसान बनाना है। इन उपायों की घोषणा बजट 2026-27 में की गई थी।
हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में 1 नवंबर को भी कमर्शियल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव पर नजर रहेगी। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव का असर होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे कारोबारों पर पड़ सकता है। हालांकि, 29 अक्टूबर तक नवंबर के लिए कीमतों में बदलाव की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।
म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी नवंबर से अहम बदलाव होने जा रहा है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे के मुताबिक, 1 नवंबर से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान डिफॉल्ट विकल्प होगा। डायरेक्ट प्लान में निवेश करने पर डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं देना पड़ता, इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर रेगुलर प्लान से कम होता है। वहीं, रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर की सेवाएं शामिल होती हैं और इसका खर्च ज्यादा हो सकता है। अगर निवेशक रेगुलर प्लान चुनते हैं, तो उन्हें इसके ज्यादा एक्सपेंस रेशियो की जानकारी देनी होगी।
नवंबर में बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी की ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि सभी बैंक अपनी दरें बदलें। एफडी में निवेश करने या पुरानी एफडी रिन्यू कराने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें। इसके साथ ही निवेश की अवधि, मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम और समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाली पेनल्टी की जानकारी भी जरूर लें।
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