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4 min read | अपडेटेड April 27, 2026, 16:12 IST
सारांश
इनकम टैक्स विभाग ने फॉर्म 13 की जगह अब नया फॉर्म 128 पेश किया है। इसके जरिए टैक्सपेयर्स कम या जीरो रेट पर टीडीएस कटवाने के लिए सर्टिफिकेट ले सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत काम का है जिनकी असल टैक्स देनदारी कम है लेकिन टीडीएस ज्यादा कट रहा है। यह पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है।

फॉर्म 128 के जरिए अब कम रेट पर टीडीएस कटवाना हुआ और भी आसान।
इनकम टैक्स विभाग ने अपने नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 में बदलाव के साथ ही पुराने फॉर्म 13 को अब खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह नया फॉर्म 128 लाया गया है। यह बदलाव सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को ज्यादा स्टैंडर्ड और डिजिटल बनाया जा रहा है। फॉर्म 128 मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो चाहते हैं कि उनकी कमाई पर टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) की कटौती कम रेट पर हो या फिर बिल्कुल न हो। यह उन स्थितियों में बहुत काम आता है जब किसी निवेशक या बिजनेस की असल टैक्स देनदारी सरकार द्वारा तय किए गए स्टैंडर्ड रेट से कम होने की उम्मीद होती है।
नए कानून के सेक्शन 395(1) और 395(3) के तहत यह फॉर्म टैक्सपेयर्स को राहत देता है। अक्सर ऐसा होता है कि बैंकों या अन्य जगहों से मिलने वाली इनकम पर एक तय पर्सेंट के हिसाब से टीडीएस काट लिया जाता है। लेकिन अगर आपकी कुल सालाना आय इतनी नहीं है कि उस पर उतना टैक्स बने, तो आपका पैसा बेवजह फंसा रहता है। इस पैसे को फंसने से बचाने के लिए आप फॉर्म 128 भरकर एक सर्टिफिकेट की मांग कर सकते हैं। एक बार यह सर्टिफिकेट मिल जाने पर, आपकी पेमेंट करने वाली संस्था आपका टीडीएस कम रेट पर काटेगी या फिर नहीं काटेगी। यह सुविधा रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट दोनों तरह के टैक्सपेयर्स के लिए उपलब्ध है।
इस फॉर्म को भरने के लिए समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। नियम यह है कि आपको यह एप्लिकेशन ट्रांजैक्शन होने या इनकम मिलने से पहले देनी होगी। अगर एक बार टीडीएस या टीसीएस कट गया, तो फिर इस फॉर्म के जरिए उसे वापस नहीं पाया जा सकता, उसके लिए आपको इनकम टैक्स रिटर्न का ही इंतजार करना होगा। इसलिए विभाग सलाह देता है कि देरी से बचने के लिए इसे काफी पहले ही फाइल कर देना चाहिए। सबसे अच्छी बात यह है कि एक साल में आप कितनी भी बार फॉर्म 128 फाइल कर सकते हैं। अगर साल के बीच में आपकी इनकम का अनुमान बदल जाता है, तो आप नई एप्लिकेशन भी दे सकते हैं। इसके लिए आपके पास एक वैलिड पैन कार्ड होना अनिवार्य है।
अगर कोई टैक्सपेयर ऐसा काम कर रहा है जहां उसे बहुत सारे लोगों (100 से ज्यादा) से पेमेंट मिलनी है और उसके पास एप्लिकेशन के समय उन सबकी डीटेल नहीं है, तो उसके लिए भी एक खास रास्ता दिया गया है। ऐसे मामलों में टैक्सपेयर एनेक्सचर-II का इस्तेमाल कर सकता है। इसमें पहले टैक्सपेयर के नाम पर एक 'मेन सर्टिफिकेट' जारी किया जाता है। इसके बाद, टैक्सपेयर जरूरत के हिसाब से अलग-अलग पेयर्स के लिए 'चाइल्ड सर्टिफिकेट' जनरेट कर सकता है। यह चाइल्ड सर्टिफिकेट हर पेयर को यह बताता है कि उसे किस रेट पर टैक्स काटना है। इससे बड़े बिजनेस और प्रोफेशनल लोगों को काफी आसानी हो जाती है।
एप्लिकेशन के साथ आपको अपनी इस साल की अनुमानित आय का पूरा कैलकुलेशन देना होगा। इसके अलावा आपकी संभावित टैक्स देनदारी कितनी बनेगी, इसकी जानकारी भी देनी होगी। अगर आपने पिछले सालों के रिटर्न फाइल नहीं किए हैं, तो उन सालों की इनकम की डीटेल भी मांगी जा सकती है। अगर आपकी कोई इनकम टैक्स फ्री है, तो उसके बारे में भी बताना होगा। एक बार जब आप एप्लिकेशन सबमिट कर देते हैं, तो आपको एक एक्नॉलेजमेंट रसीद नंबर (ARN) मिलता है। इस नंबर के जरिए आप कभी भी चेक कर सकते हैं कि आपकी एप्लिकेशन पर क्या कार्रवाई हुई है। अगर आप चाहें तो प्रोसेस पूरा होने से पहले अपनी एप्लिकेशन को वापस भी ले सकते हैं।
सबसे पहले आपको इनकम टैक्स के ट्रेसेस (TRACES) पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।
इसके बाद मेनू में जाकर फॉर्म नंबर 128 वाले सेक्शन को चुनना होगा।
अब आपको अपनी अनुमानित आय और टैक्स लायबिलिटी से जुड़ी सभी जानकारियां सावधानी से भरनी होंगी।
फॉर्म भरने के बाद मांगे गए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स को पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
अंत में अपनी एप्लिकेशन को ई-वेरिफाई करना होगा और फिर उसे फाइनल सबमिट कर देना होगा।
ध्यान रहे कि इसे केवल ऑनलाइन ही भरा जा सकता है, ऑफलाइन आवेदन की कोई सुविधा नहीं है।
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