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  1. म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर ऐसे करें कमाई, यहां पढ़ें जरूरी टिप्स

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म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर ऐसे करें कमाई, यहां पढ़ें जरूरी टिप्स

Upstox

5 min read | अपडेटेड October 26, 2024, 00:12 IST

सारांश

म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने के सबसे अपने अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन जो एक उद्देश्य सबका कॉमन होता है, वह है पैसा कमाना। यहां इस आर्टिकल में हम आपको समझाने की कोशिश करेंगे कि कैसे आप अपने म्यूचुअल फंड से इनकम जनरेट कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में आपने नया-नया इन्वेस्ट करना शुरू किया हो या फिर लंबे समय से इन्वेस्ट करते हों, आपके लिए ये टिप्स काम आ सकते हैं।

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म्यूचुअल फंड से कमाई करने के तरीके

म्यूचुअल फंड में लोग अलग-अलग कारणों से इन्वेस्ट करते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो शेयर मार्केट में इन्वेस्ट को अपना फुल-टाइम प्रोफेशन बना लेते हैं। ऐसे में लोग हर दिन ट्रेड करते हैं, खासकर म्यूचुअल फंड में, जिससे उनका पोर्टफोलियो डावर्सिफाइड हो। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो म्यूचुअल फंड में इसलिए इन्वेस्ट करते हैं, क्योंकि वे अपना पैसा बढ़ाना चाहते हैं और साथ ही अन्य रिटर्न का भी फायदा उठाना चाहते हैं। जहां कुछ लोग म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल सिर्फ अपनी कमाई बढ़ाने के लिए करते हैं, वहीं कुछ लोग इसकी मदद से घर भी बनाते हैं या कार भी खरीदते हैं। बच्चे की पढ़ाई हो या फिर हॉलीडे के लिए पैसे जोड़ने की बात हो, इन सबके लिए आप म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। आपका टारगेट कुछ भी हो, इन्वेस्टमेंट का प्रोसेस और इसके लिए की जाने वाली कोशिशें एकजैसी ही रहती हैं। ज्यादातर लोग म्यूचुअल फंड के फायदों के बारे में जानते हैं, लेकिन उनमें पैसा लगाने से पहले उनके जोखिमों और नुकसानों के बारे में जानना जरूरी है।

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म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने के बेस्ट तरीके

जब भी आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने जाएं, इन बातों का जरूर ध्यान रखें-

1- डाइवर्सिफिकेशनः म्यूचुअल फंड बॉन्ड, स्टॉक और/या बाकी सिक्योरिटीज़ के अलग-अलग पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट करते हैं और कई इन्वेस्टर्स का पैसा इकट्ठा करते हैं। इस तरह के डाइवर्सिफिकेशन से रिस्क कम होता है। डाइवर्सिफिकेश से आपका पोर्टफोलियो मजबूत होता है और इसका फायदा आपको अपनी इन्वेस्टमेंट में नजर आने लगता है।

2- प्रोफेशनल मैनेजमेंटः आपके फंड्स को प्रोफेशनल मैनेजर्स हैंडल करते हैं, आपकी इन्वेस्टमेंट को लेकर ये जो फैसले लेते हैं, वह रिसर्च और एनालिसिस के आधार पर होता है। ऐसे में अगर आपको एक्सपीरियंस कम है या फिर आपको इतना समय नहीं मिल पाता है, तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित होता है। इससे इन्वेस्टमेंट मॉनिटर करना भी आसान हो जाता है।

3- लिक्लिडिटीः म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स को मौजूदा नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के हिसाब से किसी भी मार्केट खुले रहने वाले दिन पर अपने शेयर खरीदने या बेचने में सक्षम बनाते हैं और इससे आपको लिक्विडिटी का फायदा मिलता है। ऐसे में अगर आप जरूरत में हैं, तो आप आसानी से अपने इन्वेस्ट किए गए पैसों को अपने अकाउंट में वापस हासिल कर सकते हैं।

4- रिस्क और रिटर्नः म्यूचुअल फंड में रिस्क और संभावित रिटर्न अलग-अलग होते हैं। जब आप रिस्क ज्यादा लेते हैं, तो ऐसे में ज्यादा रिटर्न की संभावना बन जाती है, हालांकि यहां यह समझना भी जरूरी है कि ऐसे में नुकसान की आशंका भी बनी रहती है। आपकी इन्वेस्टमेंट गोल्स क्या हैं और आप कितना रिस्क ले सकते हैं, यह आपको खुद डिसाइड करना चाहिए। रिस्क और रिटर्न रेल की दो पटरियां हैं, जो साथ-साथ चलती हैं, लेकिन मिलती नहीं हैं और आपको इन दोनों को दिमाग में रखकर ही इन्वेस्ट करना चाहिए।

5- लॉन्ग टर्म नजरिया रखेंः आमतौर पर म्यूचुअल फंड को लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट ही माना जाता है। शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव होना कोई नई बात नहीं हैं, ऐसे में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में आपके ऊपर एकदम से इसका असर नहीं होगा। अगर शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट होगी, जो मार्केट में आने वाले हर उतार-चढ़ाव का आपकी कमाई पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। इन्वेस्टमेंट लॉन्ग टर्म होना इसलिए अहम होता है, क्योंकि जब शेयर मार्केट में उछाल आए, तो इससे कमाई की जा सके।

6- फीस और पूरी कॉस्ट का रखें ध्यानः म्यूचुअल फंड में फीस भी शामिल होती है, जिसमें एक्सपेंस रेशियो और मैनेजमेंट फीस शामिल होती है। यह जरूरी है कि इन्वेस्टर्स इसको लेकर जागरूक हों, इन सारे फैक्टर्स को ओवरऑल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी में शामिल करना बहुत अहम होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो इससे आपका रिटर्न प्रभावित हो सकता है, ज्यादातर फंड मैनेजर कॉम्पटेटिव रेट्स की पेशकश करते हैं, जो म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट के फायदों को ज्यादा से ज्यादा हासिल करने की चाह रखने वालों के बहुत अच्छा संकेत है।

7- मार्केट रिस्क के बारे में हो पूरी जानकारीः इन्वेस्टमेंट में जोखिम हमेशा रहता है और म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना भी इससे अलग नहीं है। मार्केट रिस्क म्यूचुअल फंड में भी शामिल है। आर्थिक अनिश्चितताएं और जियोपॉलिटिकल विकास का असर शेयर मार्केट पर पड़ता है। ऐसे में अपने म्यूचुअल फंड की आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए। अपने म्यूचुअल फंड से जुड़ी रिसर्च करते रहना एक अच्छी प्रैक्टिस साबित हो सकती है।

8- रिव्यू कर करें एडजेस्टः इन्वेस्टमेंट के बाद आपको बतौर इन्वेस्टर अपने म्यूचुअल फंड का रिव्यू करना अच्छी प्रैक्टिस है, रिव्यू करें और उसके हिसाब से अपनी इन्वेस्टमेंट को एडजेस्ट करने से आपको बेहतर रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं। आपके इन्वेस्टमेंट गोल के हिसाब से रिव्यू करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

9- इंडेक्सेशन फायदे की हो जानकारीः म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। हालांकि अगर इन्वेस्टर्स इंडेक्सेशन के लिए छूट देते हैं, तो ऐसे में म्यूचुअल फंड से टैक्स बेनेफिट भी मिल सकते हैं। इंडेक्सेशन से मिलने वाले फायदे के बारे में पूरी जानकारी जरूरी है, इससे आपकी कमाई पर टैक्स बेनेफिट मिल सकता है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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