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  1. शेयर बाजार में LTCG टैक्स खत्म करने की मांग, SBI रिसर्च ने दिया बड़ा सुझाव

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शेयर बाजार में LTCG टैक्स खत्म करने की मांग, SBI रिसर्च ने दिया बड़ा सुझाव

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 13, 2026, 07:45 IST

सारांश

एसबीआई रिसर्च ने निर्यात से मिली राशि को करीब छह महीने के भीतर देश में वापस लाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातक आमतौर पर विदेशी खरीदारों को इतनी ही अवधि का उधार देते हैं।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

LTCG टैक्स हटाने से शेयर बाजार को मिलेगा बढ़ावा? SBI रिसर्च की नई रिपोर्ट चर्चा में (Photo: Shutterstock)

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अर्थशास्त्रियों ने 12 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी निकासी के बीच शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन, एलटीसीजी) टैक्स खत्म करने का सरकार को सुझाव दिया। इससे निवेशकों को लंबे समय तक बाजार में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में कहा कि सरकार को शेयर मार्केट में अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह को स्थिर करने के लिए गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके तहत शेयरों में निवेश का पीरियड बढ़ाकर दो-तीन साल करने और उन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स खत्म करने का सुझाव दिया गया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, इन उपायों से विदेशी निवेशकों की अचानक निकासी का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी की निकासी से रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है। फिलहाल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को शेयरों में निवेश से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% कर देना पड़ता है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के बजट में लिस्टेड शेयरों और शेयर आधारित म्यूचुअल फंड पर इस टैक्स की दर को बरकरार रखा गया था। यह व्यवस्था 2024 में किए गए टैक्स बदलावों के बाद से लागू है।

विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 44,166 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके साथ ही 2026 में उनकी कुल निकासी तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अबतक शेयरों से एफपीआई की निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पूरे 2025 में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी अधिक है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अमेरिका में बॉण्ड पर बढ़ते प्रतिफल से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। इसके अलावा, उत्तर एशिया के बाजारों में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी भी विदेशी पूंजी को आकर्षित कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में एआई आधारित शेयरों की कमी और अमेरिका सहित अन्य बाजारों में अपेक्षाकृत अधिक जोखिम-मुक्त प्रतिफल मिलने से भी विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

एसबीआई रिसर्च ने निर्यात से मिली राशि को करीब छह महीने के भीतर देश में वापस लाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातक आमतौर पर विदेशी खरीदारों को इतनी ही अवधि का उधार देते हैं। छह महीने से अधिक समय की अनुमति अलग-अलग मामलों के आधार पर दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और देश के बाह्य खातों को स्थिर बनाने के लिए नीतिगत बदलावों की जरूरत भी बताई गई है। इसमें विदेशी मुद्रा में लिए जाने वाले बाह्य वाणिज्यिक ऋण (External Commercial Borrowing, ECB) पर 'स्रोत पर कर कटौती' के नियम स्पष्ट करने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल इस पर कर की दर पांच से 20% तक है। एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, दोहरे कराधान से बचाव समझौतों (डीटीएए) के तहत मिलने वाली छूट और सामान्य या विशिष्ट प्रावधानों को लागू करने में एकरूपता से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

PTI इनपुट के साथ

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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