पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड March 10, 2025, 16:57 IST
सारांश
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सेविंग्स का एक पुराना और जांचा परखा तरीका है। फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स भरना पड़ता है या नहीं, इसको लेकर लोगों में काफी ज्यादा कंफ्यूजन रहता है। चलिए इस कंफ्यूजन को दूर करने की कोशिश करते हैं।

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फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना कुछ लोगों को काफी सुरक्षित विकल्प लगता है। जिन लोगों को गारंटीड रिटर्न चाहिए होता है और जिन्हें शेयर मार्केट रिस्क से बचना होता है, ऐसे लोग फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने को बेहतर विकल्प समझते हैं। यहां एक सवाल जो ज्यादातर लोगों के जहन में आता है, वह ये है कि क्या फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर इनकम टैक्स भरना होता है? चलिए समझते हैं कि क्या है फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज की पूरी गणित और इस पर इनकम टैक्स देना पड़ता है या नहीं? फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल है और आपकी वार्षिक आय में शामिल होता है। अगर आपके फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज ₹40,000 से ज्यादा है, तो आपको इस पर इनकम टैक्स भरना होगा।
बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के फिक्स्ड डिपॉजिट्स टैक्स डिडक्शन के लिए योग्य (एलिजिबिल) हैं। इसके अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट पर टैक्स को लेकर नियम उम्र पर भी निर्भर करता है। अगर उम्र 60 साल से कम है, तो ऐसे में एक फाइनेंशियल ईयर में ₹40,000 या इससे ज्यादा ब्याज पर टैक्स लगता है, वहीं अगर 60 साल से ज्यादा उम्र है, तो यह सीमा ₹40,000 की जगह ₹50,000 हो जाती है। इसके अलावा आपका टैक्स स्लैब भी तय करता है कि आपको फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज पर कितना टैक्स भरना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आप 20% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो आपको फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज पर 20% टैक्स देना होगा। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हुए आपको फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज की जानकारी देनी होती है। सही टैक्सेशन सुनिश्चित करने के लिए आपके फिक्स्ड डिपॉजिट से इंटरेस्ट इनकम बैंकों द्वारा TDS कटौती के अधीन है। सरकार को यह TDS राशि सीधे टैक्सपेयर्स से मिलती है।
फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज पर टीडीएस 60 साल से कम आयु के लोगों के लिए 40,000 रुपये से अधिक और 60 साल से अधिक आयु वालों के लिए 50,000 रुपये से अधिक ब्याज आय पर लगाया जाता है। कर कटौती की दर 10% है।
NBFC फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए ब्याज पर टैक्स लिमिट ₹5,000 है। अगर किसी फर्म की फिक्स्ड डिपॉजिट की इनकम ₹5,000 से अधिक है, तो ऐसे में ब्याज पर टैक्स लगेगा, TDS 10% की कटौती पर किया जाता है। हालांकि, अगर फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज ₹5000 से अधिक है और आप अपने बैंक या NBFC को अपनी पैन डिटेल्स नहीं देते हैं, तो काटे जाने वाले TDS को मिले ब्याज का 20% तक बढ़ा दिया जाता है। ऊंचे टैक्स ब्रैकेट वाले व्यक्तियों को रिटर्न जमा करते समय एक्स्ट्रा टैक्स भरना पड़ सकता है क्योंकि TDS उनके पूरे टैक्स बिल को कवर नहीं कर सकता है। भारतीय नागरिक अपने नॉन-रेसिडेंट इंडियन (NRI) साथियों की तुलना में क्रम से 10 और 30% TDS भरते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट पर टैक्स छूट का दावा करने के लिए कोई व्यक्ति वित्तीय वर्ष की शुरुआत में फॉर्म 15G या फॉर्म 15H जमा कर सकता है। रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) भी टीडीएस के अधीन है, हालांकि यह याद रखना अहम है कि इसकी कैलकुलेशन और कटौती मंथली नहीं सालाना होनी चाहिए।
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