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  1. क्रेडिट कार्ड में दिख रहा है निगेटिव बैलेंस? डरें नहीं, जानें आपके अतिरिक्त पैसे का क्या है पूरा नियम

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क्रेडिट कार्ड में दिख रहा है निगेटिव बैलेंस? डरें नहीं, जानें आपके अतिरिक्त पैसे का क्या है पूरा नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 27, 2026, 19:41 IST

सारांश

क्रेडिट कार्ड में निगेटिव बैलेंस दिखने का मतलब कर्ज नहीं, बल्कि आपका अतिरिक्त पैसा जमा होना है। ऐसा अधिक भुगतान या रिफंड आने की वजह से होता है। आरबीआई के नियमों के अनुसार आप इस अतिरिक्त पैसे को आने वाले बिल में एडजस्ट करा सकते हैं या सीधे बैंक खाते में वापस पा सकते हैं।

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क्या Credit Card बैलेंस कभी निगेटिव हो सकता है?

अगर आप लंबे समय से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो कभी न कभी कार्ड का बैलेंस निगेटिव दिखने का अनुभव जरूर हुआ होगा। आम तौर पर पॉजिटिव बैलेंस का मतलब बिल चुकाने से होता है, लेकिन अचानक माइनस का निशान देखकर कई लोग परेशान हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं कोई तकनीकी गड़बड़ी या पेनाल्टी तो नहीं लग गई। असल में क्रेडिट कार्ड का बैलेंस निगेटिव होना कोई गड़बड़ी नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपको बैंक को पैसे देने के बजाय, बैंक के पास आपके अतिरिक्त पैसे जमा हैं।

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क्रेडिट कार्ड में निगेटिव बैलेंस बनने की वजह

कार्ड में निगेटिव बैलेंस बनने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण होते हैं। पहला कारण बिल से ज्यादा रकम का भुगतान करना है। मान लीजिए आपके कार्ड का बिल 8000 रुपये आया था, लेकिन आपने 10000 रुपये जमा कर दिए। ऐसे में बचे हुए 2000 रुपये अतिरिक्त जमा होकर निगेटिव बैलेंस बन जाते हैं। दूसरा कारण रिफंड का होता है। अगर आपने कोई सामान खरीदकर बिल चुका दिया और बाद में सामान वापस करने पर रिफंड मिल गया, तो कार्ड में क्रेडिट बैलेंस बन जाता है। इसके अलावा किसी असफल ट्रांजैक्शन की रकम वापस आने या पुराने भुगतान के रिवर्स होने से भी ऐसा होता है। आईसीआईसीआई बैंक के अनुसार, यह अतिरिक्त रकम भविष्य के बिल में अपने आप एडजस्ट हो सकती है।

निगेटिव बैलेंस होने पर क्या बैंक को पैसा देना होता है?

अगर आपके कार्ड में अतिरिक्त क्रेडिट रकम दिख रही है, तो केवल माइनस का निशान देखकर यह न समझें कि आप पर कोई बकाया है। सबसे पहले अपने कार्ड स्टेटमेंट में कुल बकाया रकम, भुगतान की अंतिम तारीख और क्रेडिट एंट्री की जांच करें। कई बार मोबाइल ऐप में बैलेंस दिखाने का तरीका अलग होता है, इसलिए स्टेटमेंट देखना ही सबसे बेहतर तरीका है। यदि वहां क्रेडिट दिख रहा है, तो आपको कोई बिल नहीं चुकाना है।

रिफंड को लेकर क्या हैं आरबीआई के नियम?

आरबीआई के मुताबिक, अगर बिल बनने के बाद और भुगतान से पहले रिफंड आ जाता है, तो यह रकम बकाया बिल में एडजस्ट हो जाती है। उदाहरण के तौर पर 10000 रुपये के बिल में 2000 का रिफंड आने पर सिर्फ 8000 रुपये ही चुकाने होंगे। लेकिन अगर आप पूरा बिल भर चुके हैं और उसके बाद रिफंड आता है, तो बैंक को अतिरिक्त रकम भविष्य के बिल में एडजस्ट करने से पहले आपकी स्पष्ट सहमति लेनी होगी। इसके लिए तय सीमा क्रेडिट लिमिट का 1% या 5000 रुपये, जो भी कम हो, रखी गई है। इस सीमा से अधिक रकम के लिए बैंक को 7 दिनों के भीतर सहमति मांगनी होती है।

अगर आप इस पैसे को भविष्य के बिल में नहीं छोड़ना चाहते, तो कार्ड जारी करने वाले बैंक से रिफंड की मांग कर सकते हैं। नियमों के तहत अनुरोध मिलने पर बैंक को यह रकम 3 कार्यदिवस के भीतर आपके बैंक खाते में ट्रांसफर करनी होती है। इसके लिए ऐप, ग्राहक सेवा या ईमेल का उपयोग किया जा सकता है। जैसे एसबीआई कार्ड में क्रेडिट बैलेंस रिफंड की अलग सुविधा है, जहां जांच के बाद पैसा सीधे आपके खाते में भेज दिया जाता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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