पर्सनल फाइनेंस
.png)
4 min read | अपडेटेड January 20, 2026, 13:04 IST
सारांश
साल 2025 में जहां दुनिया सोने और चांदी की कीमतों पर फिदा थी, वहीं कॉपर यानी तांबे ने चुपचाप निवेशकों की झोली भर दी। इस औद्योगिक धातु ने पिछले साल 62.83 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है। नई तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग ने इसे निवेश का एक बड़ा विकल्प बना दिया है।

समझिए 2026 में निवेश के लिए क्यों हॉट बना हुआ है यह लाल मेटल?
साल 2025 निवेश के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन इस दौरान एक ऐसी धातु ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा जिसने रिटर्न के मामले में कई बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। हम बात कर रहे हैं कॉपर यानी तांबे की। आमतौर पर लोग सुरक्षित निवेश के लिए सोने और चांदी की ओर भागते हैं लेकिन पिछले साल कॉपर ने औद्योगिक मांग के दम पर 60 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न देकर सबको हैरान कर दिया है। इसे बाजार में 'डॉक्टर कॉपर' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसकी मांग और कीमत से यह पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी मजबूती से आगे बढ़ रही है। आज के दौर में जब दुनिया इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, कॉपर की अहमियत सोने से कम नहीं रह गई है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो कॉपर ने पिछले कैलेंडर वर्ष में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। एमसीएक्स पर कॉपर फ्यूचर्स ने निफ्टी के प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। 1 जनवरी 2025 को कॉपर की कीमत करीब 793.85 रुपये प्रति किलो थी जो 1 जनवरी 2026 तक बढ़कर 1,292.50 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि यह सोने के 76 प्रतिशत और चांदी के 169 प्रतिशत के रिटर्न के बराबर तो नहीं है लेकिन एक औद्योगिक धातु के तौर पर यह प्रदर्शन बेहद शानदार माना जा रहा है। निर्माण कार्य, बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवी सेक्टर में कॉपर का कोई विकल्प नहीं है जिसकी वजह से इसकी कीमतों को लगातार सहारा मिल रहा है।
कॉपर में निवेश करना सोने-चांदी जैसा आसान नहीं है क्योंकि इसमें काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव यानी वोलैटिलिटी देखी जाती है। इसकी कीमतें सीधे तौर पर दुनिया के बड़े देशों जैसे चीन की मांग और चिली या पेरू जैसे उत्पादक देशों की सप्लाई पर निर्भर करती हैं। एक नई तांबे की खदान को विकसित करने में 10 से 15 साल का समय लगता है जिसकी वजह से बाजार में अक्सर इसकी कमी बनी रहती है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि कॉपर एक औद्योगिक धातु है और आर्थिक मंदी के समय इसकी कीमतें तेजी से गिर भी सकती हैं। इसलिए इसमें निवेश करते समय अपनी रिस्क लेने की क्षमता का आकलन करना बहुत जरूरी है।
भारत में रिटेल निवेशक सीधे तौर पर कॉपर नहीं खरीद सकते क्योंकि यहां सोने और चांदी की तरह कॉपर के ईटीएफ उपलब्ध नहीं हैं। निवेश का सबसे सीधा तरीका मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर कॉपर फ्यूचर्स के कॉन्ट्रैक्ट खरीदना है। फिलहाल एमसीएक्स पर कॉपर करीब 1,314 रुपये प्रति किलो के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा निवेशक शेयर बाजार के जरिए भी कॉपर में निवेश का लाभ उठा सकते हैं। हिंदुस्तान कॉपर जैसी कंपनियों के शेयर खरीदकर आप अप्रत्यक्ष रूप से इस धातु की तेजी का फायदा ले सकते हैं। इन शेयरों का प्रदर्शन सीधे तौर पर कॉपर की कीमतों और कंपनी के मैनेजमेंट पर निर्भर करता है।
जो निवेशक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोजर चाहते हैं वे लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी एलआरएस के जरिए ग्लोबल कॉपर ईटीएफ या विदेशी माइनिंग कंपनियों के शेयरों में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि इसमें करेंसी का जोखिम और ऊंचे एक्सपेंस रेशियो जैसी चुनौतियां भी शामिल होती हैं। जानकारों का मानना है कि साल 2026 में भी कॉपर की मांग बनी रहेगी क्योंकि डेटा सेंटर्स और एआई के बुनियादी ढांचे के लिए भी इस धातु की भारी जरूरत है। एक बैलेंस पोर्टफोलियो के लिए कॉपर में थोड़ा आवंटन करना लंबी अवधि में फायदेमंद साबित हो सकता है लेकिन इसके साथ जुड़े बाजार जोखिमों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
Municipal Bonds vs Government Bonds
What is Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act (VB-G RAM G)?
Overdraft Loan vs Personal Loan
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs