पर्सनल फाइनेंस
.png)
4 min read | अपडेटेड March 31, 2026, 11:23 IST
सारांश
नए इनकम टैक्स नियमों के तहत कंपनी की ओर से दी जाने वाली कार और ड्राइवर की सुविधा पर टैक्स का बोझ बढ़ने वाला है। 1.6 लीटर से कम और ज्यादा इंजन कैपेसिटी वाली कारों के लिए अलग-अलग टैक्स वैल्यू तय की गई है।

कंपनी की ओर से मिलने वाली कार और ड्राइवर की सुविधा पर अब लगेगा ज्यादा टैक्स।
नौकरीपेशा लोगों के लिए कंपनी से मिलने वाली कार की सुविधा अब महंगी होने जा रही है। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 और 2026 के ड्राफ्ट नियमों में कंपनी की गाड़ियों के पर्सनल इस्तेमाल पर लगने वाले टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। अगर कोई कर्मचारी कंपनी की कार का इस्तेमाल ऑफिस के साथ-साथ अपने निजी कामों के लिए भी करता है, तो उसे अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा टैक्स देना होगा। सरकार ने कार के इंजन की कैपेसिटी और ड्राइवर की सर्विस को लेकर टैक्स के नए रेट तय किए हैं। इससे कर्मचारियों की सैलरी से होने वाली टैक्स की कटौती बढ़ जाएगी और हाथ में आने वाला नेट प्रॉफिट कम हो सकता है।
पहली स्थिति उन लोगों के लिए है जहां कार कंपनी की है या उसने किराए पर ली है और उसे चलाने का सारा खर्चा भी कंपनी ही दे रही है। अगर कर्मचारी इस कार का इस्तेमाल ऑफिस और पर्सनल दोनों कामों के लिए करता है, तो टैक्स का गणित पूरी तरह बदल जाएगा। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक 1.6 लीटर से कम इंजन कैपेसिटी वाली कार के लिए अब 5000 रुपये हर महीने की टैक्स वैल्यू तय की गई है। अगर इसके साथ ड्राइवर भी मिलता है, तो 3000 रुपये हर महीने का चार्ज अलग से जुड़ेगा। पुराने नियमों में यह रेट सिर्फ 1800 रुपये और ड्राइवर के लिए 900 रुपये था। वहीं 1.6 लीटर से ज्यादा बड़े इंजन वाली कार के लिए टैक्स वैल्यू 7000 रुपये हर महीने होगी। इसमें ड्राइवर का 3000 रुपये का चार्ज अलग से लगेगा। पहले बड़े इंजन वाली कार पर यह लिमिट 2400 रुपये और ड्राइवर के लिए 900 रुपये ही थी।
दूसरी स्थिति में कार तो कंपनी की होती है लेकिन पेट्रोल और मेंटेनेंस का खर्चा कर्मचारी खुद अपनी जेब से भरता है। इस मामले में भी सरकार ने टैक्स के नियमों को काफी सख्त बनाने का प्रस्ताव दिया है। अगर कार के इंजन की कैपेसिटी 1.6 लीटर से कम है, तो टैक्स वाली वैल्यू अब 2000 रुपये हर महीने करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा ड्राइवर की सर्विस के लिए 3000 रुपये हर महीने का एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा। पुराने नियमों में यह वैल्यू सिर्फ 600 रुपये और ड्राइवर के लिए 900 रुपये तय थी। इसी तरह अगर कार 1.6 लीटर से ज्यादा के इंजन वाली है, तो टैक्स वाली वैल्यू 3000 रुपये हर महीने और ड्राइवर के लिए 3000 रुपये अलग से होगी। पहले बड़े इंजन वाली कार के लिए यह लिमिट 900 रुपये और ड्राइवर के लिए 900 रुपये ही थी।
तीसरी स्थिति तब आती है जब कार तो कर्मचारी की अपनी होती है, लेकिन वह उसका इस्तेमाल ऑफिस और पर्सनल दोनों कामों के लिए करता है और उसका खर्चा कंपनी से लेता है। इस मामले में भी टैक्स का बोझ बढ़ने वाला है। अगर कर्मचारी की कार का इंजन 1.6 लीटर से कम है, तो टैक्स वाली वैल्यू 5000 रुपये हर महीने और ड्राइवर के लिए 3000 रुपये होगी। पहले यह वैल्यू 1800 रुपये और ड्राइवर के लिए 900 रुपये थी। वहीं 1.6 लीटर से ज्यादा कैपेसिटी वाली कार के लिए अब 7000 रुपये हर महीने और ड्राइवर के लिए 3000 रुपये की टैक्स वैल्यू तय की गई है। पहले इस कैटेगरी में 2400 रुपये और ड्राइवर के लिए 900 रुपये का चार्ज लगता था।
इन नए नियमों से साफ है कि आने वाले समय में ऑफिस की कार की सुविधा लेना काफी महंगा पड़ेगा। नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत इंजन की ताकत के हिसाब से जनरल वैल्यू भी बढ़ा दी गई है। जहां 1.6 लीटर तक की कार के लिए 8000 रुपये और उससे ज्यादा के लिए 10000 रुपये की वैल्यू की बात कही गई है। ड्राइवर की सर्विस के लिए 3000 रुपये का फिक्स चार्ज अब कर्मचारियों की जेब पर सीधा असर डालेगा। ये सभी बदलाव आने वाले समय में आपके टैक्स के बोझ को बढ़ा सकते हैं, इसलिए कर्मचारियों को अपनी टैक्स प्लानिंग अब नए सिरे से करनी होगी। इन नियमों का इंप्लिमेंटेशन होने के बाद कंपनी की कार का पर्सनल इस्तेमाल करना फायदे का सौदा नहीं रह जाएगा।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
How to Claim PM Suraksha Bima Yojana in 2026?
What is No Cost EMI and How Does it Work?
Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY): How to Apply, Eligibility, Loan Amount & Documents Required
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs