पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड February 02, 2026, 17:23 IST
सारांश
Budget 2026: नए नियम के तहत बड़ा बदलाव यह है कि निवेशकों को सिर्फ असल मुनाफे पर टैक्स देना होगा, पूरी रकम पर नहीं। बायबैक इनकम अब कैपिटल गेन मानी जाएगी, जिससे निवेशक शेयर की खरीद कीमत घटा सकेंगे और सिर्फ बचे हुए गेन पर टैक्स देंगे।

Share Buyback: वित्त मंत्री ने कहा कि बायबैक पर मिलने वाली रकम अब कैपिटल गेन के तहत टैक्स होगी।
Union Budget 2026–27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक (Buyback) के टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनियों द्वारा शेयर बायबैक करने पर निवेशकों को मिलने वाली रकम को डिविडेंड नहीं बल्कि “कैपिटल गेन” माना जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बायबैक पर मिलने वाली रकम अब कैपिटल गेन के तहत टैक्स होगी। साथ ही प्रमोटर्स के लिए अलग टैक्स रेट तय किया गया है। घरेलू कंपनी वाले प्रमोटर्स पर प्रभावी टैक्स 22%, जबकि विदेशी या नॉन-डोमेस्टिक प्रोमटर्स पर 30% लगेगा।
टैक्स एक्सपर्ट Rajarshi Dasgupta (AQUILAW) के मुताबिक, बायबैक इनकम को कैपिटल गेन में लाना टैक्स सिस्टम को आसान बनाता है। इससे भ्रम कम होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियों व निवेशकों को बायबैक प्लान करने में ज्यादा क्लैरिटी मिलेगी। उनका मानना है कि इससे मार्केट एफिशिएंसी बेहतर होगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
1 अक्टूबर 2024 से लागू पुराने नियम के तहत, शेयर बायबैक से मिलने वाली पूरी रकम को “Deemed Dividend” माना जाता था। इसे “Income from Other Sources” में डाला जाता था और निवेशक को अपनी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता था। यानी सिर्फ मुनाफे पर नहीं, बल्कि पूरी रकम पर टैक्स लगता था। जो निवेशक 30% स्लैब में थे, उन्हें बायबैक से मिली पूरी राशि पर 30% टैक्स देना पड़ता था, चाहे उन्होंने शेयर कितने में खरीदे हों, इसका कोई फायदा नहीं मिलता था।
अब नए नियम के तहत बड़ा बदलाव यह है कि निवेशकों को सिर्फ असल मुनाफे पर टैक्स देना होगा, पूरी रकम पर नहीं। बायबैक इनकम अब कैपिटल गेन मानी जाएगी, जिससे निवेशक शेयर की खरीद कीमत घटा सकेंगे और सिर्फ बचे हुए गेन पर टैक्स देंगे। टैक्स अब होल्डिंग पीरियड और कैपिटल गेन रेट के हिसाब से लगेगा, ठीक वैसे ही जैसे सामान्य शेयर बेचने पर लगता है।
इस बदलाव से खासकर लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स और हाई टैक्स ब्रेकेट वाले लोगों को राहत मिलेगी। अब बायबैक टैक्सेशन ज्यादा फेयर, प्रेडिक्टेबल और शेयर सेल जैसे बराबर नियमों पर आ गया है।
इसके अलावा बजट में वित्त मंत्री ने कमडिटी फ्यूचर्स पर Securities Transaction Tax (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव भी रखा है। साथ ही Minimum Alternate Tax (MAT) को फाइनल टैक्स बनाने और इसकी दर 15% से घटाकर 14% करने की घोषणा की गई है।
Dhruva Advisors के Partner Vaibhav Gupta का कहना है कि बायबैक को फिर से कैपिटल गेन में लाना रिटेल और नॉन-प्रमोटर शेयरहोल्डर के लिए पॉजिटिव कदम है। प्रमोटर्स के लिए भी फायदा यह है कि वे बायबैक proceeds से शेयर की लागत घटा सकेंगे और सिर्फ कैपिटल गेन पर टैक्स देंगे। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि आगे चलकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है, खासकर तब, जब प्रमोटर्स बायबैक इनकम के खिलाफ कैपिटल लॉस को एडजस्ट करने की कोशिश करेंगे। टैक्स अधिकारी संभव है ऐसे लॉस ऑफसेट को खारिज कर दें, क्योंकि इससे प्रमोटर्स का अतिरिक्त टैक्स कम हो जाएगा।
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