पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड January 28, 2026, 16:53 IST
सारांश
न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए कई प्रस्ताव सामने आए हैं। इसमें सरचार्ज की सीमा को 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख करने और मेट्रो शहरों में रहने वालों के लिए एचआरए (HRA) जैसी राहत की मांग की गई है। ये बदलाव करोड़ों टैक्सपेयर्स की जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं।

न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए कई प्रस्ताव सामने आए हैं।
जैसे-जैसे बजट 2026 करीब आ रहा है, टैक्सपेयर्स की धड़कनें तेज हो गई हैं। इस बार नौकरीपेशा लोगों और पेशेवरों को उम्मीद है कि वित्त मंत्री नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में कुछ ऐसे बदलाव करेंगी जिससे उनकी जेब पर टैक्स का बोझ कम हो सके। हालांकि नई टैक्स रिजीम में टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन इसमें पुरानी व्यवस्था की तरह कई तरह की छूट और कटौतियां नहीं मिलती हैं, जिस वजह से कई लोगों की टैक्सेबल इनकम ज्यादा रह जाती है। इसी को देखते हुए विशेषज्ञों ने सरकार को कुछ ऐसे सुझाव दिए हैं जो नई टैक्स रिजीम को टैक्सपेयर्स के लिए और भी ज्यादा फायदेमंद बना सकते हैं।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की आस
नौकरीपेशा लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद स्टैंडर्ड डिडक्शन को लेकर है। वर्तमान में यह 75,000 रुपये है, जिसे बढ़ाने की मांग की जा रही है। अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) के विशेषज्ञों का सुझाव है कि महंगाई और रहने की बढ़ती लागत को देखते हुए इसे 1.5 लाख रुपये या उससे ज्यादा किया जाना चाहिए। वहीं टैक्सटूविन के सीईओ अभिषेक सोनी का मानना है कि इसे कम से कम 1 लाख रुपये तो करना ही चाहिए और रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए तो यह और भी ज्यादा होनी चाहिए। इससे सीधे तौर पर सैलरी पाने वाले लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।
सरचार्ज की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने एक बहुत ही काम का सुझाव दिया है। फिलहाल 50 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर सरचार्ज लगना शुरू हो जाता है। आईसीएआई का कहना है कि इस सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर देना चाहिए। उनका तर्क है कि सरचार्ज पूरी टैक्स देनदारी पर लगता है, जो उच्च आय वर्ग के उन लोगों के लिए मुश्किल बन जाता है जिनकी आय 50 लाख से थोड़ी ही ज्यादा होती है। अगर आय 50 लाख से सिर्फ 2 लाख रुपये भी ज्यादा है, तो पूरी टैक्स देनदारी पर 10 प्रतिशत सरचार्ज लग जाता है। इस सीमा को बढ़ाने से टैक्स का बोझ ज्यादा सही तरीके से बांटा जा सकेगा।
हेल्थ इंश्योरेंस और धारा 80डी
बजट 2026 से एक बड़ी उम्मीद यह भी है कि धारा 80डी के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की छूट को नई टैक्स रिजीम में भी शामिल किया जाए। फिलहाल यह लाभ केवल पुरानी टैक्स रिजीम में मिलता है। बढ़ती मेडिकल लागत के बीच यह मध्यम वर्ग के लिए बहुत जरूरी हो गया है। अभी टैक्सपेयर्स अपने, अपने जीवनसाथी और बच्चों के लिए 25,000 रुपये तक और माता-पिता के लिए अलग से 25,000 रुपये तक की छूट ले सकते हैं। अगर माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं, तो यह छूट 50,000 रुपये तक हो जाती है। इसे नई व्यवस्था में जोड़ने से लोगों को काफी राहत मिलेगी।
होम लोन और किराए पर रहने वालों के लिए राहत
नई टैक्स रिजीम में होम लोन के ब्याज पर कोई छूट नहीं मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदना किसी के लिए टैक्स के मामले में घाटे का सौदा नहीं होना चाहिए। सुझाव है कि कम से कम पहली बार घर खरीदने वालों के लिए होम लोन पर कुछ फायदे मिलने चाहिए। इसी तरह, नई व्यवस्था में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर भी कोई छूट नहीं मिलती है। मेट्रो शहरों में रहने वाले किराएदारों के लिए यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि उनका पूरा किराया टैक्सेबल हो जाता है।
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