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4 min read | अपडेटेड February 10, 2026, 13:43 IST
सारांश
एम्फी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति 81 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गई है। हालांकि जनवरी 2026 में इक्विटी फंड में इंफ्लो कम देखा गया है, जबकि गोल्ड ईटीएफ में निवेश दोगुना हो गया है। निवेश के इस बदलते ट्रेंड को चलिए आसान भाषा में समझते हैं।

जनवरी महीने में गोल्ड ईटीएफ और डेट फंड्स में निवेशकों की भारी दिलचस्पी देखी गई है।
भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार के लिए साल 2026 का पहला महीना बहुत ही खास रहा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों ने अपनी पुरानी रणनीति को बदलकर अब सुरक्षित निवेश पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। जनवरी के दौरान जहां एक ओर शेयर बाजार से जुड़े इक्विटी फंड्स में आने वाले पैसे में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर सोने और डेट फंड्स में जबरदस्त उछाल देखा गया है। बाजार की इस उठापटक के बीच म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति यानी एयूएम अब 81 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया की सीनियर एनालिस्ट नेहल मेश्राम ने डेट फंड्स के आंकड़ों पर अपनी राय देते हुए बताया कि जनवरी का महीना इस कैटेगरी के लिए वापसी का महीना रहा है। दिसंबर 2025 में जहां डेट फंड्स से 1.32 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी हुई थी, वहीं जनवरी में 74,827 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश वापस आया है। यह बदलाव मुख्य रूप से साल के अंत में होने वाली नकदी की जरूरतों के बाद फिर से पैसा लगाने की वजह से हुआ है। कॉर्पोरेट और संस्थागत निवेशक जो दिसंबर में अपना पैसा निकाल लेते हैं, उन्होंने जनवरी में सरप्लस फंड को दोबारा निवेश करना शुरू कर दिया है।
डेट बाजार में इस रिकवरी की अगुवाई लिक्विडिटी सेगमेंट ने की है। ओवरनाइट फंड्स में 46,280 करोड़ रुपये और लिक्विड फंड्स में 30,682 करोड़ रुपये का निवेश आया है। मनी मार्केट फंड्स में भी 12,763 करोड़ रुपये की अच्छी कमाई देखी गई है। नेहल मेश्राम का कहना है कि निवेशक अभी भी उन फंड्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनमें जोखिम कम है और जो छोटी अवधि के लिए बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। लो ड्यूरेशन फंड्स में भी 4,779 करोड़ रुपये का निवेश आना यह दिखाता है कि लोग बाजार के उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं और केवल हाई क्वालिटी वाले फंड्स में ही पैसा लगा रहे हैं।
हालांकि डेट कैटेगरी की हर स्कीम में पैसा नहीं आया है। AMFI के आंकड़ों के अनुसार, कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स से 11,473 करोड़ रुपये की बड़ी निकासी हुई है। इसके साथ ही डायनेमिक बॉन्ड, गिल्ट और लॉन्ग ड्यूरेशन फंड्स से भी निवेशकों ने अपने हाथ खींचे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशक अभी लंबी अवधि के लिए पैसा फंसाने के मूड में नहीं हैं। जब तक ब्याज दरों और भविष्य की नीतियों को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो जाती, तब तक लोग केवल सुरक्षित और लिक्विड फंड्स में ही टिके रहना चाहते हैं। यह दिखाता है कि बाजार में अभी भी सावधानी का माहौल बना हुआ है।
सोने में निवेश के मामले में जनवरी ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गोल्ड ईटीएफ में जनवरी के दौरान 24,040 करोड़ रुपये का निवेश आया है, जो दिसंबर के 11,647 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। मॉर्निंगस्टार की एनालिस्ट नेहल मेश्राम का कहना है कि सोने की मांग असाधारण रूप से मजबूत बनी हुई है। निवेशक इसे एक सुरक्षित ठिकाने और पोर्टफोलियो को संतुलित करने के हथियार के रूप में देख रहे हैं। नए साल की शुरुआत में लोग अपने निवेश को नए सिरे से बांट रहे हैं, महंगाई और वैश्विक तनाव के जोखिम से बचने के लिए सोने को सबसे बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
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