पर्सनल फाइनेंस
.png)
3 min read | अपडेटेड April 02, 2026, 13:28 IST
सारांश
नेशनल काउंसिल (जेसीएम) ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी 9 बड़ी मांगें रखी हैं। इसमें सबसे प्रमुख पुरानी पेंशन स्कीम को फिर से लागू करना और महिला कर्मचारियों के लिए मेन्स्ट्रुअल लीव जैसे प्रावधान शामिल हैं। कर्मचारियों ने मेमोरेंडम जमा करने की समय सीमा और तकनीकी सीमाओं को भी बढ़ाने की मांग की है।

पेंशनधारकों के लिए जरूरी है खबर
8वें वेतन आयोग (8th CPC) के गठन के बाद अब सरकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को मजबूती से रखना शुरू कर दिया है। नेशनल काउंसिल (जेसीएम) की स्टाफ साइड की ओर से 8वें वेतन आयोग के मेंबर सेक्रेटरी पंकज जैन को एक पत्र भेजा गया है। 1 अप्रैल 2026 को लिखे गए इस पत्र में जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कर्मचारियों की समस्याओं और आयोग के सामने अपनी बात रखने की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए 9 मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा है।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी और पुरानी मांग पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की है। जेसीएम ने अपने पत्र में साफ कहा है कि एनपीएस और यूपीएस को लेकर कर्मचारियों के मन में काफी शिकायतें और समस्याएं हैं। सरकारी कर्मचारियों को किसी भी कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम के तहत नहीं रखा जाना चाहिए। कर्मचारियों की यह पुरजोर मांग है कि नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम को फिर से बहाल किया जाए। इसके साथ ही पेंशनर्स के लिए भी अलग से प्रावधान बनाने की मांग की गई है, जिसमें उनकी पेंशन में समानता, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों का रिवीजन और पेंशन की कम्यूटेड वैल्यू की समय पर बहाली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
जेसीएम ने 8वें वेतन आयोग के ढांचे में महिला कर्मचारियों के लिए एक समर्पित सेक्शन बनाने की वकालत की है। इसमें उनके कामकाज से जुड़े खास मुद्दों जैसे वर्कप्लेस पर सुरक्षा, मैटरनिटी बेनिफिट, मेन्स्ट्रुअल लीव और चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) को गंभीरता से शामिल करने की मांग की गई है। कर्मचारियों का तर्क है कि महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर बराबरी और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही बेहतर पॉलिसी बनाई जा सकती है। इसके अलावा अलग-अलग विभागों की अपनी चुनौतियां होती हैं, इसलिए विभागवार समस्याओं को रखने के लिए भी मेमोरेंडम में अलग से जगह देने की अपील की गई है।
वर्तमान में मेमोरेंडम जमा करने के लिए जो ऑनलाइन सिस्टम है, उसमें कई तकनीकी सीमाएं हैं। जेसीएम ने मांग की है कि शब्द सीमा को 500 शब्दों से बढ़ाकर कम से कम 1000 शब्द किया जाए ताकि जटिल मुद्दों पर अपना तर्क और डेटा पूरी तरह से पेश किया जा सके। साथ ही फाइल अटैच करने की सीमा को भी 2 एमबी से बढ़ाकर 10 एमबी करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों ने मांग की है कि सिर्फ ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि ईमेल और हार्ड कॉपी के जरिए भी मेमोरेंडम जमा करने की अनुमति मिलनी चाहिए ताकि हर स्तर का कर्मचारी आसानी से अपनी बात पहुंचा सके।
जेसीएम ने विभाग से जुड़ी समस्याओं पर मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को 31 मई 2026 तक बढ़ाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि देशभर में फैले विभिन्न संगठनों और यूनियनों के साथ सलाह-मशविरा करने में समय लगता है। पत्र के अंत में शिव गोपाल मिश्रा ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि वे 13 अप्रैल 2026 के बाद किसी भी सुविधाजनक तारीख पर 8वें वेतन आयोग के साथ आमने-सामने मीटिंग करना चाहते हैं।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
What Are State Development Loans (SDLs): Meaning, Features, Benefits & How to Invest
What is a Recurring Deposit (RD)? Features, Benefits, Taxation, and How It Works
What Is NIIF? How India's National Investment and Infrastructure Fund Works
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs