पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 17, 2025, 14:55 IST
सारांश
8th Pay Commission यानी कि आठवें वेतन आयोग को सरकार से मंजूरी मिल गई है, यह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खबर है, लेकिन अब आगे क्या कुछ होगा, कब इसको लागू किया जाएगा, उससे पहले का पूरा प्रोसेस क्या है, चलिए डिटेल में समझते हैं।

वेतनप्राप्त कर्मचारियों को मिलेगी राहत
केंद्रीय बजट (Union Budget) 2025 1 फरवरी को पेश किया जाना है, इससे कुछ दिन पहले ही केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ा तोहफा मिल गया है। 16 जनवरी को केंद्रीय और सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। अब आठवां वेतन आयोग कब से लागू होगा, इसको लागू करने से पहले क्या प्रोसेस होता है और आखिर वेतन आयोग है क्या, चलिए एक-एक करके सब समझते हैं।
भारत सरकार ने वेतन आयोग की स्थापना की थी। यह एक केंद्रीय सरकारी संगठन है, जो अपने कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव को लेकर सिफारिशें देता है। भारत में पहला वेतन आयोग 1947 में लागू हुआ था। हर 10 साल पर वेतन आयोग का गठन होता है और इसकी सिफारिशों के हिसाब से फैसले लिए जाते हैं।
राजधानी दिल्ली में वेतन आयोग का हेडक्वॉर्टर है। वेतन आयोग को जब मंजूरी मिलती है, तो इसके बाद उसे अपनी सिफारिशों पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाता है। वेतन आयोग का जो सबसे अहम मकसद है, वह यह है कि सभी केंद्रीय कर्मचारियों को आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से सम्मान से जीने लायक सैलरी दी जाए।
अभी सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी दी जाती है, सातवें वेतन आयोग का गठन 2014 में किया गया था, जबकि 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया था। अभी तक वेतन आयोग के गठन और इसकी सिफारिशों को लागू होने में करीब दो से ढाई साल का समय लगता है, लेकिन इस बार की स्थिति थोड़ी अलग है।
16 जनवरी 2025 को आठवें वेतन आयोग का गठन किया गया है, जबकि 1 जनवरी 2026 को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को रिवाइज किया जाना है, ऐसे में इस बार वेतन आयोग के पास सिफारिशें लागू करने का समय एक साल से भी कम का होने वाला है।
पुष्पेंद्र त्रिपाठी और मोहम्मद इरफान जफर ने मिलकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग की लड़ाई लड़ी, जिसके बाद आखिरकार सरकार को उनकी मांगें माननी पड़ी और 16 जनवरी को आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह तय हुआ है कि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 से 2.91 के बीच होगा।
फिटमेंट फैक्टर सरकारी कर्मचारियों और पेंशन पाने वाले पूर्व सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में सुधार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला एक फॉर्मूला है। यह कर्मचारी की मौजूदा सैलरी को एक निश्चित मल्टीप्लायर से बढ़ाकर नए वेतनमान में मिला देता है।
इसे हर वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाता है और समय-समय पर इसमें बदलाव भी होता है। फिटमेंट फैक्टर तय करने में कई चीजों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे कि सरकार की आर्थिति स्थिति कैसी है, महंगाई दर क्या है और कर्मचारियों की जरूरतें क्या हैं।
इसको अगर उदाहरण से समझने की कोशिश करें, तो सातवें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर की अगर बात करें तो इसके 2.57 रखा गया था। तो अगर ऐसे में किसी कर्मचारी की सैलरी मानिए 15,000 रुपये प्रति महीना थी, तो इसे 2.57 से मल्टीप्लाई करके 38,550 रुपये प्रति महीना कर दी गई। यहां एक बात जो ध्यान में रखना जरूरी है वह यह कि यह सैलरी का बेसिक हिस्सा है।
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 में लागू होंगी। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 में लागू हुई थीं, जो 2026 में खत्म हो जाएंगी। 2026 में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएंगी और उसके बाद सरकार इसको लेकर अपना फैसला सुनाएगी।
यहां आपको बता दें कि वेतन आयोग अपनी जो भी सिफारिशें आठवें वेतन आयोग के लिए जमा करेगा, उसे मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं होती है और उसमें कुछ बदलाव के साथ सरकार आठवां वेतन आयोग लागू कर सकती है।
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