पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड November 18, 2025, 14:15 IST
सारांश
ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉइज फेडरेशन ने सरकार से पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और कोरोना काल का रुका हुआ डीए एरियर देने की भी मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ रही है, इसलिए वेतन आयोग के गठन से पहले अंतरिम राहत मिलनी चाहिए। जानिए इस चिट्ठी में और क्या लिखा है।

रक्षा कर्मचारियों ने पीएम मोदी से 8वें वेतन आयोग और पुरानी पेंशन पर तुरंत फैसला लेने की अपील की है।
केंद्रीय कर्मचारियों के बीच आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है। देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारी अपनी तनख्वाह और भत्तों में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच रक्षा क्षेत्र से जुड़े करीब 8 लाख कर्मचारियों ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरवाजा खटखटाया है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने पीएम मोदी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने अपनी आठ प्रमुख मांगे रखी हैं। इन मांगों में सबसे बड़ी मांग यह है कि जब तक आठवां वेतन आयोग लागू नहीं होता, तब तक कर्मचारियों को 20% की अंतरिम राहत दी जाए।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हुए काफी समय बीत चुका है और अब महंगाई बहुत बढ़ गई है। आमतौर पर केंद्र सरकार हर 10 साल में नया वेतन आयोग बनाती है। सातवां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, इस हिसाब से आठवां वेतन आयोग 2026 में लागू होना चाहिए। लेकिन कर्मचारियों का तर्क है कि आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट आने में लंबा समय लगता है। इसलिए उन्होंने मांग की है कि सरकार अभी से उनकी बेसिक सैलरी में 20% की बढ़ोतरी करे, जिसे 'अंतरिम राहत' कहा जाता है। इससे कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी।
फेडरेशन ने अपनी चिट्ठी में सिर्फ सैलरी बढ़ाने की बात नहीं की है, बल्कि दो और ऐसे मुद्दों को उठाया है जो हर सरकारी कर्मचारी के दिल के करीब हैं। पहला मुद्दा है पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली। संगठन ने साफ तौर पर कहा है कि न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को हटाकर फिर से पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रहे। दूसरा बड़ा मुद्दा कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते (DA) के एरियर का है। कर्मचारियों ने पीएम मोदी से अपील की है कि सरकार उस रुके हुए पैसे को जल्द से जल्द रिलीज करे।
चूंकि यह ज्ञापन रक्षा कर्मचारियों की तरफ से दिया गया है, इसलिए इसमें कुछ मांगे उनके विभाग से भी जुड़ी हैं। फेडरेशन ने सरकार से अपील की है कि रक्षा क्षेत्र के कारखानों और यूनिट्स का निगमीकरण या निजीकरण न किया जाए। उनका मानना है कि यह देश की सुरक्षा और कर्मचारियों के हित के खिलाफ है। इसके अलावा, उन्होंने अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली नौकरियों (Compassionate Appointment) में लगी 5% की सीमा को हटाने की मांग भी की है, ताकि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवार को आसानी से नौकरी मिल सके।
फिलहाल सरकार की तरफ से आठवें वेतन आयोग के गठन पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। लेकिन कर्मचारी संगठनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। फेडरेशन ने यह भी मांग की है कि सातवें वेतन आयोग की जो विसंगतियां या कमियां रह गई थीं, उन्हें भी सुधारा जाए। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र सरकार इन 8 लाख कर्मचारियों की आवाज सुनती है और क्या बजट सत्र से पहले वेतन आयोग या अंतरिम राहत पर कोई बड़ा फैसला लिया जाता है।
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