मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड January 20, 2026, 12:31 IST
सारांश
Stock Market: पिछले 11 कारोबारी दिनों में से 9 कारोबारी दिन ऐसे रहे जब मार्केट में गिरावट देखी गई। इस दौरान Sensex में 3.28 फीसदी या 2813 अंकों की गिरावट आ चुकी है। दूसरी तरफ Nifty 50 भी इस अवधि में 890 अंक या 3.38 फीसदी टूट चुका है। यहां हमने बाजार में गिरावट के 8 बड़े कारण बताए हैं।

Stock Market: अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता एक बार फिर बढ़ गई है।
पिछले 11 कारोबारी दिनों में से 9 कारोबारी दिन ऐसे रहे जब मार्केट में गिरावट देखी गई। इस दौरान Sensex में 3.28 फीसदी या 2813 अंकों की गिरावट आ चुकी है। दूसरी तरफ Nifty 50 भी इस अवधि में 890 अंक या 3.38 फीसदी टूट चुका है। यहां हमने बाजार में गिरावट के 8 बड़े कारण बताए हैं।
अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता एक बार फिर बढ़ गई है, जिससे ट्रेड वॉर की आशंकाएं लौट आई हैं। अमेरिका और यूरोप के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ने से ग्लोबल मार्केट में रिस्क लेने का मूड कमजोर हुआ है। इसके चलते दुनियाभर के बाजारों में बिकवाली दिखी, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
निवेशकों की नजर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले पर भी बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह तय होगा कि ट्रंप का टैरिफ वैलिड है या नहीं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर फैसला बाजार के खिलाफ आता है, तो बाजार की चाल अचानक बदल सकती है, हालांकि इसके समय और नतीजे को लेकर अभी साफ तस्वीर नहीं है।
मंगलवार को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी भी है, जिसकी वजह से बाजार में वोलैटिलिटी ज्यादा दिख रही है। एक्सपायरी वाले दिन डेरिवेटिव पोजिशन के अनवाइंडिंग और रोलओवर के कारण इंडेक्स में तेज इंट्राडे मूवमेंट देखने को मिल सकता है।
दिसंबर तिमाही के नतीजों से जुड़े संकेत भी मिले-जुले रहे। Wipro के शेयर सोमवार को जोरदार गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि कंपनी ने उम्मीद से कमजोर शॉर्ट-टर्म गाइडेंस दी। इसका असर पूरे IT सेक्टर पर पड़ा और IT इंडेक्स करीब 1.1% गिरकर सबसे ज्यादा नुकसान में रहने वाला सेक्टर बना।
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सोमवार को FIIs ने करीब 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी महीने में यह लगातार दसवां सेशन रहा जब FIIs ने नेट बिकवाली की, सिर्फ 2 जनवरी को मामूली खरीद देखने को मिली थी।
घरेलू बाजार की कमजोरी और विदेशी फंड्स की निकासी के चलते रुपया भी दबाव में रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे गिरकर 90.98 के स्तर पर पहुंच गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमजोर इक्विटी बाजार रुपये पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
एशियाई बाजारों से भी मजबूत सपोर्ट नहीं मिला। साउथ कोरिया का Kospi इंडेक्स मजबूती में रहा, लेकिन जापान का Nikkei 225, चीन का SSE Composite और हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड करते दिखे। अमेरिकी बाजार सोमवार को फेडरल हॉलीडे की वजह से बंद रहे, जबकि 20 जनवरी को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स 1% से ज्यादा गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में हल्की तेजी देखी गई और यह 0.11% बढ़कर 64.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत जैसे आयातक देश के लिए महंगाई और फिस्कल दबाव बढ़ने की चिंता रहती है।
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