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  1. US बॉन्ड यील्ड में उछाल, FIIs की लगातार बिकवाली और गिरता रुपया, आज इन वजहों से बाजार पर दबाव

मार्केट न्यूज़

US बॉन्ड यील्ड में उछाल, FIIs की लगातार बिकवाली और गिरता रुपया, आज इन वजहों से बाजार पर दबाव

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड October 01, 2026, 11:24 IST

सारांश

विदेशी निवेशक (FIIs) लंबे समय से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। पिछले लगातार 5 दिनों में बिकवाली की रफ्तार और बढ़ी है। बीते कारोबारी दिन यानी 30 सितंबर को FIIs ने 10,148.41 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

Bond Yield

Stock Market: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी से भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है।

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में आज 01 अक्टूब को लगातार चौथे कारोबारी दिन दबाव है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 295 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 72,187.62 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 112 अंकों की कमजोरी के साथ 22,508.05 के स्तर पर आ गया। बता दें कि पिछले 6 कारोबारी दिनों में बाजार करीब 3.80 फीसदी लुढ़क गया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में आज कमजोरी नजर आ रही है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला भी जारी है। यहां हम जानेंगे कि बाजार में आज की गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी निवेशक (FIIs) लंबे समय से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। पिछले लगातार 5 दिनों में बिकवाली की रफ्तार और बढ़ी है। बीते कारोबारी दिन यानी 30 सितंबर को FIIs ने 10,148.41 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके अलावा FIIs ने 29 सितंबर को 9,980.22 करोड़ रुपये, 28 सितंबर को 5,353.22 करोड़ रुपये, 25 सितंबर को 3,693.93 करोड़ रुपये और 24 सितंबर को 5,027.36 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते बाजार का सेंटीमेंट खराब हुआ है।

बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी से भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड 2007 के बाद के ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गई। इसकी यील्ड 5.304% तक पहुंची, जिसने 2007 में बने 5.303% के इंट्राडे रिकॉर्ड को पार कर दिया। यह मई 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। 10 साल के ट्रेजरी की यील्ड को दुनियाभर में कई तरह के कर्ज और ब्याज दरों के लिए एक अहम बेंचमार्क माना जाता है। इस बढ़ोतरी की वजह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूत ग्रोथ और महंगाई को लेकर चिंता है। इसके अलावा 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.62% तक पहुंच गई है, जो जून 2002 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। बॉन्ड यील्ड के बढ़ने से विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगा सकते हैं।

क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें

जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच क्रूड ऑयल का भाव अभी भी काफी ज्यादा है। आज 1 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 96.68 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है। भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। क्रूड ऑयल की अधिक कीमत से भारत का आयात बिल बढ़ता है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर तेहरान का प्रभाव कम हो रहा है। पिछले कुछ दिनों में होर्मुज से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात किया गया है।

रुपये पर दबाव

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया एक सीमित दायरे में रहा। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से डॉलर की लगातार मांग के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे गिरकर 95.97 पर आ गया। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालना और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों के कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर भी रुपये पर दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, RBI बाजार में डॉलर बेच रहा है, जिससे डॉलर की उपलब्धता बढ़ रही है। इसलिए रुपया फिलहाल ₹96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे बना हुआ है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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