मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड April 07, 2026, 10:58 IST
सारांश
वेदांता और उसकी सहयोगी कंपनी हिंदुस्तान जिंक आज ₹7,280 करोड़ की सरकारी मैग्नेट स्कीम के लिए प्री-बिड मीटिंग में हिस्सा लेंगी। सरकार का लक्ष्य भारत को 'रेयर अर्थ मैग्नेट' का हब बनाना और चीन पर निर्भरता कम करना है। यह प्रोजेक्ट ईवी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए बहुत अहम माना जा रहा है।

भारत को हाई-टेक मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने के लिए मैदान में उतरीं वेदांता और हिंदुस्तान जिंक।
भारतीय शेयर बाजार के दिग्गज शेयर वेदांता और उसकी सब्सिडियरी कंपनी हिंदुस्तान जिंक में आज खास हलचल देखी जा रही है। सुबह 10:40 बजे तक वेदांता का शेयर 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है, वहीं हिंदुस्तान जिंक के शेयर में भी 1% से अधिक की तेजी देखी जा रही है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों कंपनियां भारत सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट स्कीम के लिए होने वाली प्री-बिड कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने जा रही हैं। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को दुनिया का मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इस खबर के आने के बाद से ही निवेशकों के बीच वेदांता के फ्यूचर प्लान और शेयरों को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई है। बाजार को उम्मीद है कि इस बड़े प्रोजेक्ट में एंट्री से कंपनी की वैल्यू में बड़ा इजाफा हो सकता है।
भारी उद्योग मंत्रालय ने इस खास स्कीम की घोषणा की है जिसका लक्ष्य भारत में 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स' के उत्पादन को तेजी से बढ़ावा देना है। सरकार ने पिछले महीने ही देश में सालाना 6,000 मीट्रिक टन मैग्नेट बनाने की फैसिलिटी स्थापित करने के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। इस प्रोजेक्ट के लिए मंत्रालय ने एक विस्तृत प्रस्ताव भी जारी किया है। आज यानी 7 अप्रैल को इस पर प्री-बिड कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है और इसके बाद 28 मई को फाइनल बिडिंग की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के टेक्निकल बिड्स को 29 मई 2026 को खोला जाएगा।
रेयर अर्थ मैग्नेट दुनिया के सबसे शक्तिशाली स्थाई चुंबक माने जाते हैं। ये नियोडिमियम या समैरियम-कोबाल्ट जैसे दुर्लभ तत्वों के अलॉय से बनाए जाते हैं। ये साधारण चुंबकों के मुकाबले बहुत ज्यादा पावरफुल, वजन में हल्के और साइज में छोटे होते हैं। इसी वजह से इनकी सबसे ज्यादा जरूरत हाई-परफॉर्मेस वाली मशीनों जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी की मोटरों, पवन चक्की यानी विंड टर्बाइन, कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव और एमआरआई जैसी मेडिकल मशीनों में पड़ती है। भारत वर्तमान में इन मैग्नेट्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है और अब सरकार इस कमी को पूरा करना चाहती है।
दिसंबर 2025 में सरकार ने इस स्कीम को नोटिफाई किया था जिसका सबसे बड़ा मकसद चीन पर निर्भरता को कम करना है। फिलहाल दुनिया भर में इन मैग्नेट्स की सप्लाई चैन पर चीन का एकतरफा कब्जा है। भारत सरकार चाहती है कि ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और ग्रीन एनर्जी जैसे रणनीतिक सेक्टरों के लिए देश में ही एक मजबूत और सुरक्षित सप्लाई चैन तैयार की जाए। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार इस स्कीम के जरिए दुर्लभ तत्वों के ऑक्साइड को चुंबक में बदलने की पूरी घरेलू वैल्यू चैन बनाना चाहती है।
इस योजना के तहत चुने गए लाभार्थियों को न केवल मैग्नेट की बिक्री पर मोटा इंसेंटिव मिलेगा, बल्कि नई यूनिट लगाने के लिए कैपिटल सब्सिडी भी दी जाएगी। सरकार का इरादा कुल 6,000 मीट्रिक टन की क्षमता को पांच अलग-अलग आवेदकों में बांटने का है। एक कंपनी को कम से कम 600 और अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन की क्षमता अलॉट की जाएगी। खास बात यह है कि सबसे कम बोली लगाने वाली तीन कंपनियों को परमाणु ऊर्जा विभाग की कंपनी आईआरईएल से कच्चे माल की पक्की सप्लाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
यह पूरी स्कीम सात साल की अवधि के लिए तैयार की गई है। इसमें शुरुआती दो साल मैन्युफैकिंग फैसिलिटी को सेटअप करने के लिए दिए जाएंगे। इसके बाद अगले पांच सालों तक मैग्नेट की बिक्री के आधार पर कंपनियों को इंसेंटिव का भुगतान किया जाएगा। वेदांता और हिंदुस्तान जिंक जैसी बड़ी कंपनियों के इस रेस में शामिल होने से सेक्टर में तगड़ा कॉम्पिटिशन देखने को मिलेगा। अगर वेदांता को यह कॉन्ट्रैक्ट मिलता है, तो आने वाले समय में कंपनी के रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट पर इसका बहुत ही पॉजिटिव असर पड़ने की संभावना है।
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