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4 min read | अपडेटेड October 13, 2026, 14:59 IST
सारांश
सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। एनपीसीआई के अनुसार फेस्टिव सीजन को देखते हुए यह चार्ज अब दिवाली के बाद लागू किया जाएगा।

त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही डिजिटल पेमेंट करने वाले व्यापारियों और आम लोगों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार ने मंगलवार को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के जरिए 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी की गई थी, लेकिन अब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने साफ किया है कि यह नया चार्ज दिवाली के बाद ही लागू किया जाएगा। हालांकि, इसे लागू करने की नई तारीख क्या होगी, इसका ऐलान अभी नहीं किया गया है। इस राहत भरी खबर के सामने आते ही वन 97 कम्युनिकेशंस यानी पेटीएम, मोबिक्विक और पाइन लैब्स जैसी दिग्गज फिनटेक कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला।
मंगलवार के कारोबारी सेशन में पेटीएम का शेयर पहले लाल निशान में यानी माइनस में ट्रेड कर रहा था और लगातार दबाव में बना हुआ था। लेकिन जैसे ही NPCI की तरफ से MDR टलने की बात सामने आई, शेयर में तेज खरीदारी शुरू हो गई। देखते ही देखते शेयर नुकसान से उबरकर हरे निशान और संभली हुई स्थिति में आ गया। पेटीएम का शेयर सुधरकर 1,690.00 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसी तरह वन मोबिक्विक सिस्टम्स के शेयर में भी 1.05% की बढ़त दर्ज की गई और यह चढ़कर 243.30 रुपये के भाव पर पहुंच गया। पाइन लैब्स के शेयर में भी निचले स्तर से शानदार रिकवरी दर्ज की गई।
NPCI ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने आज हुई बैठक में यह तय किया है कि त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर MDR अब दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा, जिसकी तारीख अलग से जारी की जाएगी। इस साल दिवाली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को पड़ रहा है। कमेटी का मानना है कि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान चलने वाले त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के खर्च में बहुत बड़ी बढ़ोतरी देखी जाती है। ऐसे में अगर नया चार्ज अचानक लागू किया जाता, तो रिटेल पेमेंट्स में रुकावट आने का खतरा बना रहता। तारीख आगे बढ़ने से पेमेंट कंपनियों को भी अपने सिस्टम को नए नियमों के हिसाब से तैयार करने का पूरा समय मिल सकेगा।
मूल योजना के अनुसार, यह चार्ज केवल व्यापारियों यानी पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतानों पर ही लगना था, जिनकी रकम 2,000 रुपये से ज्यादा होगी। वहीं आम लोगों के बीच आपस में होने वाले पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P पेमेंट्स पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहने तय किए गए हैं। मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह फीस होती है, जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट्स स्वीकार करने के बदले में चुकाते हैं। शेयर बाजार के निवेशकों की नजर में यह चार्ज पेमेंट कंपनियों के लिए रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया माना जा रहा था, क्योंकि उन्हें भी इस कमाई में से एक हिस्सा मिलने की उम्मीद थी।
इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर पहले से ही तारीख आगे बढ़ने की चर्चाएं चल रही थीं। इससे पहले आई कुछ रिपोर्टों में रेग्युलेटरी अधिकारी और इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि सरकार इस फैसले को कुछ महीनों के लिए आगे बढ़ाने पर विचार कर रही थी। ऐसी भी संभावना जताई जा रही थी कि इसे जनवरी 2027 तक के लिए टाला जा सकता है। 15 अक्टूबर की पुरानी डेडलाइन इसलिए भी बेहद संवेदनशील थी क्योंकि त्योहारी खरीदारी के चरम समय में कोई भी पेमेंट नेटवर्क में रुकावट नहीं देखना चाहता था। अब यह साफ हो गया है कि दिवाली के बाद ही इस व्यवस्था को लागू करने की नई समय सीमा सामने आएगी।
भारत में रिटेल पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम के संचालन की पूरी जिम्मेदारी NPCI के पास ही है। यह देश की एक प्रमुख अंब्रेला संस्था है, जिसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने मिलकर की थी। देश में UPI के लगातार बढ़ते दायरे के बीच NPCI का यह कदम त्योहारी सीजन में बाजार को बिना किसी झंझट के सुचारू बनाए रखने और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित होगा।
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