मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड July 13, 2026, 07:16 IST
सारांश
शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी अहम होने वाला है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीधा असर मार्केट पर पड़ेगा। इसके अलावा विदेशी निवेशकों का रुख और रुपये की चाल भी बाजार की दिशा तय करेगी।

बाजार में अगले हफ्ते हलचल दिख सकती है। Image: Shutterstock
बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट देखने को मिली। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 0.25 पर्सेंट गिरकर 77,569.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.26 पर्सेंट फिसलकर 24,206.90 के लेवल पर आ गया। हालांकि, इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में एक पर्सेंट से ज्यादा की तेजी रही, जो दिखाता है कि बड़ी कंपनियों के अलावा बाकी स्टॉक्स में भी निवेशकों की खरीदारी जारी है। अब अगले हफ्ते बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को उन पांच बड़े फैक्टर्स पर नजर रखनी होगी, जो मार्केट की चाल तय करेंगे।
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजों का सीजन अब शुरू हो चुका है। टीसीएस अपने नतीजे जारी करने वाली पहली कंपनियों में शामिल हो गई है। अगले हफ्ते एचसीएल टेक, ग्रो, विप्रो और जियो फाइनेंसियल सर्विसेज जैसी दिग्गज कंपनियों समेत करीब 100 कंपनियां अपना रिजल्ट पेश करेंगी। रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च हेड अजित मिश्रा के मुताबिक, कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री से अलग-अलग सेक्टर्स का ट्रेंड और उनकी आगे की कमाई की उम्मीदें तय होंगी। इसलिए निवेशकों की नजर इन नतीजों पर टिकी रहेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहा तनाव बाजार के लिए सबसे बड़ा और अहम ट्रिगर है। इस हफ्ते अमेरिका ने ईरान पर तीसरे दौर का हमला किया है। यह हमला तब हुआ जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन हमलों को मंजूरी दी थी, ताकि ईरान को कमर्शियल जहाजों पर हमला करने से रोका जा सके। ईरान के कई तटीय शहरों और प्रमुख एनर्जी सेंटर्स में धमाकों की खबरें आई हैं। दोनों देशों के बीच हो रही इस जंग से ग्लोबल मार्केट का सेंटिमेंट बिगड़ सकता है, जिसका सीधा असर हमारे घरेलू बाजार पर भी पड़ेगा।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बावजूद राजनयिक बातचीत जारी रहने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.9 पर्सेंट गिरकर 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, हालांकि पूरे हफ्ते में इसमें चार पर्सेंट की बढ़त रही। वहीं ब्रेंट क्रूड भी गिरकर 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।
शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने लगातार खरीदारी की है। इस हफ्ते एफआईआई ने करीब 4,670 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया। कच्चे तेल के दाम थोड़े कम होने और ग्लोबल मार्केट के माहौल में सुधार से विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस बढ़ा है। वहीं, दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने भी बाजार को पूरा सपोर्ट दिया है। DII ने इस हफ्ते करीब 8,275 करोड़ रुपये का मजबूत निवेश किया। घरेलू निवेशकों की इस शानदार खरीदारी ने बाजार को ज्यादा गिरने से बचाया है और एक अच्छी स्थिरता दी है।
शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 9 पैसे की मजबूती के साथ 95.38 पर बंद हुआ। कच्चे तेल के दाम नरम होने और घरेलू शेयर बाजार में तेजी आने से रुपये को यह सपोर्ट मिला। हालांकि, पूरे हफ्ते में रुपये के अंदर कुछ कमजोरी भी आई थी और यह 95 के पार चला गया था। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और सेफ-हेवन के रूप में डॉलर की बढ़ती डिमांड के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है।
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