मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड April 20, 2026, 09:15 IST
सारांश
पिछले हफ्ते शेयर बाजार में अच्छी बढ़त रही और अब नजर इस हफ्ते पर है। आईटी सेक्टर के बड़े नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली बातचीत बाजार की दिशा तय करेगी। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा मिल सकता है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता का विषय है।

शेयर बाजार की हर हलचल पर नजर रखना जरूरी है।
17 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इस खरीदारी की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी 50 लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे। सेंसेक्स 505 पॉइंट यानी 0.65 पर्सेंट चढ़कर 78,493.54 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में भी 157 पॉइंट की बढ़त देखी गई और यह 24,353.55 के लेवल पर स्थिर हुआ। इस तेजी के बीच मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने भी बड़े इंडेक्स के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले हफ्ते में बाजार का रुख सकारात्मक रह सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से बड़ी खबरों और ग्लोबल संकेतों पर निर्भर करेगा।
इस हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर चौथी तिमाही के नतीजे होंगे। सोमवार को जब बाजार खुलेगा, तो सबसे पहले एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी बैंकिंग कंपनियों के नतीजों पर रिएक्शन देखने को मिलेगा। इसके अलावा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस और टेक महिंद्रा भी अपने नतीजे पेश करने वाली हैं। हेवेल्स, इंडसइंड बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस जैसी कंपनियों के प्रदर्शन पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि आने वाले समय में इंडेक्स किस दिशा में जाएगा।
ग्लोबल मार्केट के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत बहुत अहम है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने बातचीत की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप शांति को लेकर उम्मीद जता रहे हैं। तेहरान का कहना है कि वाशिंगटन ऐसी मांगें रख रहा है जो बहुत ज्यादा हैं। खबर है कि बातचीत का अगला दौर सोमवार को पाकिस्तान में शुरू हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। अगर यहां हालात बिगड़ते हैं, तो बाजार में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी कमी आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद में तेल के दाम गिरे हैं। आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 7.57 पर्सेंट की बड़ी गिरावट के साथ 91.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 9.63 पर्सेंट गिरकर 85.57 डॉलर पर आ गया। तेल की कीमतों में इस स्थिरता से भारतीय बाजार को बड़ी मजबूती मिल सकती है, क्योंकि इससे देश के आर्थिक हालात सुधरते हैं। निवेशकों के लिए यह खबर काफी राहत देने वाली है।
शेयर बाजार के साथ-साथ बुलियन मार्केट में भी हलचल तेज है। डॉलर के कमजोर होने और ईरान की ओर से आए सकारात्मक बयानों के बाद सोने की कीमतों में तेजी बनी हुई है। ईरान के विदेश मंत्री के बयान के बाद महंगाई की चिंताओं में थोड़ी कमी आई है। स्पॉट गोल्ड की कीमत बढ़कर 4,861.32 डॉलर प्रति औंस हो गई है। चांदी के दामों में भी इस हफ्ते जबरदस्त उछाल आया है और यह 4.2 पर्सेंट बढ़कर 81.71 डॉलर पर पहुंच गई है। सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ निवेशकों का आकर्षण अभी भी बना हुआ है।
बाजार के लिए एक चिंता की बात विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली है। अप्रैल महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट बाजार से 1 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश निकाल लिया है। ग्लोबल यील्ड में बदलाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव की वजह से यह बिकवाली हो रही है। अगर बिकवाली का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो अप्रैल 2025 के बाद यह सबसे बड़ी मासिक बिकवाली हो सकती है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में निवेशकों ने मामूली खरीदारी जरूर की है, लेकिन कच्चे तेल के दाम गिरने से रुपए को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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