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  1. गिरावट के बाद क्या इस हफ्ते संभलेगा मार्केट? इन 5 बड़ी बातों पर निर्भर करेगी शेयर बाजार की चाल

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गिरावट के बाद क्या इस हफ्ते संभलेगा मार्केट? इन 5 बड़ी बातों पर निर्भर करेगी शेयर बाजार की चाल

Upstox

5 min read | अपडेटेड June 22, 2026, 08:31 IST

सारांश

पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार की पांच दिनों की बढ़त पर ब्रेक लग गया। आईटी शेयरों में आई गिरावट और ग्लोबल दबाव के कारण सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए। अब इस हफ्ते बाजार की चाल कैसी रहेगी, यह यूएस-ईरान शांति समझौते, कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों के रुख जैसे 5 बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगा।

share-market-outlook-next-week-five-key-factors | Image: Shutterstock

अगले हफ्ते इन 5 बड़े कारणों से शेयर बाजार की चाल तय होगी। | Image: Shutterstock

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन यानी 19 जून को लगातार पांच दिनों से चली आ रही बढ़त का सिलसिला आखिरकार टूट गया। दिग्गज टेक कंपनी एक्सेंटूर द्वारा अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को घटाने की वजह से भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिसने पूरे बाजार को नीचे खींच लिया। इसके अलावा कमजोर ग्लोबल मार्केट ट्रेंड, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली की वापसी और भू-राजनीतिक चिंताओं ने भी बाजार का मूड बिगाड़ा। इसके चलते शुक्रवार को सेंसेक्स 607 अंक या 0.78 पर्सेंट गिरकर 76,802.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में भी 154.90 अंकों की गिरावट आई और यह 24,013.10 पर आकर रुका।

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शुक्रवार को इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव दिखा। एक समय सेंसेक्स 900 अंकों से भी ज्यादा टूटकर 76,500 के स्तर से नीचे चला गया था, जबकि निफ्टी 50 भी 200 अंकों से अधिक फिसलकर 23,950 के नीचे आ गया था। यह भारी गिरावट पिछले पांच दिनों में बाजार में आई करीब 5 पर्सेंट की शानदार तेजी के बाद देखने को मिली है। अब निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हफ्ते शेयर बाजार किस दिशा में जाएगा? मिडिल ईस्ट में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद करने के नए आदेश से तनाव बढ़ गया है। ऐसे में इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में 5 बड़े फैक्टर्स की भूमिका सबसे अहम होने वाली है।

यूएस-ईरान शांति समझौता और होर्मुज का नया संकट

अमेरिका और ईरान के बीच एक स्थाई युद्धविराम को लेकर स्विट्जरलैंड में अहम बातचीत शुरू होने वाली है, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित कई सीनियर अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का नया निर्देश दे दिया है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। ये दोनों पुराने विरोधी देश तब बातचीत की मेज पर आ रहे हैं जब दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच झड़पों की वजह से इसमें थोड़ी देरी हुई। यह पूरी बातचीत उस 60 दिनों के ढांचे के तहत हो रही है जिसे डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी पेरिस यात्रा के दौरान एक एमओयू के जरिए तैयार किया था, और इसमें जरूरत पड़ने पर समय बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन इसके बावजूद पूरे हफ्ते में इसमें करीब 8 पर्सेंट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम समझौते के बाद सप्लाई रुकने की चिंताएं कम हुई थीं, जिससे तेल के दाम गिरे थे। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य के उपयोग को लेकर ईरान की नई शर्तों के बाद कमोडिटी बाजार का रुख काफी सतर्क बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड वायदा 66 सेंट बढ़कर 80.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 94 सेंट बढ़कर 77.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की लगातार बिकवाली एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। जून के पहले पखवाड़े में ही एफआईआई ने भारतीय बाजार से 40,486 करोड़ रुपये की भारी रकम निकाल ली है। विदेशी निवेशकों ने फाइनेंशियल, तेल और गैस, ऑटोमोबाइल, आईटी, एफएमसीजी और मेटल जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स में जमकर शेयर बेचे हैं। इससे पहले मई में 46,888 करोड़ रुपये और अप्रैल में 49,034 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी। साल 2026 में अब तक एफआईआई कुल 2.74 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के भारतीय शेयर बेच चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा मार फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ी है।

रुपये की स्थिति और डॉलर की मजबूती

डॉलर इंडेक्स की मजबूती और कच्चे तेल के दामों में आए उछाल की वजह से भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, शुक्रवार को रुपया शुरुआती बढ़त गंवाने के बावजूद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 94.33 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। बाजार के जानकारों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत में तेजी आने की उम्मीद से रुपये को थोड़ा सपोर्ट मिला। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 94.30 पर खुला था और पूरे दिन यह 94.20 से 94.52 के दायरे में घूमता नजर आया।

सोने की कीमतें और जानकारों की राय

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा साल 2026 में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताए जाने के बाद सोने की कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है। फेड के इस सख्त रुख की वजह से डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे सोने जैसी बिना ब्याज वाली एसेट्स का आकर्षण कम हुआ है और बाजार में मुनाफावसूली बढ़ गई है। इसके चलते कॉमेक्स गोल्ड 4,375 डॉलर से गिरकर 4,150 डॉलर तक आ गया है, जबकि घरेलू मार्केट में एमसीएक्स गोल्ड भी 1,54,000 रुपये से टूटकर 1,47,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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