मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड June 28, 2026, 16:19 IST
सारांश
जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते थोड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। आने वाला हफ्ता बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और जीएसटी कलेक्शन जैसे कई बड़े घरेलू आर्थिक आंकड़े इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करेंगे।

अगले हफ्ते जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों और ट्रेड डील पर टिकी रहेगी शेयर बाजार की नजर।
भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता बहुत ज्यादा हलचल भरा और महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। दुनिया भर में चल रही जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण पिछले कुछ समय से बाजार में थोड़ी कमजोरी देखी गई है और यह एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। पूरे हफ्ते के दौरान इसमें लगभग एक पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले सात हफ्तों में बाजार करीब छह पर्सेंट तक नीचे गिर चुका है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्केट ने इन तमाम घरेलू और बाहरी चुनौतियों को अच्छी तरह से झेल लिया है। अब बाजार अपनी अगली बड़ी तेजी के लिए एक मजबूत बेस तैयार कर रहा है। ऐसे में निवेशकों के लिए गिरावट पर खरीदारी करने का एक अच्छा मौका बन सकता है, जहां निफ्टी के लिए 22,700 का लेवल एक मुख्य सपोर्ट के रूप में काम करेगा।
अगले हफ्ते शेयर बाजार में निवेश करने वालों की पैनी नजरें भारत और अमेरिका के बीच होने वाले संभावित व्यापार समझौते पर टिकी रहेंगी। हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के बीच एक बहुत ही अहम मुलाकात हुई है। इस बैठक के बाद यह उम्मीद काफी बढ़ गई है कि दोनों देश बहुत जल्द एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा मिलेगी, जिसका सीधा और पॉजिटिव असर भारतीय शेयर बाजार की कंपनियों पर देखने को मिल सकता है।
बाजार की चाल को तय करने में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) के रुख की भी बड़ी भूमिका होगी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद हाल के दिनों में कच्चे तेल के दामों में थोड़ी नरमी आई है। इस समय ब्रेंट क्रूड इंटरनेशनल मार्केट में करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अगर तेल की कीमतें इसी तरह कंट्रोल में रहती हैं, तो यह भारतीय मार्केट और देश की इकोनॉमी के लिए एक बहुत अच्छा संकेत होगा। इसके अलावा, पिछले हफ्ते विदेशी निवेश में सुधार होने से भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अभी भी बाजार में थोड़ी सतर्कता बनी हुई है।
अगले हफ्ते देश के कई बड़े और महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं, जो सीधे तौर पर बाजार का मूड बदल सकते हैं। इसकी शुरुआत 29 जून को होगी, जब देश के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट के आंकड़े सामने आएंगे। इसके बाद 30 जून को मई महीने का राजकोषीय घाटा यानी फिस्कल डेफिसिट और ट्रेड बैलेंस का डेटा जारी किया जाएगा। वहीं, 1 जुलाई का दिन सबसे ज्यादा व्यस्त रहने वाला है क्योंकि इस दिन जून महीने का जीएसटी कलेक्शन, ऑटो कंपनियों की सेल्स के आंकड़े और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (PMI) के नंबर आएंगे। इसके बाद 2026 के इस जुलाई महीने की 2 तारीख को सर्विसेज पीएमआई, कंपोजिट पीएमआई और देश के फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़े जारी किए जाएंगे।
अगर पिछले हफ्ते के कामकाज पर नजर डालें, तो सेंसेक्स 0.39 पर्सेंट की हल्की बढ़त के साथ 77,100.47 के लेवल पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 0.18 पर्सेंट चढ़कर 24,056 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। लेकिन अगले हफ्ते इन तमाम बड़े बदलावों और आंकड़ों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस माहौल में निवेशकों को बहुत संभलकर कदम उठाना चाहिए। ट्रेड डील से जुड़ी खबरों, क्रूड ऑयल के बदलते दामों, विदेशी निवेशकों के बदलते मूड और हर दिन आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर लगातार नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही सब मिलकर मार्केट की अगली दिशा को तय करने का काम करेंगे।
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