मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड March 29, 2026, 14:35 IST
सारांश
अगर आप शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं या गोल्ड बॉन्ड खरीदते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। सरकार ने बायबैक, म्यूचुअल फंड इनकम और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स के नियमों को बदल दिया है। इन बदलावों का सीधा असर आपकी नेट इनकम और निवेश की प्लानिंग पर पड़ने वाला है।

1 अप्रैल 2026 से बदल जाएंगे शेयर बाजार और निवेश से जुड़े टैक्स नियम।
नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत के साथ ही निवेशकों के लिए कमाई और टैक्स का गणित पूरी तरह बदलने वाला है। 1 अप्रैल से शेयर बायबैक से लेकर मार्केट में होने वाली ट्रेडिंग तक, कई चीजों पर नए टैक्स नियम लागू हो जाएंगे। अगर आप शेयर बाजार में एक्टिव रहते हैं या आपने गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाया है, तो आपको इन बदलावों को बारीकी से समझना होगा। सरकार ने बजट के जरिए जो बदलाव किए थे, वे अब जमीन पर उतरने वाले हैं। इन नियमों का मकसद टैक्स सिस्टम को और ज्यादा साफ बनाना है, लेकिन छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों की जेब पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
अभी तक शेयर बायबैक को कंपनियों के नजरिए से देखा जाता था, लेकिन अब इसे पूरी तरह से कैपिटल गेन की तरह माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि जब कोई कंपनी अपने ही शेयर वापस खरीदेगी, तो उससे निवेशकों को जो फायदा होगा, उस पर अब कैपिटल गेन टैक्स चुकाना पड़ेगा। अभी तक इसे 'डीम्ड डिविडेंड' की तरह ट्रीट किया जाता था। प्रमोटर शेयरहोल्डर्स के लिए भी सरकार ने टैक्स की दरें साफ कर दी हैं। कॉर्पोरेट प्रमोटर्स को बायबैक पर 22 पर्सेंट के हिसाब से टैक्स देना होगा, जबकि नॉन-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए यह दर 30 पर्सेंट तय की गई है। यह बदलाव उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है जो बायबैक के जरिए अपना मुनाफा बुक करने की प्लानिंग कर रहे थे।
फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी F&O में काम करने वाले ट्रेडर्स के लिए आने वाला समय थोड़ा खर्चीला होने वाला है। सरकार ने सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। अब इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेड करना आपकी जेब पर भारी पड़ेगा। फ्यूचर्स पर लगने वाला टैक्स 0.02 पर्सेंट से बढ़ाकर 0.05 पर्सेंट कर दिया गया है। वहीं ऑप्शंस की बात करें तो इस पर टैक्स 0.1 पर्सेंट से बढ़कर 0.15 पर्सेंट हो गया है। शेयर बाजार में जो लोग बहुत ज्यादा ट्रांजैक्शन करते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि इससे उनके हर सौदे पर लगने वाली लागत बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर उनके ओवरऑल मुनाफे पर पड़ेगा।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB में निवेश करने वालों के लिए भी एक जरूरी अपडेट है। अभी तक इन बॉन्ड्स को मैच्योरिटी पर भुनाने पर टैक्स में जो छूट मिलती थी, वह अब सीमित कर दी गई है। अब यह छूट सिर्फ उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगी जो आपने सीधे सरकार से ओरिजिनल इश्यू के वक्त खरीदे हैं। अगर आपने सेकेंडरी मार्केट यानी स्टॉक एक्सचेंज से किसी दूसरे निवेशक से ये बॉन्ड खरीदे हैं, तो उन्हें बेचने या भुनाने पर आपको कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। यह नियम उन लोगों के लिए झटका हो सकता है जो बाजार से सस्ते में गोल्ड बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाने की उम्मीद करते थे।
डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर भी अब नए तरीके से टैक्स का हिसाब लगाया जाएगा। अब ऐसी इनकम की गणना करते वक्त आपको ब्याज के खर्च पर कोई डिडक्शन नहीं मिलेगा। अक्सर कुछ लोग निवेश करने के लिए पैसा उधार लेते हैं और उस पर चुकाए गए ब्याज को अपनी इनकम में से घटाकर टैक्स बचाते थे। लेकिन अब नियम बदल गए हैं, चाहे आपने निवेश के लिए पैसा उधार ही क्यों न लिया हो, उस पर चुकाए गए ब्याज की छूट अब टैक्स कैलकुलेशन में नहीं मिल पाएगी।
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