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SEBI का नया सेटलमेंट रूल: जुर्माने की गणना का तरीका बदला, मामलों के निपटारे में आएगी तेजी

Upstox

5 min read | अपडेटेड October 10, 2026, 16:50 IST

सारांश

SEBI ने सेटलमेंट की रकम तय करने के लिए नया फॉर्मूला पेश किया है। इसके तहत रकम की गणना एक बेस अमाउंट यानी शुरुआती रकम से की जाएगी। यह बेस अमाउंट संबंधित उल्लंघन के लिए सिक्योरिटीज कानूनों में तय न्यूनतम पेनल्टी से जुड़ा होगा।

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SEBI के मुताबिक नए नियम से सेटलमेंट प्रक्रिया सरल और समझने में आसान होगी।

भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI ने सेटलमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इसका मकसद नियमों को आसान बनाना, जुर्माने की रकम तय करने में पारदर्शिता लाना और छोटे मामलों का तेजी से निपटारा करना है। नए नियमों के तहत ₹10 लाख तक की सेटलमेंट रकम वाले मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक रूट की सुविधा दी गई है। SEBI ने इन नए नियमों को 6 अक्टूबर को जारी नोटिफिकेशन के जरिए अधिसूचित किया है। इन नियमों को Settlement Regulations, 2026 नाम दिया गया है।

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क्या होता है सेटलमेंट?

शेयर बाजार में अगर कोई कंपनी, ब्रोकर या अन्य बाजार से जुड़ी संस्था SEBI के नियमों का उल्लंघन करती है, तो रेगुलेटर उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में संबंधित व्यक्ति या संस्था तय शर्तों के तहत सेटलमेंट के जरिए मामले को सुलझा सकती है।

इसका मतलब है कि निर्धारित रकम का भुगतान करने और जरूरी शर्तों को पूरा करने के बाद मामले का निपटारा किया जा सकता है। सेटलमेंट का मतलब यह नहीं है कि हर मामले में कार्रवाई से पूरी तरह छूट मिल जाएगी। यह सुविधा SEBI के नियमों और मामले की प्रकृति के अनुसार दी जाती है।

सेटलमेंट की रकम तय करने का नया फॉर्मूला

SEBI ने सेटलमेंट की रकम तय करने के लिए नया फॉर्मूला पेश किया है। इसके तहत रकम की गणना एक बेस अमाउंट यानी शुरुआती रकम से की जाएगी। यह बेस अमाउंट संबंधित उल्लंघन के लिए सिक्योरिटीज कानूनों में तय न्यूनतम पेनल्टी से जुड़ा होगा।

इसके बाद मामले की गंभीरता और दूसरी परिस्थितियों के आधार पर इस रकम में बदलाव किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि कार्रवाई किस चरण में पहुंची है, रेगुलेटर पहले क्या कदम उठा चुका है, उल्लंघन कितना गंभीर है और मामले में रकम बढ़ाने या घटाने वाले कौन-से दूसरे कारण मौजूद हैं। कानूनी खर्चों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

गलत तरीके से कमाई गई रकम अलग से देनी होगी

नए नियमों में एक अहम बदलाव गलत तरीके से कमाए गए पैसे और सेटलमेंट की रकम को अलग-अलग रखने का है। पहले गलत तरीके से कमाए गए लाभ, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान को सेटलमेंट की गणना में शामिल करने से रकम की दोहरी गिनती हो सकती थी।

अब इन रकमों को बेस अमाउंट तय करते समय शामिल नहीं किया जाएगा। अगर गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की राशि निर्धारित की जा सकती है, तो उसे अलग से वापस करने या चुकाने की व्यवस्था होगी। यानी सेटलमेंट की रकम और गलत तरीके से हासिल किए गए लाभ की वसूली अलग-अलग आधार पर तय की जाएगी।

नए नियमों के तहत सेटलमेंट की शर्तों में तीन चीजें शामिल होंगी। इनमें सेटलमेंट अमाउंट, जहां लागू हो वहां गलत तरीके से कमाए गए लाभ की वापसी और सुधारात्मक व नियामकीय शर्तें शामिल हैं। पहले इन गैर-मौद्रिक शर्तों को Non-Monetary Terms कहा जाता था, जिन्हें अब Remedial and Regulatory Terms (RRT) नाम दिया गया है।

₹10 लाख तक के मामलों का तेजी से होगा निपटारा

SEBI ने फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट की व्यवस्था भी शुरू की है। इसके दो प्रकार होंगे। पहला उल्लंघन की प्रकृति पर आधारित और दूसरा सेटलमेंट की रकम की सीमा पर आधारित होगा। कुछ डिस्क्लोजर यानी जानकारी का खुलासा करने से जुड़े उल्लंघन भी इस व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।

रकम पर आधारित फास्ट-ट्रैक व्यवस्था के तहत जिन मामलों में सेटलमेंट अमाउंट ₹10 लाख से ज्यादा नहीं होगा, उन्हें इंटरनल कमेटी से सीधे SEBI के पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजा जाएगा। इससे ऐसे मामलों में निपटारे की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

उल्लंघन पर आधारित फास्ट-ट्रैक व्यवस्था में SEBI संबंधित व्यक्ति या संस्था को नोटिस जारी करेगा। इसमें उसे तय रकम का भुगतान करके मामला सुलझाने का मौका दिया जाएगा। रकम का भुगतान होने के बाद सदस्यों का पैनल सेटलमेंट ऑर्डर जारी करेगा।

वित्तीय गड़बड़ियों वाले मामले भी दायरे में

नए नियमों के तहत वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने या फंड का गलत इस्तेमाल करने से जुड़े मामलों का भी सेटलमेंट किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी सुधारात्मक और नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें सही जानकारी का खुलासा करना और गलत तरीके से दूसरी जगह भेजे गए फंड को वापस लाना जैसी शर्तें शामिल हो सकती हैं।

SEBI के मुताबिक नए नियम से सेटलमेंट प्रक्रिया सरल और समझने में आसान होगी। साथ ही, रकम तय करने में मनमानी की गुंजाइश कम होगी और प्रक्रिया ज्यादा अनुमानित बनेगी। छोटे और कम गंभीर मामलों का तेजी से निपटारा होने की उम्मीद है, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई और रोकथाम का उद्देश्य भी बरकरार रहेगा। इन बदलावों को SEBI बोर्ड की पिछले महीने हुई बैठक में मंजूरी दी गई थी।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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