मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड March 16, 2026, 13:56 IST
सारांश
फिनटेक दिग्गज फोनपे ने अपने आईपीओ प्लान को फिलहाल टाल दिया है। कंपनी के सीईओ समीर निगम ने बताया कि दुनिया भर में चल रहे युद्ध और बाजार में मची उथल-पुथल के कारण यह फैसला लिया गया है। ग्लोबल मार्केट में स्थिरता लौटते ही कंपनी दोबारा लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करेगी।

फोनपे ने ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता को देखते हुए अपना आईपीओ प्लान फिलहाल टाल दिया है।
भारतीय स्टार्टअप जगत और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आई है। देश की सबसे बड़ी पेमेंट ऐप में से एक, फोनपे ने अपनी पब्लिक मार्केट लिस्टिंग यानी आईपीओ लाने की प्रक्रिया को फिलहाल टालने का फैसला किया है। कंपनी ने सोमवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मौजूदा समय में दुनिया भर में चल रहे तनाव और जियोपॉलिटिकल टकरावों के कारण बाजार में बहुत ज्यादा अस्थिरता है। ऐसे माहौल में आईपीओ लाना कंपनी के हित में नहीं होगा। फोनपे ने साफ किया है कि जैसे ही ग्लोबल कैपिटल मार्केट में स्थिरता लौटेगी, वे अपनी लिस्टिंग की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करेंगे।
इस पूरे मामले पर फोनपे के सीईओ समीर निगम ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि हम ईमानदारी से उम्मीद करते हैं कि जिन क्षेत्रों में अभी युद्ध या तनाव चल रहा है, वहां जल्द से जल्द शांति बहाल हो। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए यह भी कहा कि कंपनी भारत में पब्लिक लिस्टिंग के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। समीर निगम का यह बयान बताता है कि कंपनी अपनी योजना से पीछे नहीं हटी है, बल्कि उसने केवल सही समय का चुनाव करने के लिए अपने कदमों को थोड़ा पीछे खींचा है। बाजार के जानकारों का भी मानना है कि मौजूदा ग्लोबल हालातों में किसी भी बड़ी कंपनी के लिए आईपीओ लाना जोखिम भरा हो सकता है।
फोनपे के आईपीओ की चर्चा आज की नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी कहानी है। कंपनी ने अपनी लिस्टिंग की तैयारी काफी पहले ही शुरू कर दी थी। इसके लिए फोनपे ने अपना पूरा हेडक्वार्टर सिंगापुर से भारत शिफ्ट किया था। इस प्रक्रिया में कंपनी को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का भारी टैक्स भी चुकाना पड़ा था। इसके अलावा फोनपे ने खुद को फ्लिपकार्ट से भी पूरी तरह अलग कर लिया था ताकि वह एक स्वतंत्र इकाई के रूप में बाजार में उतर सके। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने पिछले कुछ समय में कई राउंड की फंडिंग भी जुटाई है, जिससे इसकी वैल्युएशन लगभग 12 बिलियन डॉलर यानी 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
अगर हम फोनपे के बिजनेस की बात करें, तो यह कंपनी आज भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट पर राज कर रही है। फोन के वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक फोनपे के पास 600 मिलियन से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। इसका मतलब है कि भारत का लगभग हर तीसरा आदमी फोनपे का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी के पास 4 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट यानी दुकानदार जुड़े हुए हैं। कमाई के मामले में भी कंपनी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमानों के मुताबिक कंपनी का रेवेन्यू 5,000 करोड़ रुपये के पार जाने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी अभी पूरी तरह से नेट प्रॉफिट में नहीं आई है, लेकिन इसके कई बिजनेस सेगमेंट अब एबिटा पॉजिटिव हो चुके हैं।
फोनपे सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि अब वह इंश्योरेंस, वेल्थ मैनेजमेंट और स्टॉक ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों में भी अपने पैर पसार रही है। कंपनी ने हाल ही में 'इंडस ऐपस्टोर' और 'शेयर मार्केट' जैसे नए प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। इन विस्तार योजनाओं के कारण ही निवेशक इसके आईपीओ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल युद्ध और ग्लोबल मार्केट की गिरावट ने इस पर ब्रेक लगा दिया है, लेकिन कंपनी का मजबूत यूजर बेस और बढ़ता रेवेन्यू यह संकेत देता है कि जब भी यह आईपीओ आएगा, मार्केट में बड़ी हलचल पैदा करेगा। फिलहाल के लिए निवेशकों को ग्लोबल शांति और मार्केट के संभलने का इंतजार करना होगा।
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