मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड July 07, 2026, 14:13 IST
सारांश
NSE दुनिया के सबसे प्रोफिटेबल एक्सचेंजों में से एक है। भारतीय एक्सचेंज रेवेन्यू में इसका अकेले 70% का योगदान है। इसके इक्विटी ऑप्शंस बिजनेस में सालाना 56% की जोरदार बढ़त हुई है।

NSE आईपीओ के आने से पहले ब्रोकरेज हाउस ने इसके ग्रोथ मॉडल की तुलना की।
भारतीय शेयर बाजार में इस समय नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के आईपीओ को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। NSE का यह आईपीओ मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों का पूरी तरह से एक ऑफर फॉर सेल यानी OFS होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि NSE के शेयरों की लिस्टिंग BSE पर की जाएगी, ठीक उसी तरह जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं। भारत के संगठित स्टॉक और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग मार्केट में NSE और BSE का पूरी तरह से दबदबा है। ये दोनों कंपनियां एक ड्यूपॉली बिजनेस के रूप में काम करती हैं और मार्केट शेयर के लिए एक-दूसरे को टक्कर देती हैं।
ऑफिशियल आंकड़ों को देखें तो NSE स्केल और रेवेन्यू के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में NSE का कुल रेवेन्यू 16,601 करोड़ रुपये रहा है, जो सालाना आधार पर 3.1% की मामूली गिरावट के बावजूद BSE के 4,833 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से 3.5 गुना से भी ज्यादा है। इसी तरह मुनाफे के मामले में भी NSE काफी आगे है। वित्त वर्ष 2026 में NSE का नेट प्रॉफिट 10,302 करोड़ रुपये रहा है, जो BSE के 2,487 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट से 4 गुना से भी अधिक है। हालांकि हाई बेस होने की वजह से NSE के रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर क्रमशः 3.1% और 15.4% की गिरावट देखी गई है, जबकि BSE ने अपने रेवेन्यू में 63.4% और नेट प्रॉफिट में 88.1% की शानदार बढ़त दर्ज की है।
स्टॉक एक्सचेंजों की कमाई कई अलग-अलग जरियों से होती है, लेकिन इनमें ट्रांजैक्शन चार्ज सबसे बड़ा माध्यम है। प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले हर एक ट्रेड पर एक्सचेंज एक छोटा सा शुल्क लेते हैं। वित्त वर्ष 2026 में NSE ने केवल ट्रांजैक्शन चार्ज से 13,057 करोड़ रुपये की मोटी कमाई की है, जबकि लिस्टिंग सर्विस से उसे 352 करोड़ रुपये मिले हैं। दूसरी तरफ, इसी अवधि में BSE को ट्रांजैक्शन चार्ज से 3,795 करोड़ रुपये और लिस्टिंग सर्विस से 519 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला है। इसके अलावा एक्सचेंजों को कंपनियों की सालाना लिस्टिंग फीस, मार्केट डेटा बेचने, इंडेक्स लाइसेंसिंग, क्लियरिंग और सेटलमेंट सेवाओं के साथ-साथ अपने डेटा सेंटर सर्विस से भी नियमित इनकम होती है। एक्सचेंज अपने कैश रिजर्व को निवेश करके भी ब्याज से कमाई करते हैं।
NSE और BSE दोनों का एक बड़ा वित्तीय फायदा यह है कि इनका नेट प्रॉफिट मार्जिन काफी ऊंचा रहता है। वित्त वर्ष 2026 में NSE का नेट प्रॉफिट मार्जिन 62.05% और BSE का 51.4% दर्ज किया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि इन कंपनियों को अतिरिक्त ट्रेड्स को प्रोसेस करने के लिए कोई अलग से बड़ी लागत नहीं लगानी पड़ती है, जिसे जीरो मार्जिनल कॉस्ट कहा जाता है। इन एक्सचेंजों ने अपना मुख्य टेक्नोलॉजी स्ट्रक्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही तैयार कर लिया है, इसलिए प्लेटफॉर्म पर होने वाले हर नए ट्रेड से बिना किसी अतिरिक्त ऑपरेशनल कॉस्ट के सीधे रेवेन्यू जेनरेट होता है। यही वजह है कि NSE का ऑपरेटिंग EBITDA 11,097 करोड़ रुपये और BSE का 3,078 करोड़ रुपये रहा है, जो इनके मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को दर्शाता है।
NSE का यह आगामी आईपीओ बाजार के कई बड़े संस्थानों के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने का एक बेहतरीन जरिया बन रहा है। इस OFS में हिस्सा बेचने वाले प्रमुख शेयरधारकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई, एमएस स्ट्रैटेजिक मॉरीशस लिमिटेड, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड यानी सीपीपीआईबी और अरंडा इन्वेस्टमेंट्स शामिल हैं। इनके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी जीआईसी री, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी भी अपने शेयर बेच रही हैं। कैश मार्केट में दबदबे की बात करें तो NSE का एवरेज डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम 1.05 लाख करोड़ रुपये है, जबकि BSE का 7,950 करोड़ रुपये है। लिस्टेड कंपनियों की संख्या में BSE 5,955 कंपनियों के साथ आगे है, जबकि NSE पर 2,978 कंपनियां लिस्टेड हैं। NSE ने अपने शेयरधारकों के लिए 35 रुपये प्रति शेयर और BSE ने 10 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।
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