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NSE को कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स डेरिवेटिव के लिए मिली SEBI की मंजूरी, अब RBI की अनुमति का इंतजार

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 01, 2026, 12:35 IST

सारांश

Corporate Bond Index Futures एक तरह का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसकी कीमत और प्रदर्शन किसी Corporate Bond Index से जुड़ा होगा। आसान भाषा में समझें तो इसके जरिए मार्केट पार्टिसिपेंट्स कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव के खिलाफ अपनी पोजीशन को हेज कर सकेंगे।

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NSE का कहना है कि प्रस्तावित प्रोडक्ट Market Making को भी बढ़ावा दे सकता है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स शुरू करने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से नौ ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल गया है। NSE ने गुरुवार को जारी एक प्रेस रिलीज में इसकी जानकारी दी। इस नए प्रोडक्ट का मकसद कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में जोखिम को मैनेज करने के लिए निवेशकों और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स को एक नया एक्सचेंज-ट्रेडेड विकल्प देना है।

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Corporate Bond Index Futures क्या है?

Corporate Bond Index Futures एक तरह का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसकी कीमत और प्रदर्शन किसी Corporate Bond Index से जुड़ा होगा। आसान भाषा में समझें तो इसके जरिए मार्केट पार्टिसिपेंट्स कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव के खिलाफ अपनी पोजीशन को हेज कर सकेंगे।

फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट एक्सचेंज पर ट्रेड होंगे। इससे निवेशकों और संस्थागत निवेशकों को कॉरपोरेट बॉन्ड से जुड़े जोखिम को मैनेज करने के लिए एक अतिरिक्त माध्यम मिलेगा। इसके अलावा यह प्रोडक्ट मार्केट में कीमतों की बेहतर खोज यानी Price Discovery में भी मदद कर सकता है।

जोखिम कम करने में मिलेगी मदद

NSE के मुताबिक, Corporate Bond Index Futures का इस्तेमाल मुख्य रूप से रिस्क मैनेजमेंट और पोर्टफोलियो हेजिंग के लिए किया जा सकेगा। उदाहरण के लिए, जिन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के पास बड़ी मात्रा में कॉरपोरेट बॉन्ड हैं, उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू पर बॉन्ड मार्केट में होने वाले बदलाव का असर पड़ सकता है।

ऐसे में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के जरिए वे अपने पोर्टफोलियो से जुड़े मार्केट रिस्क को मैनेज कर सकते हैं। इससे बाजार में जोखिम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है।

Market Making को भी मिलेगा सपोर्ट

NSE का कहना है कि प्रस्तावित प्रोडक्ट Market Making को भी बढ़ावा दे सकता है। कॉरपोरेट बॉन्ड पोर्टफोलियो रखने वाले मार्केट पार्टिसिपेंट्स फ्यूचर्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो से जुड़े मार्केट रिस्क को मैनेज कर पाएंगे। इससे कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में अधिक संस्थागत भागीदारी को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। NSE के अनुसार, एक बेहतर विकसित Derivatives Ecosystem भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

अभी RBI की मंजूरी जरूरी

हालांकि SEBI से NOC मिलना इस दिशा में एक अहम कदम है, लेकिन Corporate Bond Index Futures की शुरुआत अभी नहीं हुई है। NSE को इस प्रोडक्ट को लॉन्च करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जरूरी मंजूरी भी हासिल करनी होगी। यानी SEBI की मंजूरी के बाद अब RBI की मंजूरी इस प्रोडक्ट को शुरू करने की अगली अहम प्रक्रिया होगी।

NSE ने क्या कहा?

NSE के मुख्य कारोबार विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन ने कहा कि यह पहल भारत के Fixed Income Markets को और गहरा, अधिक लिक्विड और मजबूत बनाने की उसकी व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। साथ ही, इससे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को एक्सचेंज पर उपलब्ध Risk Management Products के विकल्पों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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