मार्केट न्यूज़

3 min read | अपडेटेड March 09, 2026, 11:15 IST
सारांश
ईरान और इजराइल के बीच जारी जंग ने आज भारतीय डिफेंस सेक्टर के शेयरों की कमर तोड़ दी है। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स करीब 2.75% टूट चुका है। सबसे ज्यादा गिरावट MTAR Tech में दर्ज की गई है, जो करीब 6% तक गिर गया है। ग्लोबल बाजार में मचे हड़कंप ने इस सेक्टर को भी लाल निशान में धकेल दिया है।

डिफेंस सेक्टर के शेयरों में आज भारी गिरावट देखी जा रही है।
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव भारतीय शेयर बाजार के लिए मुसीबत बनकर आया है। आमतौर पर युद्ध की खबरों के बीच डिफेंस सेक्टर के शेयरों में तेजी देखी जाती है, लेकिन आज नजारा बिल्कुल उल्टा है। ग्लोबल मार्केट में मची अफरा-तफरी और चौतरफा बिकवाली के कारण डिफेंस स्टॉक्स में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स आज सुबह 11 बजे के करीब 2.75% यानी 234 अंकों की गिरावट के साथ 8,289 के लेवल पर कारोबार कर रहा है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर डर है कि लंबे खिंचते युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे कंपनियों के फ्यूचर प्रोजेक्ट्स में देरी होने की आशंका है।
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार MTAR Tech के शेयरों पर पड़ी है। कंपनी का शेयर करीब 5.93% टूटकर 3,558 रुपये के भाव पर आ गया है। इसके अलावा भारत फोर्ज में भी 5.10% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। डायनामाटिक टेक्नोलॉजीज के शेयर करीब 4.68% नीचे गिरकर कारोबार कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र की अन्य दिग्गज कंपनियों जैसे मिडहानी में 4.24%, मझगांव डॉक में 3.81% और बीईएमएल (BEML) में 3.58% की कमजोरी देखी जा रही है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और भारत डायनामिक्स (BDL) जैसे भरोसेमंद शेयर भी आज करीब 3% तक फिसल चुके हैं।
केवल डिफेंस ही नहीं, बल्कि बाजार के लगभग हर सेक्टर में आज गिरावट का माहौल है। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 3.69% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा दबाव में दिख रहा है। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी करीब 3% की कमजोरी दर्ज की गई है। ऑटो सेक्टर 2.62% और रियलिटी इंडेक्स 2.39% नीचे ट्रेड कर रहे हैं। बाजार में छाई इस अनिश्चितता ने मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को भी नहीं बख्शा है। हर तरफ लाल निशान नजर आने से निवेशकों का पोर्टफोलियो आज काफी खाली हो गया है।
डिफेंस सेक्टर में इस बिकवाली के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला सबसे बड़ा कारण 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट है। जब ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल होता है, तो निवेशक उन सेक्टरों से पैसा निकालते हैं जिनकी वैल्यूएशन काफी ज्यादा बढ़ चुकी होती है। पिछले कुछ समय में डिफेंस शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी, इसलिए आज मुनाफावसूली का दबाव ज्यादा दिख रहा है। दूसरा कारण सप्लाई चेन की दिक्कतें हैं। इजराइल और मिडिल ईस्ट के देशों से कई कंपनियों को जरूरी कंपोनेंट्स और तकनीक मिलती है। युद्ध की वजह से इनके आने में रुकावट हो सकती है, जिससे कंपनियों के ऑपरेशन पर सीधा असर पड़ेगा। इतना ही नहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती के कारण आने वाले समय में इन कंपनियों के नेट प्रॉफिट पर दबाव दिख सकता है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो इनके प्रोडक्शन कैपेसिटी और इंप्लीमेंटेशन की रफ्तार धीमी हो सकती है। ** (डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)**
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