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4 min read | अपडेटेड November 13, 2025, 08:45 IST
सारांश
Infosys Buyback: इंफोसिस के 18,000 करोड़ रुपये के बायबैक का फायदा उठाने का आज आखिरी मौका है। कंपनी 1800 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर वापस खरीदेगी। इस बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट 14 नवंबर तय की गई है। अब सवाल ये है कि क्या 14 नवंबर को अगर शेयर खरीदते हैं तो इसके लिए एलिजिबल होंगे?
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इंफोसिस अपने निवेशकों को 18,000 करोड़ रुपये के बायबैक का तोहफा दे रही है। | Image source: Shutterstock
इंफोसिस ने अपने इस बड़े बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट 14 नवंबर तय की है। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है जिस दिन यह तय किया जाता है कि कौन से शेयरधारक किसी भी कॉर्पोरेट एक्शन (जैसे बायबैक या डिविडेंड) के लिए योग्य हैं।
भारतीय शेयर बाजार में अब टी+1 सेटलमेंट साइकल लागू है। इसका मतलब है कि शेयर खरीदने के एक दिन बाद वह आपके डीमैट अकाउंट में आते हैं। इसलिए, अगर कोई निवेशक 14 नवंबर (रेकॉर्ड डेट वाले दिन) को शेयर खरीदता है, तो वह इस बायबैक के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। बायबैक का फायदा उठाने के लिए यह जरूरी है कि शेयर 14 नवंबर से पहले खरीदे जाएं, यानी आज (13 नवंबर) खरीदारी का आखिरी दिन है। 14 नवंबर को यह स्टॉक एक्स-डेट हो जाएगा।
इंफोसिस के बोर्ड ने 11 सितंबर, 2025 को हुई अपनी बैठक में इस बड़े बायबैक को मंजूरी दी थी। यह कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बायबैक है, जिसकी कुल कीमत 18,000 करोड़ रुपये है। इस रकम से कंपनी 10 करोड़ फुली पेड-अप इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी, जिनकी फेस वैल्यू 5 रुपये है।
यह बायबैक कंपनी की कुल पेड-अप इक्विटी शेयर पूंजी का 2.41% हिस्सा है। हालांकि, यह बायबैक वैल्यू के हिसाब से सबसे बड़ा है, लेकिन इक्विटी प्रतिशत के हिसाब से नहीं। साल 2017 में, बेंगलुरू स्थित इस कंपनी ने 4.9% इक्विटी वापस खरीदी थी।
इस बायबैक की एक बड़ी बात यह है कि इंफोसिस के प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप ने इसमें हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। इनमें नंदन एम नीलेकणी और सुधा मूर्ति जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। बायबैक की घोषणा की तारीख तक प्रमोटरों के पास कंपनी की कुल 13.05% इक्विटी हिस्सेदारी थी, लेकिन वे अपना एक भी शेयर इस बायबैक में नहीं बेचेंगे।
कंपनी यह बायबैक सिर्फ 2.41% इक्विटी के लिए कर रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि अगर आपके पास 100 शेयर हैं, तो कंपनी आपके सारे शेयर 1800 रुपये में खरीद लेगी। कंपनी एक "एक्सेप्टेंस रेशियो" (स्वीकृति अनुपात) तय करेगी, जिससे यह पता चलेगा कि आपके द्वारा टेंडर किए गए शेयरों में से कंपनी असल में कितने शेयर वापस खरीदेगी। आमतौर पर, रीटेल यानी छोटे निवेशकों के सेगमेंट के लिए यह अनुपात जनरल सेगमेंट की तुलना में बेहतर होता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, शेयर वापस खरीदने की इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं।
इंफोसिस के पास 25.79 लाख से अधिक शेयर मालिक हैं। कंपनी के मुताबिक, यह बायबैक मध्यम अवधि में कंपनी की रणनीतिक और परिचालन नकदी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। कंपनी अपनी पूंजी आवंटन नीति के तहत अपने सदस्यों (शेयरधारकों) को अतिरिक्त नकदी एक कुशल तरीके से लौटाना चाहती है।
कंपनी का मानना है कि इससे इक्विटी बेस (शेयरों की संख्या) कम होगा और लंबी अवधि में शेयरधारकों की वैल्यू बढ़ेगी। कंपनी ने यह भी कहा कि वह अपने एनुअल डिविडेंड (स्पेशल डिविडेंड को छोड़कर) को भी लगातार बढ़ाने का इरादा रखती है।
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