मार्केट न्यूज़
.png)
4 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 07:31 IST
सारांश
भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव वाले हफ्ते के बाद तेजी लौट आई है। आरबीआई के कदमों और बेहतर ग्लोबल संकेतों से दो हफ्तों से जारी गिरावट थम गई है। इस हफ्ते निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान समझौते और क्रूड ऑयल की कीमतों पर रहेगी।

अगले हफ्ते बाजार में दिख सकती है हलचल | Image: Shutterstock
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट पर आखिरकार ब्रेक लग गया है। उतार-चढ़ाव से भरे कारोबारी हफ्ते के बाद घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा। इसके साथ ही मार्केट में पिछले दो हफ्तों से चली आ रही लगातार गिरावट का सिलसिला भी थम गया है। ग्लोबल मार्केट से मिले बेहतर संकेतों और भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है। इसी वजह से हफ्ते के आखिरी दिनों में बाजार के दोनों प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में बंद होने में सफल रहे। इस तेजी के बाद अब निवेशकों के मन में यह सवाल है कि इस हफ्ते मार्केट की चाल कैसी रहेगी और उन्हें कमाई के लिए क्या रणनीति अपनानी चाहिए।
पिछले कारोबारी हफ्ते के दौरान घरेलू शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए। इस दौरान एनएसई का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 करीब 1.10 पर्सेंट की बढ़त के साथ 23,622.90 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी तरफ, बीएसई का सेंसेक्स 1.73 पर्सेंट की तेजी दिखाते हुए 75,527.95 के स्तर पर जाकर थमा। इस रिकवरी से मार्केट में छाए निराशा के बादल कुछ कम हुए हैं। जानकारों का कहना है कि इस हफ्ते बाजार की दिशा कई बड़े ग्लोबल इवेंट्स और घरेलू फैक्टर्स पर निर्भर करेगी, जिन पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी होगी।
इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का मानना है कि आने वाले हफ्ते में मार्केट के निवेशक मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते से जुड़े घटनाक्रमों को ट्रैक करेंगे। हालांकि रिपोर्ट्स से यह संकेत मिल रहे हैं कि इस मामले में अच्छी प्रोग्रेस हुई है और बड़े पक्षों के बीच एक आम सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद निवेशक जियोपॉलिटिकल हालात में स्थायी सुधार को मानने से पहले इस समझौते के आधिकारिक एलान और उस पर साइन होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा क्रूड ऑयल की कीमतें भी मार्केट के सेंटिमेंट को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती रहेंगी। तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट से महंगाई का दबाव कम होगा, जिससे भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता को सपोर्ट मिलेगा। इसके उलट अगर डिप्लोमैटिक बातचीत में कोई रुकावट आती है या मिडिल ईस्ट में तनाव दोबारा बढ़ता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
इस हफ्ते बाजार के लिए संस्थागत निवेश का प्रवाह भी फोकस का एक और मुख्य एरिया रहेगा। घरेलू लिक्विडिटी बाजार को लगातार सपोर्ट दे रही है, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली में कमी आने या उनकी तरफ से शुद्ध खरीदारी शुरू होने से मार्केट के सेंटिमेंट को बड़ा बूस्ट मिलेगा। इससे बाजार में एक टिकाऊ रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही निवेशक ग्लोबल बांड यील्ड, करेंसी के ट्रेंड और इंटरनेशनल मार्केट की मूवमेंट पर भी नजर रखेंगे, जिससे कैपिटल फ्लो की फ्यूचर की दिशा का पता चल सके।
इस हफ्ते के लिए ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी को लेकर रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने निवेशकों को खास सलाह दी है। उनका कहना है कि निवेशकों को इस समय मजबूत फंडामेंटल, बेहतर अर्निंग विजिबिलिटी और अपने सेक्टर में लीडरशिप पोजीशन रखने वाली कंपनियों पर ही फोकस बनाए रखना चाहिए। निवेशकों को इस समय अच्छी लिक्विडिटी वाली क्वालिटी लार्ज कैप फाइनेंशियल कंपनियों और सपोर्टिव पॉलिसी का फायदा उठाने वाले बिजनेस को प्राथमिकता देनी चाहिए। ट्रेडर्स को बाजार में बहुत ज्यादा लेवरेज लेने से बचना चाहिए और अनुशासन के साथ रिस्क मैनेजमेंट के नियमों का पालन करना चाहिए।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख