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3 min read | अपडेटेड January 22, 2026, 14:22 IST
सारांश
Indian Bank Q3 Results: इंडियन बैंक ने तीसरी तिमाही के शानदार नतीजे घोषित किए है। बैंक का शुद्ध मुनाफा 7.3 प्रतिशत बढ़कर 3,061 करोड़ रुपये हो गया है। ब्याज से होने वाली आय में भी साढ़े सात प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। बैंक की संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और डूबे कर्ज यानी एनपीए के आंकड़ों में भी गिरावट आई है।
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इंडियन बैंक के मुनाफे में हुई बढ़ोतरी।
Indian Bank Q3 Results: सरकारी क्षेत्र के बड़े बैंकों में से एक इंडियन बैंक ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे पेश कर दिए है। बैंक के लिए यह तिमाही काफी उत्साहजनक रही है क्योंकि मुनाफे से लेकर ब्याज से होने वाली आय तक हर मोर्चे पर बैंक ने बढ़त हासिल की है। बैंक की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार तीसरी तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा साल दर साल के आधार पर 7.3 प्रतिशत बढ़कर 3,061 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा गया है। पिछले साल की समान तिमाही में बैंक ने 2,852 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। बैंक के बेहतर प्रदर्शन के पीछे मुख्य वजह ब्याज से होने वाली आमदनी में बढ़ोतरी और डूबे हुए कर्ज के लिए रखी जाने वाली रकम में कमी आना माना जा रहा है। इंडियन बैंक के इन नतीजों ने शेयर बाजार और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
इंडियन बैंक की कमाई का एक बड़ा हिस्सा उसकी शुद्ध ब्याज आय यानी NII से आया है। बैंक ने जानकारी दी है कि उसकी NII इस बार 7.5 प्रतिशत बढ़कर 6,896 करोड़ रुपये रही है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 6,415 करोड़ रुपये था। किसी भी बैंक के लिए एनआईआई उसकी वित्तीय मजबूती का एक मुख्य पैमाना होता है, जो यह बताता है कि बैंक ने कर्ज देने से कितनी कमाई की और जमा पर कितना ब्याज दिया। इंडियन बैंक का प्रदर्शन इस मोर्चे पर काफी स्थिर और मजबूत नजर आ रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा बैंक की कार्यप्रणाली पर और बढ़ सकता है। बैंक अपनी इस आय को और बढ़ाने के लिए नए-नए लोन उत्पादों पर काम कर रहा है।
बैंक के लिए सबसे राहत की बात यह रही कि उसके NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स में अच्छी गिरावट आई है। ग्रॉस एनपीए का आंकड़ा, जो पिछले साल 2.6 प्रतिशत पर था, अब घटकर 2.23 प्रतिशत पर आ गया है। वहीं नेट एनपीए के मामले में भी बैंक ने सुधार दिखाया है और यह 0.16 प्रतिशत से कम होकर 0.15 प्रतिशत रह गया है। एनपीए का कम होना इस बात का संकेत है कि बैंक अपने द्वारा दिए गए कर्ज की वसूली सही तरीके से कर पा रहा है और नए कर्ज डूबने की आशंका कम होती जा रही है। संपत्ति की गुणवत्ता में यह सुधार बैंक की बैलेंस शीट को आने वाले समय में और अधिक मजबूती प्रदान करेगा और बैंक अधिक सुरक्षित तरीके से अपनी सेवाओं का विस्तार कर पाएगा।
बैंक के मुनाफे में उछाल आने की एक बड़ी वजह प्रोविजनिंग में की गई 19 प्रतिशत की कमी है। इस तिमाही में बैंक ने भविष्य के जोखिमों के लिए 857 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह रकम 1,059 करोड़ रुपये थी। जब बैंक का कर्ज सुरक्षित होने लगता है और डिफॉल्ट की संभावना कम होती है, तब उसे प्रोविजनिंग के लिए कम पैसे अलग रखने पड़ते है, जिसका सीधा असर उसके नेट प्रॉफिट पर पड़ता है। इंडियन बैंक ने इस तिमाही में इसी रणनीति का लाभ उठाया है।
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